अतिक्रमण की चपेट में गांव के आहर पोखर

कृष्णाब्रह्म : एक समय था जब गांव की पहचान तालाब और पोखरों से होती थी. तालाब में पानी लबालब भरा होता था और सालों भर लोग इसका उपयोग करते थे.अब सब कुछ इसका उलटा होते जा रहा है. तालाब और पोखरा का नाम जिंदा है, लेकिन उसमें पानी है. उसके आधे से अधिक हिस्से अतिक्रमण […]
कृष्णाब्रह्म : एक समय था जब गांव की पहचान तालाब और पोखरों से होती थी. तालाब में पानी लबालब भरा होता था और सालों भर लोग इसका उपयोग करते थे.अब सब कुछ इसका उलटा होते जा रहा है. तालाब और पोखरा का नाम जिंदा है, लेकिन उसमें पानी है. उसके आधे से अधिक हिस्से अतिक्रमण के शिकार हो गये हैं. उसपर निजी भवन बन गये और कुछ में तो खेती भी शुरू कर दी गयी. जल संचय नहीं होने के कारण लोग पानी के लिए गरमी में बूंद-बूंद के लिए तरसते नजर आते हैं. बड़े-बड़े तालाबों की हालत खराब है. जिसमें कभी मछलियां पाली जाती थीं, लेकिन इसका अस्तित्व अब मिट चुका है.
सोवा, छतनवार, अरिआव, कठार, नुआव, बेलहरी, धरौली आदी गांव के पोखरा, तालाब, जलाशय पूरी तरह विलुप्त हैं. पोखरा-तालाब का अस्तित्व समाप्त होने की वजह से नयी पीढ़ी भुलती जा रही है. छतनवार गांव के शशिकांत सिंह उर्फ ढुनमुन सिंह ने अनुमंडलीय पदाधिकारी के पास गांव के पोखरे-तलाब को अतिक्रमण से मुक्त करने कि गुहार लगाये हैं, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी इस पर कार्रवाई नहीं की गयी है. इस बाबत अंचलाधिकारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि पोखर व तलाबों का संरक्षण मत्सय विभाग को करना है. तालाब-पोखरा कि शिकायत मिल रही है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




