बाढ़ से शिक्षण व्यवस्था की रफ्तार पर लगा ब्रेक
Updated at : 07 Sep 2017 4:22 AM (IST)
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बेतिया : जिले में आयी प्रलयंकारी बाढ़ ने शिक्षण की रफ्तार की व्यवस्था पर ब्रेक लगा दिया है. पहले बाढ़ की वजह से सरकारी स्कूलों में शिक्षण बाधित रहा. उसके बाद बाढ़ की क्षति के कारण विद्यालयों में पठन-पाठन की व्यवस्था चरमरा गयी. अब जब शिक्षण आरंभ करने का समय आया तो शिक्षकों ही नदारद […]
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बेतिया : जिले में आयी प्रलयंकारी बाढ़ ने शिक्षण की रफ्तार की व्यवस्था पर ब्रेक लगा दिया है. पहले बाढ़ की वजह से सरकारी स्कूलों में शिक्षण बाधित रहा. उसके बाद बाढ़ की क्षति के कारण विद्यालयों में पठन-पाठन की व्यवस्था चरमरा गयी. अब जब शिक्षण आरंभ करने का समय आया तो शिक्षकों ही नदारद हैं. विभाग के अनुसार उनको बाढ़ से हुई क्षति के आकलन में लगा दिया गया है.
आश्चर्य नहीं कि सरकारी विद्यालयों में अगले माह छात्र-छात्राओं की परीक्षा आयोजित की जानी है. यदि विद्यालयों में कक्षाएं संचालित नहीं होंगी तो छात्रों की परीक्षा में वे क्या लिखेंगे? इसको लेकर अभिभावकों में चिंता व्याप्त हो गयी है. उनका कहना है कि शिक्षा की सरकारी घोषणाएं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की है. लेकिन ऐसी व्यवस्था में ये घोषणाएं कितनी कारगर साबित होंगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. जाहिर है कि शिक्षकों को बाढ़ की क्षति के आकलन में लगाने से शिक्षण की रफ्तार रुक-सी गयी है. बाढ़ से जानमाल को भारी क्षति हुई है. इसके साथ ही जिले की शिक्षा व्यवस्था पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ा है.
बाढ़ प्रभावित गौनाहा, नरकटियागंज, मैनाटांड़, चनपटिया, सिकटा, मझौलिया, बगहा व गंडक उस पार के चार प्रखंडों में अवस्थित सरकारी विद्यालयों को भारी क्षति पहुंची है. प्रारंभिक से लेकर प्लस टू स्कूल तक के विद्यालयों के बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है. इसके साथ हीं बच्चों के पठन-पाठन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है. शिक्षा विभाग की जानकारी के अनुसार जिले के 354 प्रारंभिक विद्यालयों में क्षति की प्रारंभिक रिपोर्ट प्राप्त हुई है. क्षति का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है.
विद्यालयों की क्षति का भौतिक सत्यापन का निर्देश
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्रारंभिक शिक्षा मोतिउर रहमान की मानें तो करीब आधा दर्जन विद्यालय पूर्ण रुप से क्षतिग्रस्त है. जबकि शेष अन्य विद्यालयों को आंशिक तौर पर क्षति पहुंची है. उन्होंने बताया कि यह अनुमान प्रारंभिक तौर पर लिया गया है. विस्तृत क्षति के लिए विद्यालयों का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों एवं बीआरसीसी को दिया गया है.
नियमित कक्षाओं का संचालन नहीं हो पा रहा संभव
इधर बाढ़ से हुई तबाही के बाद भी शिक्षण व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है. बाढ़ प्रभावित इलाकों के बच्चे अभी भी पूरी तरह उबर नहीं पाये हैं. जिसका असर उनके पठन-पाठन पर पड़ रहा है. रही सही कसर बाढ़ से हुई क्षति के आकलन के कार्य में शिक्षकों को लगाने से पूरी हो रही है. अधिकांश विद्यालयों के शिक्षकों को बाढ़ क्षति का सर्वेक्षण करने में लगा दिया गया है. जिसकी वजह से विद्यालयों का नियमित संचालन संभव नहीं हो पा रहा है.
मुख्य बातें
प्रारंभिक से लेकर प्लस टू तक के 354 विद्यालयों पर बाढ़ की मार
दर्जनभर पंचायतों में बाढ़ के प्रभाव से सरकारी शिक्षण संस्थानों को हुई भारी क्षति
आधा दर्जन विद्यालय पूर्णत : क्षतिग्रस्त, दर्जनों विद्यालयों को आंशिक नुकसान
बाढ़ बाद सर्वेक्षण में लगे शिक्षकों से पटरी पर नहीं लौट सकी शिक्षण व्यवस्था
आगामी माह में छात्रों की लिखित परीक्षा की घोषणा से चिंतित हुए अभिभावक
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