बक्सर : तालाब सौंदर्यीकरण योजना में गड़बड़ी का आरोप, ग्रामीणों ने DM से की जांच की मांग

Author Kamal pankaj|Edited by Kumarsuryakant
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दुल्फा गांव में तालाब सौंदर्यीकरण में भारी गड़बड़ी, ग्रामीणों ने काम रुकवाकर जताया विरोध

फोटो :- विरोध जताते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network

Buxar News : राजपुर के दुल्फा गांव में तालाब सौंदर्यीकरण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल पर ग्रामीणों ने काम रुकवाकर जिलाधिकारी से जांच की मांग की है.

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Buxar News : बक्सर के राजपुर प्रखंड के दुल्फा गांव में तालाब सौंदर्यीकरण और घाट निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और गड़बड़ी का मामला सामने आया है. घटिया निर्माण सामग्री का आरोप लगाते हुए स्थानीय ग्रामीणों और युवा समाजसेवियों ने कार्यस्थल पर पहुंचकर न सिर्फ विरोध जताया, बल्कि काम को तत्काल प्रभाव से बंद भी करा दिया. ग्रामीणों में इस गड़बड़ी को लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने मामले की जांच जिलाधिकारी से की है.

प्रमुख की योजना से हो रहा निर्माण

मिसली जानकारी के अनुसार, दुल्फा गांव स्थित मध्य विद्यालय के समीप कामाख्या मंदिर के पास एक पोखरे में घाट निर्माण का कार्य चल रहा है. बताया जा रहा है कि यह कार्य बीडीसी सह प्रखंड प्रमुख मंजू देवी के द्वारा किसी योजना मद से कराया जा रहा है. जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब युवा समाजसेवी चंदन कुशवाहा और भारी संख्या में ग्रामीण वहां पहुंचे.

घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यस्थल पर गिराई गई ईंटों की क्वालिटी बेहद खराब है और वे छूते ही मिट्टी की तरह टूट रही हैं. इसके साथ ही मसाले में इस्तेमाल होने वाला सीमेंट और बालू भी मानक के अनुरूप नहीं है. ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि इस योजना में खुलेआम सरकारी राशि की लूट मचाई जा रही है. कार्यस्थल पर न तो कोई प्राक्कलित राशि या योजना का बोर्ड लगाया गया है और न ही नियमों का पालन हो रहा है.

मनरेगा पीओ के बयान से गहराया शक

जब इस संबंध में मनरेगा पीओ से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्य मनरेगा मद से नहीं कराया जा रहा है. इसके बाद ग्रामीणों का शक और गहरा गया और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. योजना में पारदर्शिता की कमी और मनरेगा पीओ के बयान के बाद ग्रामीण और उग्र हो गए.

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जिलाधिकारी से कराई जाए. यदि कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे.

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