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देव सूर्य मंदिरः इस कुंड में स्नान करने से दूर होती है गंभीर बीमारियां, जानें क्या है इसके पौराणिक महत्व...

Updated at : 25 Mar 2023 6:37 PM (IST)
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देव सूर्य मंदिरः इस कुंड में स्नान करने से दूर होती है गंभीर बीमारियां, जानें क्या है इसके पौराणिक महत्व...

Chaiti Chhath puja लोक आस्था के महापर्व छठ का आज पहला दिन है. इसके साथ ही औरंगाबाद के देव सूर्यमंदिर में प्रतिवर्ष लगने वाले चार दिवसीय चैती छठ मेले की भी शुरुआत हो गई.

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लोक आस्था के महापर्व छठ का आज पहला दिन है. औरंगाबाद के देव सूर्य मंदिर में प्रतिवर्ष लगने वाले चार दिवसीय चैती छठ मेले की भी इसके साथ शुरुआत हो गई. मेले से संबंधित सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है. जिला प्रशासन भी श्रद्धालुओं एवं छठ व्रतियों के स्वागत के लिए पूरी तरह से तैयार है. वहीं, देव का पौराणिक सूर्य मंदिर और उसके साथ-साथ पवित्र सूर्यकुंड भी सजकर तैयार हो चुकी है.

जिला प्रसाशन की तयारी पूरी

डीएम सौरभ जोरवाल जिला प्रशासन की तैयारियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. व्रतियों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसको लेकर हर संभव प्रयास किया गया है. जिलाधिकारी ने बताया कि व्रतियों की सुविधा के लिए इस बार कुछ बदलाव किए गए हैं. सूर्य मंदिर तथा सूर्य कुंड तालाब तक जाने-आने के लिए नया मार्ग भी तैयार कराया गया है, जिससे भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके.

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कुंड में स्नान से दूर होतें हैं रोग

औरंगाबाद के सूर्यनगरी देव में स्थित भगवान भास्कर के प्राचीन मंदिर का पौराणिक महत्त्व है. ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर त्रेता युग का है. इस मंदिर का वर्णन कई प्राचीन धर्म गर्न्थों में भी है. इससे जुड़ी है एक कथा बहुत प्रचलित है. कथा के अनुसार इस मंदिर को राजा इला के पुत्र ऐल ने बनवाया था. धार्मिक ग्रंथों में ये उल्लेख है कि राजा ऐल कुष्ट रोग से पीड़ित थे. इसी सूर्य कुंड में स्नान करने से उनका कुष्ट रोग ठीक हो गया था. जिसके बाद राजा ऐल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था. इस मंदिर में भगवन सूर्य अपने तीनों स्वरूपों में विराजमान हैं. यहां उनके उदयाचल, मध्याचल तथा अस्ताचलगामी स्वरूपों का दर्शन किया जा सकता है.

भगवन सूर्य पूरी करते हैं हर मनोकामना

मंदिर में विराजमान उनकी मूर्तियां भी इसी सूर्य कुंड में मिली थी. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो कोई भी सच्चे मन से भगवान भास्कर की पूजा करता है, भगवान सूर्य उसकी मनोकामना को पूरी कर देते हैं. हालांकि, पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि यह मंदिर सातवीं शताब्दी का है और इसे सुरक्षित रखने के लिए इसके संरक्षण की जरुरत है. बहरहाल, व्रतियों और श्रद्धालुओं के स्वागत को लेकर जिला प्रशासन ने सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं और डीएम सौरभ जोरवाल ने श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने के लिए आश्वस्त किया है.

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