पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
Updated at : 08 Sep 2017 4:27 AM (IST)
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बेतिया : प्रशासनिक व पुलिसिया व्यवस्था से नाराज होकर प्रदर्शन करने वालों को ‘चुप’ कराने के लिए इन दिनों बेतिया पुलिस दबंगई पर उतर आयी है! हत्या, लूट और रेप जैसे मामलों में कार्रवाई के लिए तो पुलिस आवेदन का इंतजार करती है, लेकिन इन मामलों में पुलिस को खुद वादी बनने से कोई गुरेज […]
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बेतिया : प्रशासनिक व पुलिसिया व्यवस्था से नाराज होकर प्रदर्शन करने वालों को ‘चुप’ कराने के लिए इन दिनों बेतिया पुलिस दबंगई पर उतर आयी है! हत्या, लूट और रेप जैसे मामलों में कार्रवाई के लिए तो पुलिस आवेदन का इंतजार करती है, लेकिन इन मामलों में पुलिस को खुद वादी बनने से कोई गुरेज नहीं है.
नतीजा जहां से भी सड़क जाम व प्रदर्शन के मामले आ रहे हैं, वहां पुलिस एफआइआर रूपी इस हथियार का प्रयोग करने लगी है. मझौलिया, बेतिया और योगापट्टी में आये मामले पुलिसिया दबंगई के बानगी के तौर पर हैं. जिसमें केस हुए हैं. 22 अगस्त को मझौलिया में हुए सड़क जाम मामले में ग्रामीणों की दलीलें माने तो बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा यूं ही नहीं भड़का था. यहां का हरपुर गढ़वा पंचायत पूरी तरह से बाढ़ प्रभावित था, लेकिन कोई भी अधिकारी झांकने तक नहीं पहुंचा.
यहां तक की पीड़ित जब शिकायत लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचे तो सीओ, बीडीओ शिकायत सुनना तो दूर कार्यालय से गायब हो गये. पीड़ितों को कुछ और नहीं सूझा तो सभी ने बेतिया-मोतिहारी मार्ग जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया. ऐसा ही मामला योगापट्टी का भी है. ग्रामीणों के अनुसार, पूरे प्रखंड में बाढ़ सर्वेक्षण, राहत सामग्री को लेकर अफवाहों का दौर चरम पर था. सियासी रोटियां सेकी जा रही थी, प्रखंड प्रशासन सबकुछ जानते हुए भी चुप बैठी थी. नतीजा यहां भी आक्रोश बढ़ा और हंगामा हुआ. कुछ ऐसा ही मामला चार सितंबर को उस समय हुआ, बेलदारी के पास बस की ठोकर से एक युवक की मौत हो गई.
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत ही फोन कर पुलिस को इसकी जानकारी दी, लेकिन पुलिसिया सुस्ती बरकरार रही. हादसे के बाद भाग रहे बस को पकड़ना तो दूर वॉयरलेस पर मैसेज तक पास नहीं किया गया. नतीजा घटना के काफी देर बाद तक पुलिस नहीं पहुंची तो लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और सड़क जाम कर हंगामा मचाया. जानकारों की मानें तो उक्त सभी मामलों में यदि प्रशासन व पुलिस सक्रिय रही होती तो सड़क जाम जैसी नौबत आती ही नहीं. लेकिन अब सिस्टम की इस खामियों का नतीजा पीड़ित ही भुगतने पर मजबूर दिख रहे हैं.
प्रशासनिक व पुलिस की व्यवस्था से नाराज लोगों पर कस रहा कानूनी शिकंजा
केस एक: मामला 22 अगस्त का है. मझौलिया के हरपुर गढ़वा पंचायत के बाढ़ पीड़ितों ने बेतिया-मोतिहारी मार्ग जाम कर प्रदर्शन किया था. मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने जाम खत्म कराया. लेकिन बाद में इस मामले में सड़क जाम करने वालों के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी.
केस दो: बेतिया-मोतिहारी मार्ग के बेलदारी के पास सड़क दुर्घटना में एक की मौत व दो के घायल होने के बाद लोगों ने सड़क जाम कर हंगामा किया था. यह मामला चार सितंबर का है. मामले में पुलिस ने सड़क जाम करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.
केस तीन : योगापट्टी प्रखंड कार्यालय में भी बाढ़ पीड़ितों ने 21 अगस्त को हंगामा मचाया था. इसमे सीओ, बीडीओ को बंधक भी बनाया गया था. इस मामले में भी एफआइआर कराने का आदेश जारी हो गया है. जिसकी तैयारी चल रही है.
अज्ञात को ज्ञात करने में जम कर हो रहा खेल
इस पुलिसिया दबंगई कहे या फिर कुछ और… कि इन दिनों पुलिस पूरे अपने तेवर में दिख रही है. ग्रामीणों की माने तो सड़क जाम करने वाले मामलों में पुलिस ने कुछ ज्ञात के साथ दर्जन भर अज्ञात पर भी प्राथमिकी की है. अब इन अज्ञात नाम को ज्ञात करने में जमकर खेल हो रहा है. थाने के अनुसंधानक, सिपाही और चौकीदार इसमे पूरी तरह से माहिर है. लिहाजा अज्ञात को ज्ञात करने के नाम पर यह खेल चल रहा है.
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