‘भोजपुरी में संवैधानिक अधिकार’ पर राष्ट्रीय विचार-संगोष्ठी, भाषा के संरक्षण और आठवीं अनुसूची में शामिल करने पर मंथन

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कार्यक्रम में शामिल अतिथि | Prabhat Khabar Network

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Buxar News : बक्सर के महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में 'भोजपुरी में संवैधानिक अधिकार' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय विचार-संगोष्ठी का आयोजन किया गया. वक्ताओं ने भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने और इसके संरक्षण पर जोर दिया.

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Buxar News : शब्दन फाउंडेशन एवं महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के मानस सभागार में ‘संवाद श्रृंखला’ के अंतर्गत ‘भोजपुरी में संवैधानिक अधिकार’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय विचार-संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा महर्षि महामुनि की प्रतिमा पर पुष्पांजलि, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ.

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संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह, मुख्य वक्ता के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक ओमप्रकाश सिंह, विषय प्रवर्तक के रूप में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. दिवाकर पाण्डेय तथा अध्यक्ष के रूप में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कृष्णा कांत सिंह उपस्थित रहे. मंच का संचालन शब्दन फाउंडेशन के संयोजक शिवेंद्र सिंह राणा ने किया.

भाषा के अस्तित्व के लिए जनांदोलन और विधायी दबाव जरूरी : सांसद सुधाकर सिंह

मुख्य अतिथि सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि आधुनिक विश्व में किसी भी समाज की अस्मिता, ज्ञान-परंपरा और अस्तित्व का सबसे बड़ा आधार उसकी भाषा होती है. उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका के वैश्विक वर्चस्व के पीछे उनकी भाषाई ताकत भी एक महत्वपूर्ण कारण है. भारत में भी सैकड़ों जनजातियां केवल इसलिए विलुप्त हो गयीं, क्योंकि उनकी भाषाओं का संरक्षण नहीं हो सका.

सांसद ने कहा कि संख्या बल और वैश्विक प्रभाव के आधार पर भोजपुरी भारत की समृद्ध भाषाओं में से एक है. यह मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद, फिजी और गुयाना सहित विश्व के 15 से अधिक देशों में बोली जाती है. इसके बावजूद भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जा सका है. उन्होंने इसके पीछे भाषाई समाज के संगठित और आंदोलनात्मक रूप से मुखर नहीं होने को एक कारण बताया.

उन्होंने दक्षिण भारत के भाषा आंदोलनों और पूर्ववर्ती छात्र आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि संसद में दिये गये आश्वासनों को अमलीजामा पहनाने के लिए सड़क पर मजबूत वैधानिक और जनवादी दबाव बनाना होगा.

बक्सर के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्स्थापित करने की बात

सांसद सुधाकर सिंह ने बक्सर की पावन तपोभूमि का स्मरण करते हुए कहा कि यह केवल कर्मभूमि ही नहीं, बल्कि महर्षि विश्वामित्र और भगवान श्रीराम की ज्ञानभूमि भी है. उन्होंने कहा कि वे अपने संसदीय कौशल और बौद्धिक सामर्थ्य से बक्सर के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास करेंगे. साथ ही संसद के पटल पर भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को पुरजोर तरीके से उठाने की बात कही.

सत्ता सेवा का साधन, राजनीतिक संकल्प से ही संभव है अधिकार : ओमप्रकाश सिंह

मुख्य वक्ता विधायक एवं पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि राजनीति कोई व्यवसाय नहीं, बल्कि निस्वार्थ समाज-सेवा और सिद्धांतों का संघर्ष है. उन्होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भिक्षाटन कर काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसी ज्ञान-संस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा को आज भी संवैधानिक स्वत्व नहीं मिलना चिंतनीय है. बक्सर की सांस्कृतिक और ऋषि-परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस माटी में अद्भुत सामर्थ्य है. यदि सत्ता पर काबिज लोग भाषा के सवाल पर दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर एकमत नहीं होंगे, तो यह लड़ाई अधूरी रहेगी.

उन्होंने युवा पीढ़ी और विशेष रूप से छात्राओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे समाज-निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं और अपनी सांस्कृतिक पहचान एवं भाषा के संरक्षण के लिए आगे आएं.

पाणिनीय ‘अष्टाध्यायी’ और सिद्ध साहित्य से प्रमाणित है भोजपुरी की प्राचीनता : प्रो. दिवाकर पाण्डेय

विषय प्रवर्तन करते हुए भाषाविद् प्रो. दिवाकर पाण्डेय ने अकादमिक और ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ भोजपुरी की सुदीर्घ परंपरा को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल के मतानुसार साहित्य की अनुपलब्धता भाषा के अस्तित्व को नकार नहीं सकती.

उन्होंने भोजपुरी के प्राचीन उद्भव का उल्लेख करते हुए कहा कि पाणिनीय ‘अष्टाध्यायी’ में ‘कारूषी’ भाषा का उल्लेख मिलता है, जो पौराणिक ‘करुष देश’ की भाषा रही है. उन्होंने बताया कि करुष देश गंगा, सोन, कर्मनाशा और कैमूर की पहाड़ियों से घिरे क्षेत्र को माना जाता है.

