गुस्सा . वाणिज्य कर उपायुक्त के खिलाफ िकया प्रदर्शन , नोटिस के िखलाफ रोष
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Mar 2016 5:05 AM (IST)
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सड़क पर उतरे व्यापारी, जताया िवरोध पिछले एक माह से वाणिज्य कर विभाग की दबंगई की आग सुलग रही थी. दबे जुबान व्यापारी विरोध कर रहे थे. लेकिन खुल कर बात सामने नहीं आ रही थी. अचानक सोमवार को शहर के छोटे बड़े सभी व्यापारी एकजुट हुए और दुकानें बंद कर विरोध प्रदर्शन किया. बगहा […]
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सड़क पर उतरे व्यापारी, जताया िवरोध
पिछले एक माह से वाणिज्य कर विभाग की दबंगई की आग सुलग रही थी. दबे जुबान व्यापारी विरोध कर रहे थे. लेकिन खुल कर बात सामने नहीं आ रही थी. अचानक सोमवार को शहर के छोटे बड़े सभी व्यापारी एकजुट हुए और दुकानें बंद कर विरोध प्रदर्शन किया.
बगहा : हुजूर ! मैं बीपीएल परिवार से हूं. शहर के थोक विक्रेता से नमक और मरचा बकाया लाता हूं. दिन भर बेचता हूं. शाम को व्यापारी का मूल धन वापस कर देता हूं. करीब 100 रुपये रोज कमाता हूं. इसी से मेरे बाल बच्चों को परवरिश होता है. मैं कहां से टैक्स दूंगा? लेकिन वाणिज्य कर विभाग के कर्मियों ने इनकी एक न सुनी.
1000 रुपये की नोटिस थमा दिये. साथ ही चेतावनी दिये कि 31 मार्च के पहले अगर ये टैक्स जमा नहीं होगा तो मुकदमा कर देंगे. एक नहीं, ऐसे दर्जनों बीपीएल परिवार के लोग हैं जिन्हें वाणिज्य कर विभाग का नोटिस मिला है. वे इस नोटिस को लेकर परेशान थे.
हालांकि वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी का कहना है कि सरकार के निर्देश के आलोक में टैक्स का निर्धारण किया गया है. वैसे लोगों को हीं नोटिस दी गयी है, जो टैक्स देने के काबिल हैं. इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है. अगर किसी की इस तरह की समस्या है तो वे कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं.
बड़े व्यापारियों की ये परेशानी
जिस व्यापारी ने एक वर्ष पूर्व 2000 रुपये टैक्स दिये थे, उसे 20 से 25 हजार रुपये का नोटिस थमा दिया गया है.व्यवसायी संघ के अध्यक्ष उमेश गुप्ता का कहना है कि वाणिज्य कर विभाग की ओर से नोटिस पूरी तरह से जोर जबरदस्ती के साथ दी जा रही है. अधिक राशि की नोटिस लेने से अगर व्यापारी इनकार करता है तो उसे धमकाया जा रहा है. जबरन हस्ताक्षर कर लिया जाता है. कंपाउंडिंग रजिस्ट्रेशन के लिए जिन व्यापारियों ने 10 हजार रुपये जमा किये हैं, उन्हें भी 50 हजार रुपये का नोटिस थमा दिया गया है.
जाने क्या है टिन नंबर
यह व्यापारियों को वाणिज्य कर विभाग की ओर से जारी किया जाता है. यह टैक्स आइडेंटीफिकेशन नंबर है. टिन नंबर के आधार पर वाणिज्य कर विभाग की ओर से टैक्स का निर्धारण किया जाता है.
व्यापारी के प्रतिष्ठान के सेल की बिलिंग के हिसाब से टैक्स की वसूली होती है.
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