बक्सर: रेल कॉरिडोर के लिए किसानों की सहमति के दावे पर बवाल, प्रभावित किसान मोर्चा ने कहा- नहीं दी कोई सहमति
बक्सर में रेल कॉरिडोर के लिए किसानों की सहमति की खबरों को मोर्चा ने नकारा। लंबित मांगों और अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण पर जताई गहरी नाराजगी।
Buxar News : बक्सर जिला के चौसा प्रखंड अंतर्गत बनारपुर गांव स्थित शिव मंदिर में रविवार को प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर मोर्चा की बैठक हुई. बैठक में आठ अगस्त को एमसी कॉलेज अखौरीपुर गोला में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई VDAC बैठक और उसमें प्रकाशित ‘रेल कॉरिडोर के लिए किसानों की सहमति’ संबंधी खबर की समीक्षा की गयी. मोर्चा ने किसानों की सहमति के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अतिरिक्त भूमि के लिए किसानों से विधिसम्मत सहमति नहीं ली गयी है.
नौकरी और पुनर्वास के मुद्दे छोड़ जमीन पर ही रहा फोकस
मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि VDAC बैठक में नौकरी, R&R, वार्षिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रभावित गांवों के विकास जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए थी. इसके बजाय बैठक में मुख्य रूप से रेल कॉरिडोर के लिए अतिरिक्त भूमि लेने पर ही फोकस रहा.
मोर्चा ने कहा कि प्रभावित परिवारों से जुड़े पुराने वादों का पहले समाधान होना चाहिए. किसानों ने नौकरी, पुनर्वास और प्रभावित गांवों के विकास से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट कार्रवाई की मांग की.
65 एकड़ अतिरिक्त जमीन को लेकर उठे सवाल
मोर्चा के अनुसार रेल कॉरिडोर के लिए पहले से करीब 137 एकड़ भूमि अधिसूचित है. अलाइनमेंट में बदलाव के बाद अब करीब 65 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिन्हित की गयी है.
किसानों का आरोप है कि अतिरिक्त भूमि के संबंध में उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी और न ही विधिसम्मत तरीके से उनकी सहमति ली गयी. इसी को लेकर मोर्चा ने प्रकाशित खबर में 65 एकड़ में से 42 एकड़ भूमि के लिए किसानों की सहमति होने के दावे को भी खारिज किया.
मौजा-वार और रैयत-वार सहमति सार्वजनिक करने की मांग
मोर्चा ने प्रशासन से 65 एकड़ अतिरिक्त भूमि के मामले में मौजा-वार और रैयत-वार लिखित सहमति सार्वजनिक करने की मांग की. किसानों का कहना है कि यदि वास्तव में सहमति ली गयी है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
मोर्चा ने कहा कि किसानों की जमीन से जुड़े मामले में पारदर्शिता जरूरी है और किसी भी प्रक्रिया को नियमों के अनुसार ही पूरा किया जाना चाहिए.
बिना सूचना पीलर लगाने का लगाया आरोप
बैठक में JMS के नाम पर बिना पूर्व सूचना पीलर लगाकर जमीन पर कब्जे की कोशिश का भी आरोप लगाया गया. मोर्चा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रभावित किसानों को विश्वास में लिये बिना किसी तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.
वहीं STPL की भर्तियों में प्रभावित परिवारों के युवाओं को प्राथमिकता नहीं मिलने का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया.
पुराने 1065 एकड़ से प्रभावित परिवारों के वादे पहले पूरे हों
मोर्चा ने मांग की कि पुराने 1065 एकड़ भूमि से प्रभावित परिवारों से किये गये वादों को पहले पूरा किया जाये. बैठक में कहा गया कि नए भूमि अधिग्रहण या अतिरिक्त जमीन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले पुराने प्रभावित परिवारों से जुड़े रोजगार, पुनर्वास, वार्षिकी और अन्य मांगों का समाधान जरूरी है.
मोर्चा ने प्रशासन से किसानों के साथ पारदर्शी तरीके से संवाद करने और उनकी आपत्तियों का समाधान करने की मांग की.
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