डीसीएलआर डुमरांव न्यायालय के कार्यों के विरोध में अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन बहिष्कार

अधिवक्ताओं का कहना है कि जो अपीलें अभी विचारण हेतु लंबित हैं, उनमें कई मामलों में उत्तरवादी की उपस्थिति नहीं है.
डुमरांव. एडवोकेट्स एसोसिएशन डुमरांव के अधिवक्ताओं ने सामूहिक संघ के निर्णय के आलोक में 10 जनवरी से लगातार डीसीएलआर डुमरांव के न्यायालयीन कार्यों का बहिष्कार कर रखा है. अधिवक्ताओं का आरोप है कि डीसीएलआर न्यायालय में विधि-सम्मत प्रक्रिया, न्यायिक मर्यादा और नियमों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे वादकारियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. अधिवक्ताओं ने बताया कि पूर्व के आदेशों में रखे गए अभिलेखों को बिना पक्षकारों को नोटिस भेजे तथा बिना अधिवक्ताओं को अभिलेख देखने (सीन कराने) का अवसर दिए ही न्यायालय में मंगाया जा रहा है. इसके साथ ही न्यायालय में अधिवक्ताओं के साथ शिष्टाचार और मर्यादा के अनुरूप बातचीत एवं व्यवहार नहीं किया जा रहा है. आरोप है कि एमए, बीएलडीआर एवं सीपीसी के नियमों के विरुद्ध न्यायालयीन कार्य संचालित हो रहा है. अधिवक्ताओं का कहना है कि जो अपीलें अभी विचारण हेतु लंबित हैं, उनमें कई मामलों में उत्तरवादी की उपस्थिति नहीं है. वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव कार्य में व्यस्तता के कारण डीसीएलआर का कार्यालय एवं न्यायालय मतगणना के दौरान लगभग 15 दिनों तक बंद रहा, लेकिन उस अवधि को अभिलेख में पैरवी अथवा समय-सीमा में शामिल नहीं किया गया. इसके विपरीत, उक्त अवधि को अनुपस्थिति दर्शाते हुए लगभग 50 मामलों को मोटो खारिज किया जा रहा है. अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे विधिसम्मत सलाह देते हैं, तो न्यायालय में यह कहा जाता है कि हमसे ज्यादा कोई नहीं जानता, और न्यायपीठ से उठकर डीसीएलआर अपने चेंबर में चले जाते हैं. इतना ही नहीं, अधिवक्ताओं का उपहास उड़ाते हुए यह टिप्पणी की जाती है कि यहां कैसे-कैसे अधिवक्ता आते हैं, जिससे अधिवक्ता समुदाय में गहरा रोष व्याप्त है. अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह बहिष्कार अपने मुवक्किलों के अधिकारों की सुरक्षा, अभिलेखों में स्पोकेन ऑर्डर पारित कर निष्पक्ष निष्पादन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है और उनका डीसीएलआर से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है. उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि डीसीएलआर द्वारा नोटिस बोर्ड पर जारी सूचना में पक्षकार स्वयं या अपने एजेंट के रूप में उपस्थित रहें लिखा गया है, लेकिन एजेंट की परिभाषा स्पष्ट नहीं की गयी है. इस बहिष्कार में अधिवक्ता चितरंजन पाण्डेय, महासचिव पृथ्वीनाथ शर्मा, बाल अरुण, सोम नाथ ठाकुर, उदय नारायण राय, जितेन्द्र श्रीवास्तव, राणा संजय सिंह, अशोक कुमार, विशाल कुमार सिंह, शशिकांत राम, किरण कुमारी सिंह, प्रभानाथ तिवारी, विजय कुमार चौबे, केदार सिंह यादव, बिक्रमा राम, ओमप्रकाश वर्मा सहित कई अन्य अधिवक्ता शामिल हैं.
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