ग्रामीण इलाकों में भी बनायी गयी मानव शृंखला

Updated at : 11 Dec 2015 4:34 AM (IST)
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ग्रामीण इलाकों में भी बनायी गयी मानव शृंखला

रक्सौल : मधेश आंदोलन का समर्थन करते हुए जल्द से जल्द से समस्या का समाधान निकालने व पठन पाठन का माहौल कायम करने की अपील करते हुए गुरुवार को बारा जिला के ग्रामीण इलाकों में मानव शृंखला बनायी गयी. विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक, राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता व स्थानीय लोगों की सहभागिता में भारतीय ग्रामीण बॉर्डर […]

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रक्सौल : मधेश आंदोलन का समर्थन करते हुए जल्द से जल्द से समस्या का समाधान निकालने व पठन पाठन का माहौल कायम करने की अपील करते हुए गुरुवार को बारा जिला के ग्रामीण इलाकों में मानव शृंखला बनायी गयी.

विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक, राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता व स्थानीय लोगों की सहभागिता में भारतीय ग्रामीण बॉर्डर पिरपाती पचरौता से लेकर भारत नेपाल मैत्री पुल के पास तक करीब नौ किलोमीटर की दूरी में 10 हजार लोगाें की सहभािगता में मानव शृंखला का निर्माण किया गया.
इसमें शामिल लोगों ने सरकार और आंदोलनरत दोनों पक्ष के लोगों से जल्द से जल्द समस्या का समाधान निकालने की अपील की. कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे रामानंद गुप्ता ने बताया कि बंदी के कारण सबको परेशानी है. छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई बाधित है. ऐसे में मानव शृंखला बनाकर दोनों पक्ष पर जल्द निदान के लिए दबाव बनाया गया है.
मानव शृंखला में आठ गांव के 22 सरकारी विद्यालय, 11 निजी विद्यालय के बच्चों ने भाग लिया. मौके पर मनोज सिंह, सरोज अंसारी, जोखु यादव, उमेश साह, जितेन्द्र सिंह, विनय सिंह सहित पीपरपाती, विशुनपुरवा, श्रीनगर बैरिया, बेनौली, लक्ष्मीपुर, बेलदारी के ग्रामीणों ने भाग लिया था.
ठंड के बीच जारी है आंदोलनकारियों की नाकेबंदी
रक्सौल .सीमाई क्षेत्र में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बावजूद भारत-नेपाल सीमा के नोमेंस लैंड पर बीते चार माह से चल रहा आंदोलन रूकने का नाम नहीं ले रहा है.
ठंड के बावजूद गुरुवार को आंदोलन स्थल पर सैकड़ों की संख्या में आंदोलनकारी मौजूद थे. जिनका उत्साह देखते बन रहा था. आंदोलनकारी नेपाल सरकार के विरुद्ध नारेबाजी भी कर रहे थे. ठंड से बचाव को लेकर आंदोलनकारियों द्वारा लगाये गये टेंट पंडाल को काफी सुरक्षित कर लिया गया है.
रात होने पर टेंट के चारों ओर से कनात लगाकर उसे सुरक्षित कर दिया जाता है ताकि आंदोलन को लेकर रात में रहने वाले कार्यकर्ताओं को ठंड से दो चार न होना पड़े. कुछ संगठनों व आंदोलन में शामिल दल के नेताओं द्वारा रात में रहने वालों के लिए कंबल सहित आग की व्यवस्था की जा रही है. आंदोलन के चार माह पूरे हो चुके है जबकि आर्थिक नाकेबंदी के 78 दिन पूरे हो चुके है.
वहीं आंदोलनकारियों की माने तो नेपाल में खाद्य पदार्थो के साथ गैस, केरोसिन, पेट्रोलियम पदार्थो की भारी किल्लत हो चुकी है. लोग परेशान है लेकिन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही है.
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