शहीदों को पुष्प अर्पित करने के लिए जुटे लोग
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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शहीदों को पुष्प अर्पित करते डीडीसी राजेश मीणा व अन्य. 74 वर्ष पूर्व आज ही के दिन शहीद हुए आठ देशभक्त बेतिया : हमारे देश को अंग्रेजों के दासता से मुक्त करानेके लिए अनगिनत क्रांतिकारियों ने अपनी जान भारत मां के नाम कुर्बान की थी. इन शहीदों की शहादत को नमन करने के लिए अनेक […]
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शहीदों को पुष्प अर्पित करते डीडीसी राजेश मीणा व अन्य.
74 वर्ष पूर्व आज ही के दिन शहीद हुए आठ देशभक्त
बेतिया : हमारे देश को अंग्रेजों के दासता से मुक्त करानेके लिए अनगिनत क्रांतिकारियों ने अपनी जान भारत मां के नाम कुर्बान की थी. इन शहीदों की शहादत को नमन करने के लिए अनेक जगह शहीद स्मारक बने हुए हैं.
इनमें से एक है बेतिया के ऐतिहासिक छोटा रमना में स्थित शहीद स्मारक जो हमें 24 अगस्त 1942 की याद दिलाता है. अब से करीब 74 साल पूर्व 24 अगस्त 1942 को करो या मरो के नारे के साथ प़चम्पारण जिले के रणबांकुरे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अनुमंडल कार्यालय पर तिरंगा फहराने के लिए निकल पडे़ थे. यह दिन बेतिया हीं नही पुरे बिहार के लिए एक विशेष महत्व रखता है.
इसी दिन लगभग दस हजार निहत्थे प्रर्दशनकारियों को रोकने के लिए अंग्रेज सैनिकों ने व्यापक तौर पर तैयारियां कर ली थी. उस समय बेतिया के अनुमंडल पदाधिकारी कृपा नारायण सिंह थे. अंग्रेजों ने दमनकारी नीति के के विरोध में पूरे बिहार में विरोध कीज्वाला भड़क उठी थी.
इसी कड़ी मे क्रांतिकारियों का जत्था आगे बढ़ने कि कोशिश किया तो ऐतिहासिक मीना बाजार के पूरब स्थित छोटा रमना में घेराबंदी किए अंग्रेज सैनिकों ने निहत्थे प्रर्दशनकारियों पर मशीनगनों से अंधाधुंध फायरिंग कर दी. जिसमें छपरा निवासी 30 वर्षीय राजेश्वर मिश्र, पुरानी गुदरी निवासी 28 वर्षीय गणेश राव, रायधुरवा निवासी 42 वर्षीय गणेश राय, बेतिया निवासी 22 वर्षीय भागवत उपाध्याय, लौकरिया निवासी 13 वर्षीय जगन्नाथ पुरी, गोड़ा सेमरा निवासी 42 वर्षीय फौजदार अहीर, महेसड़ा निवासी 32 वर्षीय तुलसी राउत एवं बरवत सेना निवासी 12 वर्षीय भिखारी कोईरी शहीद हो गये .हम प्रत्येक वर्ष इन शहीदो के याद में श्रद्धासुमन अर्पित कर अपना कर्तव्य निभाते है. भाजपा की हालिया नीति में तिरंगा यात्रा एवं स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किये जाने की योजना चल रही है. लेकिन इन शहीदों के परिजनों की किसी ने इस बार सुध नही ली है. 1970 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय ने बेतिया में शहीद स्मारक का शिलान्यास किया तथा शहीदों के आश्रितों को सम्मान पत्र दिया. उस दिन उन्होंने पक्का मकान और जमीन देने का भरोसा दिया. तब से लेकर आज तक कई सीएम और डीएम आए, पर उनसे मिलने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला.प्रत्येक वर्ष इन शहीदो के परिवारो के सदस्यो को शहीद स्मारक पर बुलाया जाता है . सम्मानितकिया जाता है बड़ेबड़े घोषणांए किये जाते है. लेकिन कार्यक्रम समाप्ति के बाद कोई फिर इनकी सुध लेनेवाला नही रहता है. प्रेरणा की बात यह है कि सरकारी सहायता की आस में पथरा चुकीं इन शहीदों के परिवारों की आंखों में आज भी देशभक्ति का जज्बा देखा जा सकता है
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