ePaper

buxar news : अर्जुनपुर व उमरपुर पंचायत में गंगा का कटाव नहीं बन सका चुनावी मुद्दा

Updated at : 26 Oct 2025 10:03 PM (IST)
विज्ञापन
buxar news : अर्जुनपुर व उमरपुर पंचायत में गंगा का कटाव नहीं बन सका चुनावी मुद्दा

buxar news : हर साल गंगा के गर्भ में समा जा रही कई एकड़ जमीनपूर्व में जिनके पास थी 10-15 बीघे जमीन, उन्हें आज करनी पड़ रही मजदूरीकटाव के समय केवल फोटो खींचने आते हैं अधिकारी, राहत के लिए नहीं उठाया जाता कदम

विज्ञापन

बक्सर. विधानसभा और लोकसभा चुनाव हर पांच साल पर होते रहता है. देश की आजादी से लेकर अब तक कुल 17 बार बक्सर विधानसभा का चुनाव हो चुका है.

18वां चुनाव होने जा रहा है. मगर आजादी के बाद से लेकर अब तक बक्सर विधानसभा क्षेत्र की अर्जुनपुर और उमरपुर पंचायत की तकरीबन 100 एकड़ कृषि योग्य जमीन गंगा की धारा में समा गयी. इन दोनों पंचायतों के लोग प्रत्येक साल गंगा की बाढ़ की विभीषिका से जूझते हैं. मगर इनकी पीड़ा किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए चुनाव में मुद्दा नहीं बन पाता है. जबकि, इन दोनों पंचायतों के ग्रामीण वर्षों से गंगा नदी के कटाव की समस्या झेल रहे हैं. हर वर्ष बरसात के मौसम में जब गंगा का जल स्तर बढ़ता है, तो कई परिवारों की ज़मीन और मकान गंगा की लहरों में समा जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल दर्जनों घर, कई एकड़ खेत गंगा की गोद में समा जाते हैं. फिर भी इस दिशा में न तो स्थायी बांध का निर्माण हुआ, न ही सरकार ने राहत के लिए कोई ठोस कदम उठाया. गंगा नदी के कटाव ने न सिर्फ लोगों की भूमि छीन ली है, बल्कि उनकी आजीविका भी खत्म कर दी है. कई गांवों में किसानों के पास अब अपने खेत तक नहीं बचे हैं. एक समय जिनके पास 10-15 बीघा उपजाऊ भूमि हुआ करती थी, वे आज मजदूरी कर परिवार चला रहे हैं. ग्रामीण बिटू राम का कहना है कि गंगा ने हमारी छह एकड़ खेत भी निगल लिया और घर भी. कटाव प्रभावित क्षेत्र के रामकुमार यादव, मुकेश कुमार, शंभू राय और सुरेंद्र पांडेय बताते हैं कि सरकार के अधिकारी सर्वे करने तो कई बार आये, लेकिन किसी प्रकार की राहत या मुआवजा आज तक नहीं मिला. जब कटाव होता है, तो अधिकारी फोटो खींचने आते हैं, लेकिन राहत के लिए उचित प्रबंध नहीं किये जाते.

ग्रामीणों का पलायन बना मजबूरी

गंगा के बढ़ते कटाव से परेशान लोग हर साल बरसात के मौसम में गांव छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं. कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर भेज देते हैं. अस्थायी रूप से लोग रिश्तेदारों के घर या शहरों में शरण लेते हैं. कुछ परिवारों ने तो स्थायी रूप से गांव छोड़कर बक्सर शहर या बनारस में बसना शुरू कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही गंगा के कटाव को रोकने के लिए पक्का बांध या तटबंध नहीं बनाया गया, तो आने वाले कुछ वर्षों में कई गांवों का नामो-निशान मिट जायेगा.

दियारा के लिए गंगा का कटाव सबसे बड़ा मुद्दा

हर साल गंगा में किसानों की जमीन विलीन होती जा रही है. मगर इसको लेकर किसी भी राजनीतिक दल के उम्मीदवार काई बात नहीं करते हैं. विभिन्न दलों के प्रत्याशी भी पंचायतों में चुनाव के दौरान दिखते हैं. इसके पहले उनकी कोई गतिविधि नहीं दिखायी देती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SHAILESH KUMAR

लेखक के बारे में

By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन