बक्सर के छात्रों के लिए बड़ी खबर, अब खातों में नहीं आएगी पोशाक राशि, जीविका दीदियां देंगी यूनिफॉर्म
सांकेतिक तस्वीर
Shiksha Vibhag Buxar News : बक्सर समेत पूरे बिहार में पोशाक योजना में बड़ा बदलाव होने जा रहा है..अब छात्रों के खातों में पैसे भेजने के बजाय सिली हुई यूनिफॉर्म दी जाएगी. जीविका समूहों की महिलाएं ड्रेस तैयार करेंगी, जिससे रोजगार भी बढ़ेगा. नई व्यवस्था 2026-27 सत्र से लागू हो सकती है, शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है.
Shiksha Vibhag Buxar News : (संतोष कांत) बक्सर जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के लिए पोशाक योजना को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. बिहार शिक्षा विभाग अब उस व्यवस्था को खत्म करने की तैयारी में है, जिसके तहत बच्चों के बैंक खातों में पोशाक के लिए पैसे भेजे जाते थे. नई प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार अब बच्चों को सीधे सिली हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी जीविका समूहों की महिलाओं यानी जीविका दीदियों को दी जाएगी. इस फैसले का उद्देश्य सिर्फ व्यवस्था में बदलाव करना नहीं, बल्कि पोशाक योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और एकरूप बनाना है. विभागीय सूत्रों की मानें तो इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जा सकता है.
अब डीबीटी नहीं, सीधे मिलेगी ड्रेस
अभी तक मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना, मुख्यमंत्री बालक पोशाक योजना और बिहार शताब्दी मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के तहत बच्चों के खातों में सीधे पैसे भेजे जाते थे. इस राशि से अभिभावक बच्चों के लिए यूनिफॉर्म खरीदते थे. लेकिन नई व्यवस्था में यह नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. इसके बदले जीविका समूहों द्वारा तैयार की गई दो सेट सिली हुई यूनिफॉर्म बच्चों को दी जाएगी, ताकि सभी छात्रों को एक समान ड्रेस मिल सके.
सभी प्रकार के स्कूल होंगे शामिल
यह योजना केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगी. इसके तहत जिले के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के साथ-साथ मदरसा, संस्कृत विद्यालय और सरकार से अनुदानित एवं प्रस्वीकृत स्कूलों के छात्र-छात्राएं भी शामिल होंगे. हालांकि योजना का लाभ पाने के लिए पहले की तरह ही 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रखी जाएगी. कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को योजना से वंचित किया जा सकता है.
क्यों किया जा रहा यह बदलाव
शिक्षा विभाग का मानना है कि डीबीटी के जरिए पैसे भेजने की व्यवस्था में कई खामियां सामने आ रही थीं. कई मामलों में देखा गया कि पैसे मिलने के बावजूद बच्चों के लिए समय पर यूनिफॉर्म नहीं बन पाती थी. वहीं अलग-अलग रंग और डिजाइन की ड्रेस के कारण स्कूलों में एकरूपता भी नहीं दिखती थी. नई व्यवस्था के जरिए इन समस्याओं को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. अब सभी बच्चों को एक तय डिजाइन और रंग की यूनिफॉर्म मिलेगी, जिससे स्कूलों में समानता का माहौल बनेगा.
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर
इस नई प्रणाली में कपड़े की गुणवत्ता और सिलाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. विभाग द्वारा तय मानकों के अनुसार जीविका समूह ड्रेस तैयार करेंगे, जिससे बच्चों को बेहतर गुणवत्ता की यूनिफॉर्म मिल सकेगी. साथ ही इस प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी. बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और बच्चों को सत्र की शुरुआत में ही समय पर ड्रेस उपलब्ध कराई जा सकेगी.
महिलाओं को मिलेगा रोजगार
इस योजना का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को रोजगार मिलेगा. जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं को बड़े स्तर पर यूनिफॉर्म सिलने का काम दिया जाएगा. इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी. साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
कुल मिलाकर शिक्षा विभाग का यह कदम बक्सर समेत पूरे बिहार में पोशाक योजना की तस्वीर बदल सकता है. अब देखना होगा कि यह नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है. फिलहाल यह बदलाव छात्रों को समय पर और बेहतर गुणवत्ता की यूनिफॉर्म देने के साथ-साथ स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए