कमजोर छात्रों के लिए दो घंटे विशेष पढ़ाई

Updated at : 31 Jul 2013 4:00 AM (IST)
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कमजोर छात्रों के लिए दो घंटे विशेष पढ़ाई

मोतिहारीः जिले भर के सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा बच्चों को उपलब्ध कराना एक चुनौती बन गयी है. पांचवीं कक्षा के बच्चों को कक्षा दो स्तर का ज्ञान नहीं है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अधिकारी से लेकर प्रधानाध्यापक व शिक्षक भी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर रहे हैं. वर्ष 2012 […]

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मोतिहारीः जिले भर के सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा बच्चों को उपलब्ध कराना एक चुनौती बन गयी है. पांचवीं कक्षा के बच्चों को कक्षा दो स्तर का ज्ञान नहीं है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अधिकारी से लेकर प्रधानाध्यापक व शिक्षक भी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर रहे हैं. वर्ष 2012 के आंकड़े के अनुसार कक्षा पांच के 44.4 फीसदी ही बच्चे ही कक्षा दो के पाठ्य पुस्तक को पढ़ सके.

वहीं, कक्षा पांच के 31.4 प्रतिशत बच्चे ही कक्षा दो के भाग को बना सके हैं. हालांकि इस जिले में मिशन गुणवत्ता कार्यक्रम ‘समङो सीखे-2’ आरंभ होना है. इसमें कक्षा एक से पांच तक के बच्चों में कक्षा सापेक्ष भाषा एवं गणित सिखाने का ठोस कार्य किया जायेगा. वहीं, मध्यांतर के बाद दो घंटे तक शिक्षक कमजोर छात्रों को पढ़ायेंगे.

मिशन गुणवत्ता का लक्ष्य
कक्षा एक के बच्चें अपनी कक्षा में किताब को धारा प्रवाह के साथ पढ़ सके, वहीं गणित में एक से 100 तक की संख्या पहचान सके व आसानी से लिख पढ़ सके. कक्षा दो के बच्चे अपनी किताब को धारा प्रवाह समझा के साथ पढ़ सके एवं अभिव्यक्त भी कर सके तथा छोटे-छोटे वाक्यों लिख सके तथा गणित में 1 से 100 तक की संख्या घटते व बढ़ते क्रम में समझा के साथ साधारण जोड़-घटाव की क्रिया भी कर सकें. वहीं, कक्षा तीन, चार व पांच के बच्चे कक्षा दो के भाषा के किताब को धारा प्रवाह के साथ पढ़ने के साथ अपने विचार व्यक्त कर सके. वहीं गणित में संख्या की पहचान, जोड़, घटाव व भाग की क्रिया को समझा के साथ हल कर सके और मौखिक प्रश्न भी बना सके. हालांकि यह लक्ष्य न्यूनतम है बच्चें इससे आगे भी सिख सकते हैं.

एचएम व शिक्षकों का दायित्व
गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक को समय से स्कूल आना होगा. इसके लिए भाषा एवं गणित की गतिविधि एक-एक घंटा अवश्य करना होगा. अभिभावकों के साथ बैठक कर बच्चों के दक्षता पर चर्चा करनी होगी. मासिक जांच एवं मासिक दक्षता चार्ट तैयार करना होगा. वहीं, अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के अभिभावकों से संपर्क स्थापित कर छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना होगा.

कैसे हो गुणवत्ता
मिशन गुणवत्ता कार्यक्रम को शत प्रतिशत तब ही धरातल पर उतारा जा सकता है जब कक्षा तीन, चार व पांच के बच्चों को कक्षावार न पढ़ाकर बल्कि उन्हें दक्षतावार पढ़ाया जाये तथा कक्षा एक एवं दो के बच्चों को जिम्मेदार शिक्षक के माध्यम से अपनी ही कक्षा में समूहवार पठन पाठन पर जोर दिया जाये तथा बच्चों की जांच कर बेस लाइन तैयार किया जायेगा. प्रगति के अनुसार समूह को बदला जायेगा.

कठिन है, पर असंभव नहीं
गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को शत प्रतिशत धरातल पर उतारना कठिन तो है, लेकिन असंभव नहीं है. ऐसा मानना है डीपीओ, सर्व शिक्षा अभियान नारद कुमार द्विवेदी का. उन्होंने बताया कि अगर इस कार्य में लगे सभी शिक्षा कर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन करें तो बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा अवश्य उपलब्ध करायी जा सकती है.

मिशन गुणवत्ता, कार्यक्रम समङो सिखे-2 का बेस लाइन अगस्त तक तैयार कर लिया जायेगा. उसके बाद कार्यक्रम आरंभ हो जायेगा.

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