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Buxar News: विजयादशमी महोत्सव: धू-धूकर जल गई सोने की लंका

Updated at : 29 Sep 2025 9:53 PM (IST)
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Buxar News: विजयादशमी महोत्सव: धू-धूकर जल गई सोने की लंका

श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में किला मैदान स्थित विशाल मंच पर चल रहे 22 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के 16 वें दिन सोमवार को रावण की लंका धू-धूकर जल गयी

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बक्सर

. श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में किला मैदान स्थित विशाल मंच पर चल रहे 22 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के 16 वें दिन सोमवार को रावण की लंका धू-धूकर जल गयी. जिससे लंका में हाहाकार मच गया. श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध रामलीला मण्डल श्री राधा माधव रासलीला एवं रामलीला संस्थान के स्वामी श्री सुरेश उपाध्याय “व्यास जी ” के निर्देशन में रात को रामलीला में “लंका दहन ” प्रसंग का मंचन किया गया. जबकि दिन में श्रीकृष्णलीला में “श्याम सगाई ” लीला साकार हुआ.

सीता जी की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी

रामलीला में दिखाया गया कि सुग्रीव को राज्य मिलने के बाद वह श्रीराम की सुध लेना भूल जाते हैं. तब लक्ष्मण जी किष्किंधा जाकर उन पर क्रोधित मुद्रा में सीता की खोज में मदद करने के उनके वादे को याद दिलाते हैं. अपनी गलती मानते हुए वानर राज सुग्रीव अपनी सेना के बंदर, भालूओं को सीता की खोज के लिए सभी दिशाओं में रवान करते हैं. इधर हनुमान जी, जामवंत जी, नल, नील, अंगद जी सभी माता सीता को ढूंढने के लिए चल देते हैं. सीता का पता लगाते हुए सभी बंदर और भालू समुद्र के समीप पहुंच जाते हैं. सभी वीर समुद्र पार करने में अपनी असमर्थता दिखाते हैं. इसके बाद जामवंत जी हनुमान जी को उनके बल का स्मरण दिलाते हैं. तब हनुमान जी गर्जना करके समुद्र मार्ग में चल देते हैं. आगे बढ़ने पर उन्हें सर्पों की माता सुरसा दिखाई देती है. वह हनुमान जी को खाने के लिए सौ योजन का मुंह फैला देती है. हनुमान जी चतुराई से अपना छोटा सा रूप बनाकर सुरसा के मुंह में प्रवेश कर बाहर निकल जाते हैं. आगे बढ़ने पर सिंध नाम की राक्षसी मिलती है. उसको मार कर हनुमान जी लंका के द्वार पर पहुंचते हैं. जहां उन्हें लंकिनी से भेंट होती है और वे उसका उद्धार करते हुए लंका में प्रवेश करते हैं. लंका में वह विभीषण जी के महल में पहुंचते हैं. वहां विभीषण हनुमान जी को सीता जी का पता बताते हैं. हनुमान जी अशोक वन पहुंचकर श्रीराम जी द्वारा दी हुई मुद्रिका माता सीता को देते हैं. माता सीता को समझा कर फल खाने के बहाने अशोक वन को नष्ट करने लगते हैं. यह खबर जान रावण उन्हें पकड़ने हेतु अपने पुत्र अक्षय कुमार समेत अन्य योद्धाओं को भेजता है. अक्षय कुमार को हनुमान जी मार देते हैं. भाई के मारे जाने के बाद मेघनाद पहुंचता है और ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर हनुमान जी को पकड़कर उनको रावण की सभा में ले जाता है. जहां रावण की सभा हनुमान जी के पूंछ में आग लगाने का आदेश देती है. पूंछ में हनुमान जी छोटा सा रूप बनाकर लंका में आग फैला देते हैं. विभीषण जी के घर को छोड़कर पूरी सोने की लंका धू-धूकर भस्म हो जाती है. इस घटना के बाद हनुमान जी समुद्र में अपने पूछ की आग बुझा कर सीता जी के पास आ जाते हैं.वहां सीता जी उन्हें पहचान के लिए चूड़ामणि देकर विदा करती हैं.

जब राधा रानी को देख मोहित हो गए श्रीकृष्णकृष्ण लीला के “श्याम सगाई ” प्रसंग में दिखाया गया कि श्री कृष्ण खेलते खेलते नन्दगांव के बाहर चले जाते हैं. वहां एक वृक्ष के नीचे खेल रही राधा रानी को देखकर मोहित हो जाते हैं. वह उनके समीप में जाकर उसका नाम और पता पूछते हैं व दोनों एक दूसरे से परिचय करते हैं. फिर दोनों गेंद खेलते हैं. कुछ समय खेलने के पश्चात् राधा अपने गांव लौटने की इच्छा जताती है तो श्रीकृष्ण उन्हें नंद गांव आने का निमंत्रण देते हैं. कुछ समय पश्चात् राधा रानी सखियों संग नंदगांव खेलने के लिए पहुंचती है. वहां श्रीकृष्ण राधा जी को अपने घर लेकर जाते हैं और माता यशोदा से मिलाते हैं. मैया यशोदा, राधा रानी की दिव्य छवि देखकर मोहित हो जाती है. राधा जी, मैया को अपना परिचय देते हुए बताती है कि मैं राजा वृशभान की पुत्री हूं और मेरी माता का नाम कीरत है. यह सुन मैया प्रसन्न होकर राधा जी का सुंदर शृंगार कर आंचल में गोद भराई की रस्म पूरी कर कन्हैया की सगाई पक्की कर देती है. मौके पर बैकुण्ठ नाथ शर्मा, हरिशंकर गुप्ता, सुरेश संगम, कृष्णा वर्मा, उदय सर्राफ जोखन जी, चिरंजीलाल चौधरी, नारायण राय समेत समिति के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

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