शहरवासियों का खून चूसते हैं मच्छर

Published at :08 Mar 2016 8:54 AM (IST)
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शहरवासियों का खून चूसते हैं मच्छर

बेतिया : नगर परिषद बेतिया कहने को तो हाईटेक होने जा रहा है. परंतु सच्चाई यह है कि एक मच्छर भी मारने में नगर परिषद सफल नहीं है. जबकि नप प्रशासन के पास मच्छर मारने के लिए सारी व्यवस्था भी उपलब्ध है. फिर भी नप के पार्षदों से लेकर अधिकारियों तक इसकी चिंता नहीं है. […]

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बेतिया : नगर परिषद बेतिया कहने को तो हाईटेक होने जा रहा है. परंतु सच्चाई यह है कि एक मच्छर भी मारने में नगर परिषद सफल नहीं है. जबकि नप प्रशासन के पास मच्छर मारने के लिए सारी व्यवस्था भी उपलब्ध है. फिर भी नप के पार्षदों से लेकर अधिकारियों तक इसकी चिंता नहीं है.

हाईटेक सिटी की ओर बढ़ा बेतिया में शहरवासियों का रहना मच्छरों ने दुश्वार कर दिया है. रात में कौन कहें दिन में भी मच्छर शहरवासियों का खून चूस रहे है. इधर नगर परिषद विकास कार्य का दावा करते हुए एक मच्छर नहीं मार पा रही है. सच्चाई तो यह है कि नप क्षेत्र में 75 हजार घरों में रहने वाली लगभग दो लाख की आबादी मच्छरों का दंश झेलने पर मजबूर है. साधारण लोगों के घरों का बजट भी मच्छरों ने बिगाड़ दिया है. मच्छर क्वायल, गुड़ नाइट टिकिया, कार्ड व लिक्ि वड़ में लोगों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे है.

मच्छर भगाने में इतना खर्च करने के बाद भी लोग सुकून से सो नहीं पा रहे है. इन सभी परेशानियों से निजात दिलाने की जगह नप सरकार अपने धुन में व्यस्त है. जबकि अभी गरमी के मौसम की शुरुआत है. आगे इससे भी ज्यादा आफत बढ़ने वाली है.

मच्छर अगरबत्ती से पैसा बचाया तो हॉस्पिटल पहुंचे शहरवासी :जिन घरों में अगर मच्छर अगरबत्ती पर कम पैसा खर्च हुआ तो उससे ज्यादा खर्च करना पड़ जा रहा है. क्योंकि मच्छर के काटने से वे सीधे हॉस्पिटल पहुंच जाते है. मच्छरों के काटने से मलेरिया, कालाजार व डेंगू जैसे संक्रामक रोगों का शिकार शहरवासी हो रहे है.

पार्षदों को नहीं काटते हैं मच्छर!

नप के पार्षदों ने तो मानों मच्छरों से बचने के लिए सुरक्षा कवच ही लगा बैठे है. शायद उनको मच्छरों का दंश नहीं झेलना पड़ता है. तभी तो करीब एक साल से मच्छरों के मारने की कोई योजना नहीं चलायी गयी. इतना ही सभी नप पार्षदों को एक-एक छोटी फॉगिंग मशीन भी मिली हुई है. फिर भी फॉगिंग कार्य ठप है.

नप से नहीं मिल रहा डीजल व कीटनाशक :वार्ड नंबर 23 के पार्षद अभिषेक पांडेय से फॉगिंग मशीन से छिड़काव की बात पूछी गयी. तो उन्होंने साफ कहा, नप की ओर से डीजल व कीटनाशक नहीं मिल रहा है तो वे क्या करें. कई फॉगिंग मशीन भी खराब हालत में है.

फॉगिंग मशीन के बारे में कई बार कार्यपालक पदाधिकारी को कहा गया है. शहरवासियों के हित में फॉगिंग से छिड़काव अति आवश्यक है.

जनक साह नप सभापति, बेतिया

फॉगिंग मशीन खराब है उसे ठीक कराया जा रहा है. जल्द ही शहर के सभी वार्ड में छिड़काव भी शुरू होगा.

कुमार गौरव उर्फ रिंकी गुप्ता

उप सभापति, बेतिया

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