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मुझे फंसाने की साजिश, कॉलेज में पहले से ही चल रहा घोटाला

बेतिया : आरएलएसवाई कॉलेज में नैक मूल्यांकन के लिए हो रहे 1.16 करोड़ के निर्माण में वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर प्राचार्य डा रामनरेश कुमार ने सफाई दी. बुधवार को जांच टीम के जाने के बाद गुरुवार को प्राचार्य डा. रामनरेश कुमार ने प्रेस वार्ता कर अपने उपर लगाये गये आरोपों का खंडन किया. कहा, […]

बेतिया : आरएलएसवाई कॉलेज में नैक मूल्यांकन के लिए हो रहे 1.16 करोड़ के निर्माण में वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर प्राचार्य डा रामनरेश कुमार ने सफाई दी. बुधवार को जांच टीम के जाने के बाद गुरुवार को प्राचार्य डा. रामनरेश कुमार ने प्रेस वार्ता कर अपने उपर लगाये गये आरोपों का खंडन किया.

कहा, महाविद्यालय मे अनियमितता का खेल काफी दिनों से चल रहा है. उनके द्वारा इसपर रोक लगाने व नियमानुसार कार्य किये जाने की वजह से एक साजिश के तहत उन्हें बदनाम करने व हटाने की साजिश रची जा रही है. 16 अगस्त 2014 को उनका स्थानांतरण इस कॉलेज मे हुआ.

19 अगस्त को उन्होंने योगदान किया. उनके योगदान के पूर्व 19 अगस्त को ही वर्शर डा. अनिल कुमार चौहान कि मिल-भगत से 35 लाख की निकासी की गयी. 22 अगस्त को उन्हें वित्तीय प्रभार मिला. इसके पूर्व वर्शर श्री चौहान खुद चेक पर दस्तक कर निर्माण कार्य के लिए एडवांस लेते रहे. जबकि वर्शर को निर्माण कार्यों के लिए एडवांस लेने का नियम नहीं है.

2012 से कॉलेज मे हुए निर्माण कार्य मे करीब 4 करोड़ रुपये की राशि वर्शर द्वारा निकाली गयी. जिसका सामंजन अब तक नहीं हुआ है. फरवरी 2015 से वर्शर द्वारा चेक पर दस्तक नहीं किये जाने के बाद नये वर्शर की नियुक्ति के लिए विश्व विद्यालय को पैनल भेजा गया. लेकिन विवि व कॉलेज स्टाफ लॉबी की मिली भगत से वर्शर की नियुक्ति को आठ माह लटकाया गया. इसकी वजह से नैक मूल्यांकन कार्य पर विपरित प्रभार पड़ा.

सितंबर 2015 मे वर्शर की नियुक्ति के बाद उनके द्वारा नैक मूल्यांकन को लेकर विकास कार्य शुरू किये गये. जिसमें महाविद्यालय बिल्डिंग एवं विकास समिति तथा क्रय व विक्रय समिति की अनुशंसा से ही सारे कार्य कराये जा रहे है. बावजूद इसके उन्हें बदनाम करने के लिए साजिश रची जा रही है. जबकि उक्त दोनों समितियों में शिकायतकर्ता भी शामिल है तथा उनकी अनुशंसा से ही कार्य कराये जा रहे है.

नहीं है प्रावधान

आरोप निराधार है. वर्शर को एडवांस नहीं लेने का कोई प्रावधान नहीं है. विगत तीन-चार प्राचार्यों के कार्यकाल से यह कार्य हो रहा है. सभी खर्चों का समायोजन भी हो चुका है. फिर भी यदि यह गलत है, तो इसके लिए पूर्व के प्राचार्य भी जिम्मेवार है.

डाॅ अनिल कुमार चौहान,

पूर्व वर्शर, आरएलएसवाई कॉलेज

Prabhat Khabar Digital Desk
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