रावण का अहंकार दहन है लंका का जलना : स्वामी बैकुंठनाथ

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रावण का अहंकार दहन है लंका का जलना : स्वामी बैकुंठनाथ

शहर के सती घाट स्थित लाल बाबा आश्रम परिसर में चल रहे श्रीराम कथा में सोमवार को लंका दहन प्रसंग की कथा सुनायी गयी.

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बक्सर. शहर के सती घाट स्थित लाल बाबा आश्रम परिसर में चल रहे श्रीराम कथा में सोमवार को लंका दहन प्रसंग की कथा सुनायी गयी. पूज्य संत श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र व मधुसूदन धाम वृंदावन के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी बैकुंठ नाथ जी महाराज के श्रीमुख से कथा सुन श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गये. साकेतवासी संत लाल बाबा के निर्वाण तिथि पर आश्रम के महंत श्री सुरेंद्र जी महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीराम कथा के आखिरी दिन स्वामी बैकुंठ नाथ महाराज ने कहा कि मानव के पतन का मूल कारण अहंकार होता है. यह व्यक्ति द्वारा खुद का अर्जित किया हुआ मनोरोग है. रोग का अर्थ है शरीर की प्रक्रिया को विकृत कर देना. जिस तरह मदांध हाथी अपना विवेक खोकर गलत आचरण करने लगता है उसी प्रकार अहंकारी मनुष्य मदांध हो जाता है तो उसका विवेक नष्ट हो जाता है और वह जंगली जानवर से बदतर व्यवहार करने लगता है. रावण भी उसी तरह मदांध होकर अधर्म का रास्ता अपनाकर माता सीता का हरण कर लिया था. हनुमान जी ने सोने की लंका को जलाकर रावण के अहंकार व अधर्म का दहन कर दिया. कथा को विस्तार देते हुए स्वामी जी ने कहा कि हनुमान जी लंका पहुंच कर माता सीता की तलाश कर करते वे अशोक वाटिका पहुंचे. वहां उन्होंने देखा की माता सीता एक पेड़ के नीचे बैठ श्रीराम के वियोग में दुखी हैं. यह देख हनुमान जी खुद को प्रभु श्रीराम का दास बताते हुए माता सीता को अंगूठी दी और कहा कि श्रीराम जल्द आकर आपको मुक्त करायेंगे. फिर मां सीता से आज्ञा लेकर वे वाटिका में पहुंचे और बाग को उजाड़ने लगे. सूचना के बाद उन्हें काबू में करने के लिए रावण ने अपने पुत्र अक्षय कुमार को वहां भेजा. लेकिन उन्होंने अक्षय कुमार का वध कर दिया. फिर मेघनाद पहुंचे और वे हनुमान जी पकड़कर रावण के दरवाबर में ले गए. इसके बाद रावण के आदेश पर उनकी पूंछ में आग लगा दी गई. हनुमान जी की पूंछ में आग लगते ही उन्होंने एक महल से दूसरे महल पर कूदते हुए पूरी लंका में आग लगा दी. मौके पर जदयू के प्रदेश महासचिव आजाद सिंह राठौर, नीरज सिंह, झूना पांडेय, पुना बाबा, रणधीर श्रीवास्तव, दुर्गेश पांडेय, प्रह्लाद जी, मनोज वर्मा, संतोष गुप्ता, बबलू तिवारी, अनिरुद्ध तिवारी, विनोद जायसवाल, संतोष शर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, सिद्धनाथ तिवारी व कमलेश यादव आदि मौजूद थे.

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