वाहनों में ठूंसे जा रहे मासूम

Updated at : 25 Dec 2016 12:41 AM (IST)
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वाहनों में ठूंसे जा रहे मासूम

अनदेखी. स्कूल वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं बक्सर : निजी स्कूली वाहनों में भेड़-बकरियों की तरह बच्चों को ढोया जा रहा है. स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए प्रयोग में लाये जा रहे अधिकांशत: वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रख रहे हैं. नियम कानून को ताक पर रखकर बच्चों […]

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अनदेखी. स्कूल वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं

बक्सर : निजी स्कूली वाहनों में भेड़-बकरियों की तरह बच्चों को ढोया जा रहा है. स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए प्रयोग में लाये जा रहे अधिकांशत: वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रख रहे हैं. नियम कानून को ताक पर रखकर बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. निर्धारित सीट से दोगुना बच्चों को बैठाया जा रहा है. आलम यह है कि सीट के बाद बच्चे खड़े-खड़े वाहनों में सफर करते हैं. उक्त कार्यों के लिए
छोटे-छोटे टाटा-मैजिक सवारी और ऑटो को भी लगाया गया है, जिसमें किसी प्रकार की सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा जाता है. जिले में हो रहे हादसे के बाद भी न तो विद्यालय प्रबंधन ही कोई कारगर कदम उठा रहा है और न तो जिला प्रशासन द्वारा ही कोई कड़ी कार्रवाई की जा रही है. कई विद्यालयों के वाहनचालकों के पास तो ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है.
ऐसे में सोच सकते हैं कि बच्चों की जिंदगी कितनी सुरक्षित है.
प्रशासन की अनदेखी से नियमों की उड़ रही धज्जियां : जिले में छोटे-बड़े 100 से ज्यादा निजी विद्यालय हैं. इनमें से अधिकांश के पास अपनी गाड़ी नहीं है. भाड़े की गाड़ी लेकर बच्चों को घर से ले जाने और विद्यालय से घर लाने का कार्य किया जाता है. इन वाहनों की स्थिति काफी जर्जर है. एक मैजिक वाहन से बच्चों को ढोया जा रहा था, उसमें गेट तक नहीं था. जिला प्रशासन भी पूरी तरह से मौन है. परिवहन विभाग द्वारा भी वाहनों की जांच कम ही की जाती है.
ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब : ग्रामीण इलाकों के निजी स्कूलों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ायी जा रही है. स्कूलों में किसी भी निर्देश का पालन नहीं हो रहा है. गांव की खराब सड़कों पर हिचकोले खाते वाहनों में बच्चे जैसे-तैसे स्कूल आना-जाना कर रहे हैं. बच्चों को ऑटो, सवारी गाड़ी में बिठाने और उतारनेवाला भी कोई नहीं होता है. यहां के स्कूलों की सुरक्षा पर किसी का ध्यान नहीं है.
निर्धारित रंग एवं सुरक्षा मानकों का नहीं रखा जाता है ख्याल : स्कूली बच्चों के लिए आवागमन में लगे वाहनों का रंग पीला होना चाहिए. उक्त वाहन के खिड़की एवं दरवाजों में लोहे की जाली लगी होनी चाहिए. वाहन में बच्चों को उतारने एवं चढ़ाने के लिए हेल्पर होने चाहिए.
हादसे के बाद भी नहीं चेत रहे विद्यालय संचालक
स्कूल बस में खड़े बच्चे.
जल्द ही होगी कार्रवाई
लगातार सूचना मिल रही है कि स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखकर वाहन चलाये जा रहे हैं. वाहनों का परमिट भी खत्म हो गया है, फिर भी उन्हें विद्यालय ने बेरोकटोक चलाया जा रहा है. जल्द ही इन पर कार्रवाई की जायेगी. इसको लेकर जिला परिवहन विभाग ठोस कदम उठायेगा.
दिवाकर झा,जिला परिवहन पदाधिकारी
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