बक्सर में 1.43 लाख रुपये के गबन मामले में पूर्व मुखिया, सचिव और तकनीकी सहायक पर FIR दर्ज

कैथहरकला गांव में बना पक्की नाली
बक्सर के कैथहरकला ग्राम पंचायत में सरकारी राशि के गबन और दुरुपयोग का मामला सामने आया है. इस मामले में तत्कालीन मुखिया, पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है. पूर्व मुखिया ने आरोपों को भ्रामक बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.
Buxar Panchayat Scam : बक्सर के राजपुर प्रखंड के ग्राम पंचायत कैथहरकला में सरकारी राशि के गबन और दुरुपयोग का मामला सामने आया है. जिला पदाधिकारी-सह-द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के आदेश के आधार पर तत्कालीन मुखिया, पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम परसियां निवासी सचिदानंद ओझा ने इस संबंध में जिला पदाधिकारी के समक्ष परिवाद दायर किया था. मामले की सुनवाई के बाद द्वितीय अपीलीय प्राधिकार ने अपने अंतिम निर्णय में पाया कि योजना संख्या 02/2017-18 के तहत 1,43,339 रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान कर सरकारी राशि का गबन किया गया है.
Buxar News : तीन लोगों पर दर्ज हुई प्राथमिकी
प्राधिकार के निर्देश पर धनसोई थाना में तत्कालीन मुखिया सुशीला देवी, पंचायत सचिव कृष्ण नंदन सिंह और तकनीकी सहायक राकेश कुमार यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. मामले में विधि सम्मत कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
Corruption Case : पूर्व मुखिया ने आरोपों को बताया भ्रामक
इधर, पूर्व मुखिया सुशीला देवी ने जिला पंचायतीराज पदाधिकारी को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि योजना के नाम में पंजी पर “मोड़” शब्द छूट जाने के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है.
उन्होंने बताया कि योजना का वास्तविक नाम “मोड़ से उ०म०वि० के सामने से बाहा तक पक्की नाली निर्माण” है, जिसे प्राकलन, एमबी और बीडीओ द्वारा स्वीकृति भी इसी नाम से मिली थी.
निर्माण कार्य को लेकर दी सफाई
पूर्व मुखिया के अनुसार, योजना के तहत कुल 471 फीट नाली निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन भूमि विवाद के कारण केवल 281 फीट तक ही कार्य हो सका. उन्होंने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट में नाली की लंबाई मात्र 120 फीट दर्शाई गई है, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है.
दोबारा मापी की उठाई मांग
सुशीला देवी ने जिला पंचायत राज पदाधिकारी से मांग की है कि निर्मित नाली की पुनः सही मापी कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और उन्हें लगाए गए आरोपों से मुक्ति मिल सके.
कैथहरकला पंचायत का यह मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. अब इस मामले में आगे की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है.
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