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आंगनबाड़ी केंद्रों से प्रति माह 8500 रुपये लेती हैं सीडीपीओ!

Updated at : 31 Jul 2019 12:43 AM (IST)
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आंगनबाड़ी केंद्रों से प्रति माह 8500 रुपये लेती हैं सीडीपीओ!

बेतिया : बगहा एक के बाल विकास परियोजना कार्यालय में आंगनबाड़ी सेविकाओं से प्रत्येक माह अवैध वसूली मामले के आरोपों की जांच का आदेश डीएम डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे ने सौंपा है. मामले में डीएम ने बगहा एसडीएम को जांच कर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया है. आरोप है कि आंगनबाड़ी सेविकाओं से प्रत्येक माह […]

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बेतिया : बगहा एक के बाल विकास परियोजना कार्यालय में आंगनबाड़ी सेविकाओं से प्रत्येक माह अवैध वसूली मामले के आरोपों की जांच का आदेश डीएम डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे ने सौंपा है. मामले में डीएम ने बगहा एसडीएम को जांच कर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया है. आरोप है कि आंगनबाड़ी सेविकाओं से प्रत्येक माह साढ़े तीन हजार व प्रत्येक केंद्र निरीक्षण के नाम पर 5 हजार की अवैध वसूली की जाती है.

परियोजना की 13 से ज्यादा सेविकाओं ने समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव व जिलाधिकारी को आवेदन देकर बगहा-एक के प्रभारी सीडीपीओ अनिता कुमारी पर अवैध वसूली का आरोप लगाया हैं. डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बगहा एसडीएम विजय कुमार मीणा को जांच का निर्देश दिया है.
आवेदन में सेविकाओं ने आरोप लगाया है कि प्रत्येक केंद्र निरीक्षण के नाम पर सीडीपीओ 5 हजार रुपये लेती हैं. कहती हैं कि ली गई राशि में उपर के पदाधिकारियों को हिस्सा देना पड़ता है. गाड़ी का खर्च भी इसमें शामिल होता है. सेविकाओं का यह भी आरोप है कि सीडीपीओ क्रय अभिश्रव पंजी के सत्यापन के नाम पर 3500 की उगाही करती हैं. राशि नहीं देने गलत आरोप लगाकर चयनमुक्ति कराने व रिकवरी की धमकी देती हैं. जबकि पूर्व में क्रय अभिश्रव पंजी सत्यापन कराने में प्रत्येक माह सेविकाओं का 3 हजार रुपया ही लगता था.
सेविकाओं का यह भी आरोप है कि किराये के मकान में चलने वाले बिना भवन वाले आंगनबाड़ी केंद्रों का वर्ष 2014-15 से किराया बकाया है. ऐसे प्रत्येक केंद्रों के बकाए भाड़े के भुगतान के नाम पर 10 हजार की मांग प्रभारी सीडीपीओ अनिता कुमारी कर रही हैं. राशि नहीं देने पर भुगतान नहीं करने की धमकी दे रही हैं. इस बीच बगहा एक की प्रभारी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अनिता कुमारी ने बताया कि परियोजना में प्रतिनियुक्त महिला पर्यवेक्षिका शील्पा सिंह, रंजना सिंह व कार्यालय के प्रधान सहायक षडयंत्र रचकर उन्हें फंसाना चाह रहे हैं. आंगनबाड़ी सेविकाओं से अवैध उगाही का आरोप निराधार है.
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