कचरा निस्तारण की समस्या बरकरार
Updated at : 12 Feb 2015 3:51 AM (IST)
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मोतिहारी : नगर निकाय का गठन निकाय क्षेत्र के विकास व स्वच्छता के ख्याल से किया गया, ताकि शहरी क्षेत्र के लोगों को हरेक सुविधाएं मिल सके. मोतिहारी नगरपालिका का गठन सन 1869 में हुआ. ब्रिटिश काल में अंग्रेजी हुकूमत ने निकाय का गठन कर शहर के विकास व स्वच्छता सहित तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने […]
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मोतिहारी : नगर निकाय का गठन निकाय क्षेत्र के विकास व स्वच्छता के ख्याल से किया गया, ताकि शहरी क्षेत्र के लोगों को हरेक सुविधाएं मिल सके. मोतिहारी नगरपालिका का गठन सन 1869 में हुआ. ब्रिटिश काल में अंग्रेजी हुकूमत ने निकाय का गठन कर शहर के विकास व स्वच्छता सहित तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास शुरू किया.
लेकिन आज भी मोतिहारी नगरपालिका क्षेत्र के सर्वागीण विकास का सपना अधूरा है. शहरवासी पेयजल, रोशनी व जलनिकासी के लिए नाला जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. साफ-सफाई की स्थिति शहरवासियों के लिए बड़ी समस्या बन गयी है. यह अलग बात है कि गुजरते समय के साथ निकाय के क्षेत्रफल में विस्तार व आबादी में इजाफा हुआ, लेकिन इसके साथ नगरपालिका भी सशक्त हुई है. शहरी क्षेत्र के बढ़ने से नप के राजस्व में सौ गुन्ना अधिक राजस्व की बढ़ोतरी हुई है. बावजूद इसके अन्य सुविधाओं की कौन कहे, नगरपालिका मूल कार्य शहर की साफ-सफाई भी ठीक से नहीं कर पा रही है.
बैठक में होती है किरकिरी
शहर की साफ-सफाई के लिए नगरपालिका के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है. न ही मशीनरी का अभाव है और न ही मैनपावर का. बावजूद इसके शहर की साफ-सफाई संतोषजनक नहीं है. जबकि सफाई पर प्रतिमाह लाखों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहा है. संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं होने से सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने में हर स्तर पर कोताही होती है. इसको लेकर बोर्ड की बैठक में किरकिरी बनी रहती है.
नित्य नये प्रयोग
शहरी क्षेत्र की साफ-सफाई को लेकर नप प्रशासन नित्य नये प्रयोग में लगा है. बड़े शहरों की तरह यहां भी साफ-सफाई के लिए एजेंसियों को लगाये जाने का निर्णय लिया गया है. पिछली बोर्ड की बैठक में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव की व्यवस्था को सभी वार्ड में लागू करने का प्रस्ताव लाया गया. इसको लागू करने पर पर भी सहमति बन गयी है. लेकिन कचरा निस्तारण के लिए आज भी नप के पास जमीन नहीं है. इसके लिए जमीन की खरीदारी की जानी है. इस प्रस्ताव को बोर्ड से स्वीकृति मिले तीन साल बीत गये हैं, बावजूद जमीन उपलब्ध नहीं हो पायी है. स्थिति यह है कि शहर के कूड़ा का उठाव कर नगरपालिका क्षेत्र में ही दूसरे जगहों पर कचरा का निस्तारण किया जाता है. इससे जहां एक तरफ सफाई होती है, वहीं शहर का दूसरा भाग कचरे में तब्दील होता जा रहा है.
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