buxar news : शिव-पार्वती विवाह के साथ शुरू हुआ सिय-पिय मिलन महोत्सव

Edited by SHAILESH KUMAR
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buxar news : सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम हुआ गुलजारहरिनाम संकीर्तन व श्रीरामचरितमानस के पाठ से भक्तिमय हुआ माहौल

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बक्सर. शहर के नयी बाजार स्थित सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम परिसर में मंगलवार को उत्सवी माहौल में 56वां सिय-पिय मिलन महोत्सव का आगाज हो गया.

पूज्य संत श्री खाकी बाबा सरकार के 56वें निर्वाण तिथि पर होने वाले इस महा महोत्सव का शुभारंभ तड़के श्रीरामचरित मानस के सस्वर नवाह्न परायण एवं श्री हरिनाम संकीर्तन के साथ हुआ. इस क्रम में श्रीकृष्ण लीला एवं रात में श्रीराम लीला का मंचन किया गया. दोपहर बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ व्यास पीठ का पूजन कर श्रीराम कथा शुरू करायी गयी. इसी के साथ श्री धाम वृंदावन से पधारे मलूक पीठाधीश्वर जगदगुरु श्री राजेंद्र देवाचार्य जी महाराज ने श्रीराम कथामृत की वर्षा की. महोत्सव में मलूक पीठाधीश्वर नौ दिनों तक श्रीराम कथा सुनायेंगे. बसांव पीठाधीश्वर श्री अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज एवं श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम के महंत श्री राजाराम शरण जी महाराज द्वारा व्यास पीठ की पूजन की रस्म पूरी की गयी. इससे पूर्व श्री कृष्ण लीला तथा झांकी के बीच मिथिलानियों द्वारा श्री सीताराम विवाह से संबंधित पद गायन किया गया, जिससे वहां मिथिला की रसधार बहने लगी.

गौरी-शंकर विवाह लीला का हुआ मंचन

महोत्सव के प्रणेता साकेतवासी पूज्य संत व विवाह महोत्सव आश्रम के संस्थापक नेहनिधि श्रीनारायण दास जी भक्तमाली उपाख्य मामाजी के परिकरों द्वारा श्रीराम लीला का मंचन किया गया. पहले दिन श्री गौरी शंकर विवाह लीला को जीवंत किया गया, जिसमें दिखाया गया कि देवर्षि नारद पहुंचते हैं और राजा हिमवान के कहने पर वे देवी पार्वती का भविष्य बताते हैं. वे अपनी भविष्यवाणी में देवी पार्वती के पति के गुण व दोष का उल्लेख करते हुए कहा जाता हे कि उनका दुल्हा योगी होंगे, विकराल जटाधारी व अमंगल वेशधारी होंगे. उनके माता-पिता को लेकर लोग अनजान रहेंगे और उनका कोई घर मकान नहीं होगा. यह सुन देवी गौरी के पिता हिमवान चिंतित हो गए.

इस बीच देवी पार्वती कठोर तपस्या करती है. उनके कठोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनके साथ विवाह रचाने पर राजी हो जाते हैं. भोले बाबा भूत, बैताल आदि के साथ बरात लेकर राजा हिमवान के दरवाजे पर पहुंचते हैं. उन्हें देख पार्वती की मां डर जाती है और पुत्री के विवाह से इंकार करती हैं. हालांकि काफी समझाने-बुझाने के उपरांत वे मान जाती हैं और देवी गौरी एवं भगवान शिव का विवाह संपन्न होता है.

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