पंडई का जलस्तर बढ़ा, इलाके में दहशत

Updated at : 02 Sep 2017 6:51 AM (IST)
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पंडई का जलस्तर बढ़ा, इलाके में दहशत

रतजगा कर रात गुजार रहे पिछली बाढ़ से सहमे लोग साठी : गुरुवार की रात हुई मूसलाधार बारिश के चलते पंडई नदी के जलस्तर में वृद्धि हो गयी है. यह नदी एक बार फिर से अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है. इससे क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है. नदी किनारे अवस्थित गांव परसौनी, […]

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रतजगा कर रात गुजार रहे पिछली बाढ़ से सहमे लोग

साठी : गुरुवार की रात हुई मूसलाधार बारिश के चलते पंडई नदी के जलस्तर में वृद्धि हो गयी है. यह नदी एक बार फिर से अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है. इससे क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है.
नदी किनारे अवस्थित गांव परसौनी, हरनहिया, हिच्छोपाल, बेलवा, महीपुर, वसंतपुर, दुमदुमवा, भतौड़ा आदि गांवों के लोगों का कहना है कि जिस रफ्तार से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है. अगर आगे भी जारी रहा तो बाढ़ की विभीषिका फिर से झेलनी होगी. उनका कहना है कि 14 अगस्त को आई प्रलंयकारी बाढ़ को सोचकर उनके रोंगटें खड़े हो रहे हैं. अभी तक उसके कहर से वे उबर नहीं सके हैं और सहमे हुए हैं. इस बीच जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण जागकर रात गुजारने को अभिशप्त हैं.
स्थिति है कि घर से बाहर रह रहे लोग लगातार संपर्क कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ले रहे हैं. गांव के छोटे-छोटे बच्चे भी पिछले बाढ़ की भयावह मंजर देख चुके हैं. वे फिर से पानी बढ़ने का नाम सुनकर कांप उठ रहे हैं. जानकार बताते हैं कि पिछले बाढ़ के समय नेपाल में भारी बारिश होने से बाढ़ की स्थिति बनी थी. यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश रूक गयी तो जलस्तर में निश्चित रूप से गिरावट आयेगी. विदित हो कि यदि इस क्षेत्र में सूखा हो और पहाड़ी क्षेत्र में बारिश हो तो भी पहाड़ी पंडई नदी में बाढ़ आ जाती है. यदि जलस्तर में गिरावट नहीं हुई तो यहां के लोगों को एक बार फिर से बाढ़ से जूझना होगा.
जिले पर मंडराने लगी है अकाल की काली छाया : बेतिया .बाढ़ की विभिषिका में खरीफ की फसल मारे जाने से जिले के उपर अकाल की काली छाया मंडराने लगी है. बाढ़ का पानी हटने के बाद तबाही का मंजर देख किसान माथा पीट रहे हैं. बाढ़ ने किसानों की आर्थिक कमर तोड़ दी है। इस जिले में बाढ़ ने भारी तबाही मचायी है. हजारों हेक्टेयर में लगी धान,मक्का, हल्दी, अदरख, अरहर सहित सब्जी की खेती को बाढ़ ने बर्बाद कर दिया है. पशुओं को चारा नहीं मिल रहा है.
पशुओं के लिए रखे गये भूसा पानी में दह गये हैं या फिर बर्बाद हो गये हैं. मध्यम व लघु वर्गीय किसान कर्ज लेकर धान की खेती किये थे. किसानों को भविष्य में पेट भरने के साथ-साथ महाजनों का कर्ज वापस करने की भी चिंता सता रही है. सैकड़ों घर गिर चुके हैं. घरों में पानी कई दिनों तक जमा रहने से घर के कई सामान के साथ रखे अनाज भी बर्बाद हो चुके हैं कृषक मजदूर रोजी रोटी की तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन करने की मंशा संजोने लगे हैं. इनके समक्ष काम का घोर अभाव हो गया है .
चार पंचायतों के पीड़ितों के बीच बंटा फूड पैकेट : रामनगर. रामनगर प्रखंड मुख्यालय में बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच चल रहे वितरण के तीसरे दिन शुक्रवार को प्रखंड परिसर में पीड़ितों की भारी भीड़ जमी रही.पीड़ित परिवारों के बीच परिसर में ही अलग-अलग वितरण स्थल से फूड पैकेट का वितरण किया गया. प्रखंड विकास पदाधिकारी मो.असलम तथा अंचलाधिकारी आलोक चंद्र रंजन के नेतृत्व में पीड़ितों को फूड पैकेट का लाभ दिया गया.वितरण के तीसरे दिन प्रखंड के जोगिया, भावल,डैन मरवा तथा गुदगुदी के पीड़ितों के बीच राहत सामग्री दी गई.अंचलाधिकारी ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वितरण सर्वेक्षण सूची के आधार पर किया गया है.हलाकि वितरण कार्यक्रम बारिश होने के कारण देर से शुरु की गई.
प्रखंड मुख्यालय के कृषि भवन प्रखंड सभागार व परिसर में वितरण स्थल बनाए गए थे.जहां से प्रतिनियुक्त कर्मियों ने पीड़ितों के बीच फूड पैकेट का वितरण किया.गौरतलब है कि प्रखंड क्षेत्र में बीते दिनों आई बाढ़ में प्रखंड के 14 पंचायतों के कई गांव में पानी प्रवेश कर गया था और कई घर नदी में विलीन हो गए है.आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था़
वितरण के दौरान प्रखंड कृषि पदाधिकारी शंभू शरण सिंह, सहकारिता पदाधिकारी नितेश कुमार यादव,पंचायती राज पदाधिकारी अरुण कुमार आदि समेत अन्य प्रतिनियुक्त कर्मी व भारी संख्या में पीड़ित मौजूद रहे.
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