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हादसे का न्योता दे रहा नया भोजपुर थाना, भये से सो नहीं पाते पुलिसकर्मी

Updated at : 08 Nov 2025 10:29 PM (IST)
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हादसे का न्योता दे रहा नया भोजपुर थाना, भये से सो नहीं पाते पुलिसकर्मी

दूसरे को सुरक्षा देने वाली विहार पुलिस यहां पर खुद असुरक्षित महसूस कर रही है.

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डुमरांव़ दूसरे को सुरक्षा देने वाली विहार पुलिस यहां पर खुद असुरक्षित महसूस कर रही है. यहां पर पब्लिक सुरक्षा के लिहाज से बहुत पहले ही विहार पुलिस के तरफ से थाना प्रदान किया गया. लेकिन मामला यह है कि जब पब्लिक को सुरक्षा प्रदान करने वाली पुलिस खुद असुरक्षित हो जाएं तब पब्लिक के सुरक्षा कैसे प्रदान होगी. यही वाक्या है डुमरांव अनुमंडल क्षेत्र के नया भोजपुर थाने का. यहां का भवन अति जर्जर हो चुका है. लिहाजा थाने का भवन हादसे का न्योता दे रहा है, फिर भी विभाग चुप्पी साधे बैठी हुई हैं. इस थाने की पुलिसकर्मी जान जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभाते हैं. जबकि नौ माह पहले ही थाना के जर्जर भवन को देखते हुए नए भवन बनाने के लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी कर ली गयी थी. उसके बाद भी नतीजा यह है कि आज तक थाने का भवन नसीब नहीं हुआ. विभागीय आदेश के बाद मार्च महीने में ही मिट्टी जांच कराने के लिए गया था, लेकिन आज तक भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया. मालूम हो कि थाने का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी बड़ा हादसा से इंकार नहीं किया जा सकता है. पूरे छत का सेलिंग टूट कर गिर चुका है. छत पर लगे बीम भी नीचे के तरफ दब गया है, कहीं कहीं छत भी नीचे के तरफ दब गया है. चारों तरफ की पलस्तर टूट कर गिर गया है, सिलिंग में हर तरफ केवल रड दिख दिख रहा है. यह केवल एक रूम की बात नहीं है, बल्कि पूरे भवन का यही स्थिति है. यहां पर दूसरे को सुरक्षा देने वाले खुद असुरक्षित है. स्थिति यह है कि यहां पर हादसे की डर से पुलिसकर्मी रात में सो नही पाते है. सरकार जहां एक तरफ सुरक्षाकर्मियों के लिए मॉडल थाना बनाने की बात कह रही है, वहीं दूसरे तरफ नया भोजपुर थाने का भवन इसका उदाहरण बन गया है. भवन इतने जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है, कि जान जोखिम में डालकर यहां की पुलिसकर्मी अपने कर्तव्य को निर्वाहन कर रहे हैं. स्थल चयन होने के बाद भी नहीं लगा निर्माण कार्य : बताते चलें कि बीते मार्च महीने में ही थाना को मॉडल थाना के तहत भवन बनाने के लिए स्थल चयनित तथा मिट्टी जांच करायी गयी थी. लेकिन उसके बाद भी मामला अभी तक ठंढे बस्ते में पड़ा है. हैरानी की बात यह है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया फिर भी मामला अभी तक अधर में ही लटका है. यहां थाना परिसर में कुल कमरे हैं तीन : थाना परिसर के अंदर कमरे मात्र तीन हैं, जिसमें से एक कमरे में थाना संचालित होता है, तो वही, दूसरे कमरे में करीब 21 के संख्या में विहार पुलिस के जवान रहते है, एवं तीसरे कमरे को मालखाना के रूप में प्रयोग किया जाता है. भवन जर्जर होने से बरामदे तथा घर का प्लास्टर टूट कर गिर रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस थाने के भवन पर विभागीय अधिकारियों की नजर ही नहीं पड़ रहा है. पूरे भवन जर्जर, हादसे का दे रहा न्योता : इस भवन में कमरे तीन हैं और एक बरामदा भी हैं लेकिन तीनों कमरे व बरामदा का हाल अति दयनीय हो चुका हैं. एक कमरे में थाने का काम चलता है, दूसरे कमरे में लगभग 21 की संख्या में पुलिसकर्मी रहते हैं. तीसरे कमरे को मालखाना बनाया गया है. लेकिन कोई कमरा या कोई कोना सुरक्षित नहीं है. कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया कि एक बार हमलोग पांच, छह के संख्या में सोए थे तभी ऊपर से एकाएक भारभराकर सेलिंग टूट कर गिरने लगी. जैसे तैसे भाग कर हमलोग जान बचाए. हालांकि उसमें दो पुलिसकर्मी हल्का फुल्का चोटिल भी हो गए थे. थाना भवन में हाजत का भी व्यवस्था नही : नया भोजपुर थाने में हाजत नहीं है, थाने में हाजत नहीं रहने के कारण कैदी भी पुलिस कर्मी के साथ ही सोते और रहते हैं. हालांकि सुरक्षा को देखते हुए रात में यहां पर अपराधी, तथा कैदी को नहीं रखा जाता है. यदि कोई अपराधी पकड़ा जाता है तो उसे रात में डुमरांव थाने में शिफ्ट कर दिया जाता है. भय व डर से सो नहीं पाते हैं पुलिसकर्मी : हादसे की आशंका से पुलिसकर्मी सही ढ़ंग से सो भी नहीं पाते हैं. सीलिंग का प्लास्टर टूट कर गिरता रहता हैं. आधे से अधिक भवन का प्लास्टर टूट कर गिर चुका है. कहीं-कहीं छत भी दब गया है, हर तरफ छत का सरिया दिख रहा है. कभी-कभी प्लास्टर पुलिसकर्मियों के ऊपर भी गीर जाता है. भय से पुलिसकर्मी हर समय सहमे रहते हैं. दस्तकों से भाड़े के मकान में संचालित हो रहा थाना : विदित हो की नया भोजपुर स्थित थाना का अपना भवन नहीं है. अपना भवन नही होने के कारण किराए के भवन में थाना संचालित होता है. करीब 23 वर्षों से यही सिलसिला चल रहा है. यह पेपर मिल का बहुत पुराना जर्जर भवन है, जिसे किराये पर लिया गया है. बताया जाता है कि यह भवन बहुत पुराना पेपर मिल का है जो अब जर्जर हालात में पहुंच चुका है. थाने में बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी : थाने के अंदर हाजत, सरिस्ता, मालखाना, बैरेक, तथा आगंतुक कक्ष जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं. भवन के अंदर थाना के आवश्यक कागजात फाइल रखने की भी कोई सुविधाएं नहीं हैं. बारिश में सभी कमरों से टपकता है पानी : वैसे तो बरसात का मौसम खत्म हो चुका है, लेकिन बरसात कब शुरू हो जाए ये किसी को पता नहीं बीते चार, पांच दिन मौंथा तूफान के कारण जमकर बरसात हुई हैं. नया भोजपुर थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. क्योंकि बरसात के मौसम में सभी कमरे से पानी टपकने लगता है, जिसके चलते थाना की फाइलें व अन्य आवश्यक कागजात बचाने के लिए ऊपर से त्रिपाल टांगना पड़ता है, या आवश्यक कागजात को प्लास्टिक में छुपा कर रखना पड़ता है. कोई भी कमरा ऐसा नहीं है कि जिसमें पानी नहीं टपकता हो. थाने के अंदर हर समय निकालते रहते हैं जहरीले जीव जंतू : बारिश के दौरान यहां पर पुलिस कर्मियों को भी त्रिपाल टांग कर रहना पड़ता है. बारिश के दरम्यान उपर से पानी टपकने के कारण हर तरफ भवन में रिसाव हो जाता है. रिसाव के कारण दिवालों में करेंट भी फैल जाता है, जिस कारण से हादसे की आशांका हर समय बनी रहती है. दिन हो या रात हो, थाने परिसर के अंदर हर समय सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जीव जंतु निकलते रहते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि भवन के नवीनीकरण के लिए मिट्टी जांच की प्रक्रिया मार्च महीने में ही पूरी कर ली गई है. लेकिन अभी तक भवन निर्माण में कार्य नहीं लग पाया है. उन्होंने कहा की यहां पर भय के आतंक में रहते हैं पुलिस कर्मी हर समय सहमे व डरे रहते है, ताकि कोई अनोहोनी न हो जाए. ऐसे में अब देखना यह है कि नया भोजपुर पुलिस कर्मियों की नया मॉडल थाना के रूप में भवन विभाग के तरफ से कब तक उपलब्ध कराया जा रहा है. क्या कहते हैं एसडीपीओ नया भोजपुर थाना निर्माण के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है. इसकी जानकारी बिहार पुलिस भवन निर्माण विभाग पटना से जानकारी लेनी पड़ेगी. पोलत्स कुमार, एसडीपीओ, डुमरांव

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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