प्रो. पाण्डेय ने जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन के भाषा सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि भोजपुरी वाचिक और लोक परंपरा की दृष्टि से समृद्ध भाषाओं में से एक है. सिद्ध-नाथ परंपरा, गोरखनाथ, भर्तृहरि और गोपीचंद से लेकर संत कबीर तक भोजपुरी की साहित्यिक निरंतरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने भाषा की ऐतिहासिक परंपरा को रेखांकित किया.

उन्होंने आरटीआई से प्राप्त तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि जब संविधान में किसी भाषा को शामिल करने के लिए कोई स्पष्ट पैमाना निर्धारित नहीं है और कम जनसंख्या वाली भाषाएं भी आठवीं अनुसूची में शामिल हो सकती हैं, तो वैश्विक स्तर पर बड़ी आबादी द्वारा बोली जाने वाली भोजपुरी को इससे वंचित रखना उचित नहीं है.

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मातृभाषा के प्रति संकोच छोड़ें, ज्ञान-सृजन से बनेगी वैश्विक पहचान : प्राचार्य

अध्यक्षीय संबोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कृष्णा कांत सिंह ने भोजपुरी में संवाद स्थापित करते हुए कहा कि जिस माटी से हम जन्म लेते हैं, उसके प्रति हमारा गहरा दायित्व होता है. उन्होंने आम जनजीवन में भोजपुरी बोलने में होने वाली हिचक और संकोच की प्रवृत्ति पर चिंता जतायी.

उन्होंने कहा कि गैर-हिंदी भाषियों ने भी हिंदी और जनभाषाओं के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. अंग्रेजों के औपनिवेशिक विस्तार के ‘3T’ सिद्धांत - टेक्स्टबुक (Textbook), ट्रेड (Trade) और थेफ्ट (Theft) का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक किसी भाषा का अनुवाद, पाठ्य-पुस्तकों और उच्च अकादमिक अनुसंधानों में प्रयोग नहीं होगा, तब तक उसका पूर्ण विकास संभव नहीं है.

प्रो. सिंह ने कहा कि भोजपुरी को केवल भिखारी ठाकुर की प्रस्तुतियों और उत्सवों तक सीमित न रखकर गंभीर ज्ञान-भाषा के रूप में विकसित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बक्सर की धरती से शुरू हुआ यह वैचारिक आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.

47 छात्र-छात्राओं को मेडल और प्रशस्ति-पत्र से किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कुल 47 छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथि सांसद सुधाकर सिंह एवं मंचासीन अतिथियों द्वारा मेडल और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.

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विभिन्न विभागों के विजेता छात्र-छात्राओं की सूची

  • इतिहास: अनु कुमारी (प्रथम), रक्षा कुमारी (द्वितीय), खुशबू कुमारी (द्वितीय), संजना कुमारी (तृतीय), अमृता कुमारी (तृतीय)
  • अर्थशास्त्र: श्रेया सिंह (प्रथम), ईशू कुमारी (द्वितीय), काजल कुमारी (तृतीय)
  • राजनीति विज्ञान: संध्या कुमारी (प्रथम), श्रेया सिंह (द्वितीय), तान्या सिंह (तृतीय)
  • मनोविज्ञान: अनुष्का कुमारी (प्रथम), भारती कुमारी (द्वितीय), कुमारी आरती (तृतीय)
  • अंग्रेजी: अंजलि कुमारी (प्रथम), अंजलि दुबे (द्वितीय), अक्षिता श्रीवास्तव (द्वितीय), रिया कुमारी (तृतीय)
  • वनस्पति विज्ञान: सानिया हुसैन (प्रथम), श्रेया कुमारी (द्वितीय), दीक्षा (तृतीय)
  • रसायन विज्ञान: सृष्टि कुमारी (प्रथम), प्रेम सागर (द्वितीय), शिवराज सिंह (द्वितीय), अंजलि कुमारी (तृतीय), मनीषा कुमारी (तृतीय)
  • जंतु विज्ञान: समरीन (प्रथम), चंदन कुमार (द्वितीय), पायल कुमारी (द्वितीय), प्रिया सिंह (तृतीय), रानी कुमारी (तृतीय)
  • भौतिकी: आदित्य कुमार वर्मा (प्रथम), विमलेश कुमार (द्वितीय), रिंकी कुमारी (तृतीय)
  • दर्शनशास्त्र: प्रियंशु शुभम (प्रथम), आशा कुमारी भारती (द्वितीय), जैसमीन खातून (तृतीय)
  • संस्कृत: आशा कुमारी भारती (प्रथम), तारा कुमारी (द्वितीय), सलोनी कुमारी (तृतीय), प्रिया कुमारी (तृतीय)
  • हिंदी: सोनम कुमारी (प्रथम), तनीषा कुमारी (द्वितीय), खुशी कुमारी (तृतीय)
  • गणित: शुभम कुमार (प्रथम), सृष्टि राज (द्वितीय), शिवमुन्नी कुमार (तृतीय)

धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ संगोष्ठी का समापन

समारोह के अंत में महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने मंचासीन अतिथियों, वक्ताओं, महाविद्यालय परिवार, मीडिया कर्मियों एवं सभागार में उपस्थित श्रोताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया. संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के सामूहिक गान के साथ हुआ. इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

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