ताड़ी बेचनेवाले के बेटे को आइआइटी में 379वीं रैंक

रक्सौलः मन में सपने व दिल में जज्बा हो, तो मुफलिसी भी मुकाम हासिल करने में आड़े नहीं आती है. दुष्यंत ने तभी तो कहा था, कौन कहता है कि आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो. हम बात कर रहे हैं शहर के आश्रम रोड स्थित चौधरी टोला […]
रक्सौलः मन में सपने व दिल में जज्बा हो, तो मुफलिसी भी मुकाम हासिल करने में आड़े नहीं आती है. दुष्यंत ने तभी तो कहा था, कौन कहता है कि आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो. हम बात कर रहे हैं शहर के आश्रम रोड स्थित चौधरी टोला निवासी लालबाबू चौधरी व उनके बेटे–बेटियों की.
लालबाबू ने पिता होने का फर्ज निभाया तो उनके बेटे–बेटियों ने भी मेहनत से अपने पिता के सपने को साकार करने के लिए जी–तोड़ मेहनत की. लालबाबू चौधरी ने ताड़ी का कारोबार कर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है. उसने न सिर्फ अपने बेटे को आइआइटीयन बनाया है, बल्कि अपने सभी छह संतानों को बेहतर तालीम दी है.
लालबाबू को चार पुत्रियां व दो पुत्र है. बड़ी बेटी पूजा रानी एमबीए (पीजीपीएम) करके स्फकॉन इंडिया दिल्ली में सीनियर एचआर है. दूसरी बेटी नित्या नारी चार्टर्ड एकाउंटेंट की अंतिम वर्ष की छात्र है. तीसरी बेटी श्वेता रानी दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में बीकॉम अंतिम वर्ष में अध्ययनरत है, जबकि चौथी बेटी नेहा रानी रक्सौल में बीए अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रही है. इन सबसे अलग लालबाबू की जिदंगी में उनकी पांचवीं संतान सबसे अधिक खुशी लेकर आया है. बेटा सावन कुमार ने पहले प्रयास में ही आइआइटी में देश स्तर पर 379वां रैंक प्राप्त किया है. उसका नामांकन आइआइटी मुंबई में हुआ है. लालबाबू चौधरी कहते हैं कि सावन ने नवोदय वृंदावन, पश्चिम चंपारण से पढ़ाई की है. उसे सौ फीसदी स्कॉलरशिप मिला. नवोदय से पास करने के बाद उसका मोतिहारी स्थित एक स्कूल में नामांकन कराया, लेकिन उसने दिल्ली में तैयारी की. साउथ दिल्ली स्थित फिट्जी की परीक्षा में शामिल हुआ, जहां उसे 100 फीसदी स्कॉलरशिप मिला. इस साल प्लस टू की परीक्षा
10 सीजीपीए मार्क्स के साथ पास की. प्रथम प्रयास में ही उसने आइआइटी में भी सफलता हासिल की. नामांकन के बाद कई बैंकों ने ऋण देने के लिए संपर्क किया है. एसबीआइ के स्थानीय अधिकारियों ने घर आकर ऋण देने की पेशकश की है. साथ ही, पांच साल तक ब्याज नहीं लेने की बात भी की है. लालबाबू की छठी संतान आदित्य कुमार भी अपने बड़े भाई की राह पर है. वह नवोदय वृंदावन से 10 सीजीपीए से पास किया है. केरल स्थित दक्षिण फाउंडेशन में उसका 100 फीसदी स्कॉलरशिप के साथ चयन हुआ है.
लालबाबू कहते हैं कि जिंदगी में कई परेशानियों का सामना करने के बाद भी उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को सर्वोपरि माना है. उन्होंने बताया कि वे 25 ताड़ के पेड़ से ताड़ी उतरवा कर उसे बेचवाने का काम करते हैं. इस काम के लिए दो आदमी रखे हुए हैं, जो ताड़ी खुदरा भी बेचते हैं. लालबाबू कहते हैं कि अब दुख के दिन बीतने वाले हैं. उन्होंने खुद 10वीं तक पढ़ाई की और उनकी पत्नी अनपढ़ है. अब बच्चों को बेहतर तालीम देकर खुशी हो रही है.
(जीत कुमार सिंह)
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