बक्सर: ब्रह्मपुर में डिग्री कॉलेज की जमीन पर विवाद, 6 एकड़ सुरक्षित भूमि के प्रस्ताव के बावजूद विवादित जमीन पर चयन से उठे सवाल
ब्रह्मपुर में डिग्री कॉलेज के लिए चिन्हित भूमि पर विवाद गहराया। कानूनी अड़चनों और सरकारी जमीन के विकल्प के बीच कॉलेज निर्माण पर मंडराए संकट के बादल।
Buxar News : स्थानीय क्षेत्र में डिग्री कॉलेज की स्थापना को लेकर जमीन का चयन अब विवादों के घेरे में आ गया है. प्रशासन की ओर से चिन्हित जमीन पर भू-स्वामित्व को लेकर दावेदारों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. वहीं, दूसरी ओर प्रखंड मुख्यालय में बीएन प्लस टू उच्च विद्यालय के पास करीब छह एकड़ सरकारी भूमि उपलब्ध होने का दावा करते हुए वहां कॉलेज निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है. ऐसे में विवादित जमीन पर कॉलेज निर्माण के प्रशासनिक निर्णय को लेकर कानूनी और नीतिगत सवाल उठने लगे हैं.
जमाबंदी रद्द करने के खिलाफ डीएम कोर्ट में मामला
चिन्हित जमीन पर अमरेंद्र मोहन पाठक और धीरेंद्र मोहन पाठक ने अपना दावा जताते हुए जिलाधिकारी की अदालत में वाद दायर किया है. दावेदार धीरेंद्र पाठक के अनुसार पुराने खतियान के अलावा वर्ष 2018-19 तक उनके नाम से और वर्ष 2022-23 तक अमरेंद्र पाठक के नाम से उक्त भूमि का लगान रसीद कटता रहा है. उनका आरोप है कि प्रशासन की ओर से इस वर्ष जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी गयी.
उन्होंने बताया कि जमाबंदी रद्द करने के फैसले के खिलाफ जिलाधिकारी न्यायालय में केस संख्या 14/2026 विचाराधीन है. उनका कहना है कि जब भूमि का मामला न्यायालय में लंबित है, तो उस पर निर्माण कार्य का निर्णय उचित नहीं होगा. इस संबंध में जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी को ज्ञापन देकर विवादित जमीन पर डिग्री कॉलेज निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गयी है.
बीएन प्लस टू स्कूल के पास छह एकड़ जमीन का प्रस्ताव
विवादित भूमि के विकल्प के रूप में बीएन प्लस टू उच्च विद्यालय के पास करीब छह एकड़ परती भूमि उपलब्ध होने का दावा किया गया है. विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक कृष्ण पाल ने स्थानीय अंचलाधिकारी को पत्र भेजकर इस जमीन पर डिग्री कॉलेज स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है. पत्र में कहा गया है कि कॉलेज भवन निर्माण के लिए विद्यालय प्रबंधन की ओर से अनापत्ति और आवश्यक सहमति भी दी जा चुकी है.
मुख्यालय में कॉलेज होने से छात्रों को होगी सुविधा
उच्च विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक और वर्तमान नगर पंचायत के उप मुख्य पार्षद चंद्रभूषण सिंह ने भी विद्यालय के पास पर्याप्त जमीन होने की बात कही है. उन्होंने कहा कि प्रखंड मुख्यालय में डिग्री कॉलेज की स्थापना होने से क्षेत्र की सभी पंचायतों के छात्र-छात्राओं को सुविधा होगी. खासकर छात्राओं के लिए मुख्यालय में कॉलेज होना आवागमन और सुरक्षा के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकता है.
विवादित जमीन पर निर्माण से कानूनी पेंच बढ़ने की आशंका
स्थानीय स्तर पर चिन्हित जमीन को लेकर अन्य दावेदारों की ओर से भी आपत्तियां दर्ज कराये जाने की बात सामने आ रही है. ऐसे में न्यायालय में मामला लंबित रहने के दौरान निर्माण कार्य शुरू होने पर विवाद और बढ़ सकता है. इससे कॉलेज निर्माण की प्रक्रिया लंबे समय तक कानूनी पेंच में फंसने की आशंका भी जतायी जा रही है.
सुरक्षित सरकारी जमीन या विवादित भूमि, प्रशासन के फैसले पर नजर
डिग्री कॉलेज क्षेत्र के युवाओं की लंबे समय से चली आ रही उच्च शिक्षा की जरूरत से जुड़ा मुद्दा है. ऐसे में अब निगाह जिला प्रशासन के अगले कदम पर है. एक ओर न्यायालय में लंबित विवादित भूमि है, तो दूसरी ओर विद्यालय के पास उपलब्ध बतायी जा रही छह एकड़ जमीन का प्रस्ताव. स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन विवाद से बचने के लिए वैकल्पिक सुरक्षित भूमि का चयन करता है या मौजूदा चयनित जमीन पर ही आगे की प्रक्रिया जारी रखता है.
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