अब गूगल मैप से होगी पीएम आवास योजना की मॉनीटरिंग

Updated at : 25 Feb 2017 8:25 AM (IST)
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अब गूगल मैप से होगी पीएम आवास योजना की मॉनीटरिंग

जियो टैगिंग से दिल्ली व पटना के अफसर देखेंगे योजना की हकीकत बक्सर : प्रधानमंत्री आवास योजना को सही तरीके से अमल में लाने के लिए स्थलीय निरीक्षण के साथ-साथ ‘जियो टैगिंग’ (एक प्रकार के ऐप) का भी सहारा लिया जा रहा है. इंदिरा आवास योजना की तरह पीएम आवास योजना में फर्जीवाड़ा न हो […]

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जियो टैगिंग से दिल्ली व पटना के अफसर देखेंगे योजना की हकीकत
बक्सर : प्रधानमंत्री आवास योजना को सही तरीके से अमल में लाने के लिए स्थलीय निरीक्षण के साथ-साथ ‘जियो टैगिंग’ (एक प्रकार के ऐप) का भी सहारा लिया जा रहा है. इंदिरा आवास योजना की तरह पीएम आवास योजना में फर्जीवाड़ा न हो इसके लिए मोबाइल ऐप लांच किया गया है. इस एेप में लाभुकों की पूरी जानकारी दी जायेगी. साथ ही वर्तमान भवन व नये भवन के फोटो को एेप में जियो टैग के साथ अपलोड करना होगा. इससे गूगल मैप पर जाकर पहले व वर्तमान आवास की स्थिति के बारे में जानकारी ली जा सकेगी.
केंद्र सरकार ने कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए आवास एेप को लांच किया है, ताकि मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों और आवास योजना की जानकारी जीपीएस के माध्यम से दिल्ली व पटना में बैठे पदाधिकारी भी जान पाएं. बता दें कि इसके तहत दो साइट की फोटोग्राफी की जायेगी. पहला जहां पहले से आवास बना है और दूसरा उस जगह की फोटोग्राफी होगी, जहां आवास योजना के तहत कार्य होंगे. इन फोटो को आवास एेप के जरिए अपलोड किया जायेगा.
यह सुविधा आवास सहायकों को ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनों माध्यम से उपलब्ध करायी जायेगी. आवास का फोटोग्राफ अपलोड करने के बाद ही आवास योजना की स्वीकृति जिला से मिलेगी.
बिना आवास बनवाये लाभुक ले लेते थे राशि : अफसरों की मिलीभगत के चलते इंदिरा आवास योजना के लाभुक बिना आवास बनाये ही तीन किस्तों में राशि ले लेते थे. इस तरह के जिले में सैकड़ों प्रकरण सामने आ चुके हैं. यह सब अफसरों द्वारा गड़बड़ी कर किया जाता था.
इसके बाद लाभुकों से मुखिया, पंचायत सचिव से लेकर अन्य अफसर कमीशन लेते थे. इस पर रोक लगाने के लिए नयी योजना के साथ नयी व्यवस्था लागू की गयी है, ताकि आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को इसका लाभ मिल सके. साथ ही उनके आवास पक्के बन सके. पीएम आवास बनवानेवाले लाभुकों को शौचालय बनवाने के लिए 12 हजार व 18 हजार रुपये आवास की मजदूरी मिलेगी.
कैसे काम करता है जियो टैगिंग
नेशनल रिमोट सेसिंग सेंटर द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की निगरानी के लिए मोबाइल एेप लांच किया गया है. जब व्यक्तिगत आवास का निर्माण शुरू होगा, तो उस समय स्थानीय निकाय के सर्वेयर को मौके पर जाकर उस घर का फोटो लेकर मोबाइल एेप पर टैग करना होगा. इस प्रक्रिया को जिओ-टैगिंग कहा जा रहा है. इसके बाद समय-समय पर निर्माण के अलग-अलग चरणों में फोटोग्राफ लेकर मोबाइल एप पर टैग किया जायेगा.
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