बक्सर में झमाझम बारिश से मौसम सुहाना, अगले तीन दिन तापमान को लेकर पूर्वानुमान जारी

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बक्सर में 44.2 मिलीमीटर हुई बारिश, किसानों के चेहरे खिले

Buxar Weather Update : बक्सर में गुरुवार को 44.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन अधिकतम तापमान 35 और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी है.

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Buxar Weather Update : बक्सर में गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वर्षामापी यंत्र से 44.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 9 से 12 जुलाई के बीच जिले में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवकरण ने बताया कि मौजूदा बारिश को देखते हुए किसान दियारा और ऊंचे क्षेत्रों में अरहर, उर्द, मक्का, मडुआ, सावां और तिल जैसी फसलों की बुआई कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह समय इन फसलों की खेती के लिए अनुकूल है.

धान की सीधी बुआई डीएसआर का प्रयोग करने से पानी, समय, ईंधन की बचत कर लागत को कम किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि जुलाई के द्वितीय सप्ताह में धान फसल की 110-125 दिनों वाली प्रभेद-स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण समृद्धि, राजेंद्र श्वेता एवं संकर धान का चयन उपयोगी होगा.

अरहर एवं उर्द की उन्नत खेती के लिए उर्वरक प्रबंधन

अरहर की उन्नत प्रभेद नरेंद्र अरहर-2, बहार, राजेंद्र अरहर-1, राजेंद्र अरहर-2 आदि की बुआई उठी हुई क्यारी-कुड़ विधि द्वारा पौध से पौध की दूरी (60 सेंटीमीटर) एवं कतार से कतार की दूरी (20 सेंटीमीटर) अपनाकर उत्पादन बेहतर प्राप्त कर सकते हैं. अरहर एवं उर्द फसलों के लिए उर्वरक प्रबंधन 20 किलोग्राम नत्रजन, 40 किलोग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश एवं 20 किलोग्राम सल्फर का प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें.

धान फसल क्षेत्र (बक्सर, इटाढ़ी, नवानगर, राजपुर, केसठ, चौगाई व ब्रह्मपुर आदि) के किसान जिन्होंने अभी तक धान की रोपनी नहीं शुरू की है, वे धान प्रभेद- एमटीयू 7029, बीपीटी 5204, संपूर्णा आदि की शीघ्र ही रोपनी का कार्य करें.

मेढ़ प्रबंधन से कम होगी सिंचाई की लागत

रोपनी से पूर्व खेत की मेढ़ की ऊंचाई 75 सेंटीमीटर एवं चौड़ाई 45 सेंटीमीटर रखने से वर्षा जल का बेहतर संचयन कर सिंचाई की लागत को कम किया जा सकता है. साथ ही प्रक्षेत्र क्षेत्र के भूगर्भ का जलस्तर बेहतर होता है. धान रोपे गए खेतों में 3 से 4 इंच तक पानी के स्तर को बनाए रखने से खरपतवार प्रबंधन के साथ-साथ फसल की अच्छी बढ़वार प्राप्त होती है.

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Parshant Kumar Rai

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