गिरफ्तारी के बाद भी नहीं थम रही वारदात
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Jul 2016 7:13 AM (IST)
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दो जून को विस्फोट के बाद से चर्चा में आया रॉयल बेतिया : इस पत्र के माध्यम से इस नये हॉस्पिटल में कार्यरत सभी डॉक्टरों को संदेश दिया जाता है कि यहां रॉयल का कानून चलता है़ सभी डॉक्टर दस-दस लाख रुपये रेडी रखो़ नहीं तो इस हॉस्पिटल को बम से उड़ा दिया जायेगा़ बारी-बारी […]
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दो जून को विस्फोट के बाद से चर्चा में आया रॉयल
बेतिया : इस पत्र के माध्यम से इस नये हॉस्पिटल में कार्यरत सभी डॉक्टरों को संदेश दिया जाता है कि यहां रॉयल का कानून चलता है़ सभी डॉक्टर दस-दस लाख रुपये रेडी रखो़ नहीं तो इस हॉस्पिटल को बम से उड़ा दिया जायेगा़ बारी-बारी सभी डॉक्टर मार दिये जायेंगे’.. यह चेतावनी है उस रॉयल ग्रुप की, जो रंगदारी के जगत में लगातार अपना सिक्का जमाता जा रहा है़ एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देकर यह ग्रुप पुलिस की नाकामी दिखा रहा है, संग ही मर्डर, बम विस्फोट करके परचा के संग ही शहर में खौफ भी चस्पा कर रहा है़
गौरतलब हो कि पुलिस रॉयल ग्रुप के मास्टरमाइंड संजीव उर्फ संजू पटेल, सरगना कुनाल ठाकुर, सदस्य सोनू पटेल, शेष पटेल, प्रकाश पटेल, सतीश शर्मा को सलाखों के भीतर डाल काफी हद तक रॉयल के दहशत को मिटा दिया था, साथ ही अपनी पीठ भी थपथपाने में जुट गई थी़ लेकिन, बीते 3 जुलाई की रात में शहर के प्रज्ञा गैस एजेंसी पर रॉयल के नाम से मिले एक पोस्टर में फिर से अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर पुलिस की बेचैनी बढ़ा दी़ साथ ही शहर से मिट चुका खौफ फिर फैल गया़ इसके बाद एसपी विनय कुमार गंभीर हुए और चार जुलाई को टीम के साथ संजीव पटेल के घर आ धमके़ तलाशी ली गई़ पूछताछ हुई़ कई कागजात जब्त हुए़ सुरागों के मिलने का दावा किया गया़ लगा कि रॉयला का खात्मा हो जायेगा़ लेकिन, अब फिर से साई संजीवनी हॉस्पिटल पर बम विस्फोट कर रॉयल ने दावा किया कि ‘यहां रॉयल का कानून चलता है’.
पूर्व सांसद के कॉम्पलेक्स के पीछे है साई हॉस्पिटल: सोमवार की रात जिस हॉस्पिटल में धमाका हुआ, वह बेतिया के पूर्व सांसद व सिकटा के पूर्व विधायक धर्मेश वर्मा उर्फ धामू बाबू के कॉम्पलेक्स के पीछे है़ यह हॉस्पिटल सिविल कोर्ट के सामने है़ थोड़ी ही दूरी पर एसपी कार्यालय है़ डीएम कार्यालय भी पास में है़ जहां 24 घंटे सुरक्षा बलों की तैनाती का दावा किया जाता है़ इसके बाद भी अपराधी विस्फोट
100 गज की दूरी पर 2 जून को हुआ था विस्फोट: साई संजीवनी हॉस्पिटल में बम विस्फोट सरासर पुलिसिया निष्क्रयता को दर्शा रही है़ कारण कि एक माह पहले 2 जून को इस हॉस्पिटल से महज 100 गज की दूरी पर जदयू जिलाध्यक्ष के आवास पर विस्फोट हुई थी़ इसके बाद भी पुलिस ने सबक नहीं ली़
वारदातों को अंजाम दे फैला रहा दहशत
इन घटनाओं को अंजाम दे चुका है रॉयल
21 मई: शहर के हरिवाटिका चौक पर वेल्डर मिस्त्री को जख्मी कर बालू व्यवसायियों से दस-दस लाख की रंगदारी
27 मई: बस स्टैंड स्थित प्रभावती ड्रग हाउस के मालिक से परचे के जरिए 25 लाख की रंगदारी, गार्ड पर फायरिंग
02 जून: जदयू जिलाध्यक्ष डा एनएन शाही के आवास पर बम विस्फोट, 35 लाख की रंगदारी
12 जून: अधिवक्ता अश्विनी मिश्र के नौकर श्यामदेव की हत्या
03 जुलाई: प्रज्ञा गैस एजेंसी पर पोस्टर चिपका कर अंजाम भुगतने की चेतावनी
11 जुलाई: साई संजीवनी हॉस्पिटल पर बम विस्फोट, 10-10 लाख की रंगदारी
डीटीओ दफ्तर घोटाले में आरोपितों को क्लीन चिट!
आरोपी प्रोगामर के सील दराज को तोड़ डीटीओ को सौंपे गये सभी दस्तावेज
15.68 लाख के घोटाले में डीटीओ दफ्तर के दो आरोपी गये हैं जेल
बेतिया. जिले की बहुचर्चित डीटीओ दफ्तर घोटाले में गिरफ्तार कर्मियों के खुलासे में शामिल अफसर व कर्मियों को प्रशासन की ओर से क्लीन चिट दे दी गयी है़ जांच की बात तो दूर मंगलवार को बकायदा दंडाधिकारी तैनात कर प्रोगामर लक्ष्मण प्रसाद के सील दराज को तोड़ उसमें रखे दस्तावेज डीटीओ को सौंप दिया गया़ इसके लिए सीओ को बतौर दंडाधिकारी प्रशासन की ओर से तैनात किया गया था़
जानकारी के अनुसार, बीते माह महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में डीटीओ दफ्तर में 15.68 लाख का गबन व 1.32 करोड़ के राजस्व के चपत का मामला आया था़ मामले में डीटीओ निरोज कुमार भगत के आवेदन पर नगर थाने की पुलिस ने डीटीओ दफ्तर के प्रोग्रामर लक्ष्मण प्रसाद व ऑपरेटर कुंदन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था़ गिरफ्तार इन दोनों कर्मियों ने अपनी स्वीकारोक्ति बयान में डीटीओ निरोज कुमार भगत, एमवीआई अरूण कुमार, डीटीओ रहे डीएसओ संजय कुमार, पूर्व में डीटीआ रहे राजकुमार, बड़ा बाबू सरफराज समेत अन्य कई अफसर व कर्मियों पर इस घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया़ लेकिन, पुलिस ने इन आरोपियों के स्वीकारोक्ति बयान पर कोई कार्रवाई नहीं की़
हालांकि प्रशासन की ओर से आनन-फानन में एडीएम से विभागीय जांच कराकर रिपोर्ट को उच्च स्तरीय जांच के लिए भेजने का दावा किया गया़ लेकिन, माह बीतने के बाद भी कोई जांच नहीं हो सकी़
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