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buxar news : सुस्त गति से हो रही धान की खरीदारी, बिचौलियों के हाथों बेचने को मजबूर हैं किसान

buxar news : तरह-तरह का बहाना बनाकर टाल-मटोल कर रहीं सरकारी क्रय एजेंसियां

buxar news : बक्सर. जिले के किसान खेतों से फसल की कटाई कर खलिहानों में धान भंडारित कर उसे बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते फिर रहे हैं. लेकिन उसे क्रय करने वाला कोई नहीं मिल रहा है.

सरकारी क्रय एजेंसियां तरह-तरह का बहाना बनाकर खरीदारी में टाल-मटोल कर रही हैं, तो उसका फायदा उठाकर व्यापारी औने-पौने भाव में खरीदारी के लिए मोल-तोल कर रहे हैं. ऐसे में धान की खेती करना किसानों के लिए मुसीबत बन गयी है. किसानों की माने तो सहकारी समितियों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद का दावा केवल कागजों में चल रहा है. पैक्स प्रबंधन बिचौलियों के माध्यम से 1900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदारी करा रहे हैं और वास्तविक किसानों से धान क्रय करने में हिलाहवाली कर रहे हैं. किसानों को रबी फसल की बोआई के लिए उर्वरक व बीज आदि के अलावा अन्य कार्यों के लिए पैसे की आवश्यकता है, सो वे उन्हीं बिचौलियों के हाथों लुटने को मजबूर हैं.

सरकारी एजेंसियों की सुस्त चाल से किसान बेहाल

सरकारी एजेंसियां काफी धीमी गति से धान की खरीदारी कर रही हैं. इसका सहकारिता विभाग का आंकड़ा है, जिसके मुताबिक एक माह में 113 समितियों द्वारा मात्र 749 किसानों से 7,579.417 एमटी धान क्रय किया गया है. इनमें सबसे ज्यादा नावानगर प्रखंड में 165 किसानों से 1770.363 एमटी धान खरीदा गया है. जबकि, इटाढ़ी प्रखंड में 122 किसानों से 1151.463 एमटी तथा राजपुर में 82 किसानों से 1089.00 एमटी धान क्रय हुआ है. सहकारी समितियों की इस सुस्ती का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है.

घाटे का सौदा बनी धान की खेती

किसान अरुण कुमार सिंह का कहना है कि धान की खेती घाटे का सौदा बन गयी है. सरकार द्वारा सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,369 रुपये प्रति क्विंटल एवं ग्रेड ””ए”” का एमएसपी 2,389 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है. वहीं धान का बाजार मूल्य 1900 रुपये प्रति क्विंटल है. किसानों को मजबूरी में 1900 रुपये के भाव से बिचौलियों के हाथों बेचना पड़ा रहा है. इससे प्रति क्विंटल उन्हें तकरीबन 469 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

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