बक्सर में आप प्रवक्ता ने देशभर के आंदोलनों पर जताई चिंता, सरकार से संवाद कर समाधान निकालने की अपील

Author Manish mishra|Edited by Ragini Sharma
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आंदोलनों पर आम आदमी पार्टी ने जताई चिंता, संवाद से समाधान की अपील

आम आदमी पार्टी (आप) के बक्सर जिला प्रवक्ता शुभम उपाध्याय ने देश भर में विभिन्न मुद्दों पर चल रहे आंदोलनों पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि सरकार को इन जन आंदोलनों के प्रति संवेदनशील होकर संवाद स्थापित करना चाहिए और समस्याओं का समयबद्ध समाधान खोजना चाहिए.

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Buxar Sonam Wangchuk Protest : बक्सर में आम आदमी पार्टी (आप) के बक्सर जिला प्रवक्ता शुभम उपाध्याय ने देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आंदोलनों को लेकर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर लोग लंबे समय से आंदोलन और भूख हड़ताल करने को मजबूर हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है.

उन्होंने कहा कि एक ओर सोनम वांगचुक नई दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है तथा केंद्र सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की है.

Buxar News : केन-बेतवा परियोजना को लेकर भी आंदोलन

आप प्रवक्ता ने बताया कि दूसरी ओर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी और ग्रामीण परिवार भूमि अधिग्रहण, उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.

इस आंदोलन के दौरान महिलाओं द्वारा किया गया प्रतीकात्मक “चिता आंदोलन” देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें अब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला है.

AAP Party : सरकार से संवाद की मांग

शुभम उपाध्याय ने कहा कि भले ही दोनों आंदोलनों की पृष्ठभूमि अलग-अलग है, लेकिन इनसे एक समान संदेश निकलता है कि जब नागरिक अपनी मांगों के समाधान के लिए लंबे समय तक आंदोलन और भूख हड़ताल करने को विवश हों, तो सरकार को संवेदनशीलता के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए.

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्र, किसान, आदिवासी, युवा और आम नागरिक सहित समाज के विभिन्न वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं. सरकार को जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए.

देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे आंदोलनों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी संवाद कितना जरूरी है. अब देखना होगा कि सरकार इन मुद्दों पर किस तरह से पहल करती है.

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