नप व ब्लॉक के बीच फंसा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र

Published at :09 Sep 2016 4:39 AM (IST)
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नप व ब्लॉक के बीच फंसा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र

बक्सर : नगर पर्षद क्षेत्र के लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में इन दिनों काफी परेशानी हो रही है. आवेदक प्रमाणपत्र पाने के लिए आवेदन जमा कर रहे हैं, पर उन्हें कितने दिनों में यह मिलेगा, यह कहना मुश्किल है. हर दिन सैकड़ों लोग प्रमाणपत्र को पाने के लिए आ रहे हैं, पर उन्हें निराशा […]

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बक्सर : नगर पर्षद क्षेत्र के लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में इन दिनों काफी परेशानी हो रही है. आवेदक प्रमाणपत्र पाने के लिए आवेदन जमा कर रहे हैं, पर उन्हें कितने दिनों में यह मिलेगा, यह कहना मुश्किल है. हर दिन सैकड़ों लोग प्रमाणपत्र को पाने के लिए आ रहे हैं, पर उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है. ऐसे में लोगों को कई जरूरी कार्य समय से नहीं हो पा रहे हैं. प्रमाणपत्र बनाने के लिए लोग नगर पर्षद से प्रखंड कार्यालय तक का चक्कर लगा रहे हैं. लोगों की मानें, तो नगर पर्षद के कर्मचारी प्रमाणपत्र के लिए प्रखंड जाने को कहते हैं. वहीं, प्रखंड के कर्मचारी उन्हें नगर पर्षद भेजते हैं. ऐसे में नगर पर्षद और ब्लॉक के बीच लोग फंसे हुए हैं.

शपथ पत्र का बढ़ा झंझट : मृत्यु के 21 दिनों के अंदर आवेदन देने पर पूर्व में किसी भी तरह का शपथ प्रमाणपत्र नहीं लगता था, पर अब विभाग ने इस पर भी शपथ पत्र दायर करा रहा है. ऐसे में लाभुकों को काफी परेशानी हो रही है. लोग बताते हैं कि अपने वार्ड के पार्षदों से यदि सत्यापित करा कर आवेदन दिया जा रहा है, तब भी विभाग सत्यता को नहीं मान रहा है. ऐसे में 21 दिनों के अंदर आवेदन देने पर भी शपथ पत्र देना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक और मानसिक परेशानी हो रही है.
कहां है पेच : नगर पर्षद के अनुसार जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र की जांच का जिम्मा प्रखंड कार्यालय को होता है. यह प्रखंड विकास पदाधिकारी के स्तर पर जांच होती है, पर ऐसा नहीं हो रहा है. वहीं, प्रखंड कार्यालय के अनुसार जांच की जिम्मेदारी नगर पर्षद को है, लेकिन नगर पर्षद ऐसा नहीं कर रहा है. मामला इसी में फंस रहा है. हालांकि जैसे-तैसे जांच कर जन्म-मृत्युप्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है.
कहते हैं नप पदाधिकारी
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र को निर्गत किया जा रहा है, लेकिन जांच का जिम्मा प्रखंड विकास पदाधिकारी के स्तर पर होनी चाहिए. जांच नगर पर्षद करेगा, यह कहीं लिखित नहीं मिला है. सांख्यिकी विभाग को पत्र लिख कर यह समझने का प्रयास किया गया कि आखिर कौन जांच करेगा, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी कुछ मार्ग दर्शन नहीं दिया गया.
अनिल कुमार, नप के कार्यपालक पदाधिकारी
नगर पर्षद क्षेत्र में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र निर्गत करने का अधिकार नगर पर्षद को है. जांच भी नगर पर्षद ही करेगा. विभाग के पदाधिकारी को मैंने बताया था, फिर भी यदि ऐसी बातें हो रही है, तो यह दुखद है.
राधेश्याम दिवाकर, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी
केस स्टडी
केस वन >> ठठेरी बाजार के समाजसेवी प्रह्लाद वर्मा ने बताया कि उनके पिता रामेश्वर प्रसाद वर्मा की मृत्यु पिछले माह हुई थी. मृत्यु के अगले दिन ही उन्होंने प्रमाणपत्र के लिए आवेदन दिया था, लेकिन अब तक उन्हें नहीं मिल पाया.
केस टू >> मल्लाह टोली के रविकांत चौधरी जन्म प्रमाणपत्र के लिए ढाई माह से परेशान हैं. अपने भांजे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए नगर पर्षद में आवेदन जमा किये हैं, पर अब तक नहीं मिल पाया है. जन्म प्रमाणपत्र को मेडिकल कॉलेज में देना है.
केस थ्री >> रामरेखा के राहुल कुमार को अपनी बहन का जन्म प्रमाणपत्र बनवाना है. इसके लिए वे नप में आवेदन दिये हैं. करीब दो माह से राहुल दौड़ लगा रहे हैं. बैंक में कन्या सुरक्षा योजना के तह खाता खुलवाने के लिए देना है. फिर भी नहीं बन पाया.
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