बक्सर: रामपुर में श्रीराम महोत्सव, पंडित मधुसूदन जी महाराज ने सुनाई अहिल्या उद्धार और विश्वामित्र यज्ञ रक्षा की कथा

Author Girish divedi|Edited by Vivek Singh
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श्री राम कथा

बक्सर के रामपुर गांव में आयोजित श्रीराम महोत्सव में कथावाचक पंडित मधुसूदन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के बाल्यकाल से लेकर अहिल्या उद्धार और विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तक की कथा सुनाई. श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भक्ति भाव से हिस्सा लिया.

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Rampur Shri Ram Mahotsav Katha : बक्सर के केसठ प्रखंड के रामपुर गांव में आयोजित साप्ताहिक श्रीराम महोत्सव के पांचवें दिन कथावाचक पंडित मधुसूदन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के बाल्यकाल, गुरुकुल शिक्षा, महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा और माता अहिल्या उद्धार की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया

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Buxar news : भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का किया भावपूर्ण वर्णन

केसठ प्रखंड के रामपुर गांव में आयोजित साप्ताहिक श्रीराम महोत्सव के पांचवें दिन प्रसिद्ध कथावाचक पंडित मधुसूदन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के बाल्यकाल, गुरुकुल शिक्षा, महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन तथा माता अहिल्या उद्धार की कथा का विस्तार से वर्णन किया. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अल्प समय में ही गुरुकुल में रहकर सभी विद्याओं में पारंगत हो गए थे. भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बीच बचपन से ही अटूट प्रेम और भाईचारे का संबंध था, जिसे देखकर अयोध्या की प्रजा भी भावविभोर हो जाती थी.

विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए किया राक्षसों का संहार

कथावाचक ने बताया कि जब महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षस लगातार विघ्न डालने लगे, तब वे अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ से भगवान राम एवं लक्ष्मण को अपने साथ भेजने का आग्रह किया. दोनों भाइयों ने ऋषि के साथ जाकर ताड़का सहित कई राक्षसों का संहार किया और यज्ञ की सफलतापूर्वक रक्षा की.

माता अहिल्या उद्धार की कथा सुन भावुक हुए श्रद्धालु

उन्होंने जनकपुर जाते समय माता अहिल्या उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से माता अहिल्या को शाप से मुक्ति मिली. यह प्रसंग भगवान की करुणा, दया और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का अद्भुत उदाहरण है. कथा के दौरान श्रद्धालु पूरे समय भक्ति भाव में डूबे रहे.

भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ पूरा माहौल

कथा समाप्त होने के बाद आयोजित भजन-कीर्तन में श्रद्धालु भक्ति रस में झूम उठे. पूरे पंडाल में "जय श्रीराम" के जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. हजारों श्रद्धालुओं ने कथा और कीर्तन का आनंद लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया.

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