18 की जगह मिल रही मात्र 10 मेगावाट बिजली
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Jun 2016 4:34 AM (IST)
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परेशानी . बिजली कटौती व लो-वोल्टेज रुला रही लोगों को लो-वोल्टेज से व्यवसाय भी हो रहा कुप्रभावित बक्सर : शहर में बिजली की स्थिति खराब है. बिजली कब रहेगी और कब जायेगी. इसकी कोई गारंटी नहीं है. इससे हर कोई परेशान है. यह परेशानी रात्रि में और बढ़ जाती है. ऊमस भरी गरमी में बिजली […]
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परेशानी . बिजली कटौती व लो-वोल्टेज रुला रही लोगों को
लो-वोल्टेज से व्यवसाय भी हो रहा कुप्रभावित
बक्सर : शहर में बिजली की स्थिति खराब है. बिजली कब रहेगी और कब जायेगी. इसकी कोई गारंटी नहीं है. इससे हर कोई परेशान है. यह परेशानी रात्रि में और बढ़ जाती है. ऊमस भरी गरमी में बिजली कटने से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बूढ़ों को होती है.
हालांकि बिजली हर बार डेढ़ से दो घंटे के लिए कट रही है, लेकिन इन दो घंटों में ही लोग परेशान हो जा रहे हैं. पिक आवर में बिजली कटने से बाजार काफी प्रभावित होता है, तो वहीं व्यावसायिक वर्गों को बार-बार बिजली कटने से आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है. जब कभी बिजली रहती भी है तो लो वोल्टेज के कारण कोई भी काम नहीं हो पाता है.
हाथ पंखा बना सहारा : शहर में एक तरफ जहां बिजली कटौती से लोग परेशान हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ लो वोल्टेज से परेशानी है. बिजली यदि है भी तो इससे लोगों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है. इलेक्ट्रिक फैन पूरी तरह बंद हो जा रहे हैं. लोगों को हाथ पंखा से सहारा लेना पड़ रहा है. गनीमत यह है कि घरों में लगने वाले एलइडी बल्ब से रोशनी मिल जाती है. यदि पुराने बल्बों का सहारा लिया जाता है तो लो वोल्टेज के कारण घरों में अंधेरा ही छा जाता. लो वोल्टेज की समस्या से शहर के कई मुहल्ले जूझ रहे हैं. यह समस्या रात में और बढ़ जाती है.
बिजली गुल रहने की यह है मुख्य वजह
शहर में अबाध रूप से बिजली आपूर्ति के लिए 18 मेगावाट बिजली की जरूरत है. परंतु, स्थानीय ग्रीड को मात्र 10 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है. ऐसे में आठ मेगावाट बिजली की कटौती होने से बिजली की व्यवस्था चरमरायी हुई है. विभागीय सूत्रों के अनुसार यह स्थिति विगत कई महीनों से है. आठ मेगावाट की कटौती को पूरा करने के लिए शहर के सभी छह फीडरों में बारी-बारी बिजली दी जाती है. ऐसे में किसी एक फीडर मे ंबिजली की कटौती करना विवशता बन जाती है.
बार-बार बिजली की कटौती से परेशानी होती है. घर का काम बाधित होता है. लो वोल्टेज होने के कारण कोई भी काम नहीं हो पाता है. विद्युत पर संचालित होने वाला सारा काम ठप हो जाता है.
किरण देवी, गृहिणी
सबसे ज्यादा छात्रों को दिक्कत होती है. एक तो बिजली नहीं रहती. वहीं, जब रहती भी है तो काफी कम वोल्टेज. जिससे कोई भी छात्र पढ़ाई नहीं कर पाता है.
अंकित सिंह राठौर, छात्र
बिजली की कटौती और लो वोल्टेज से व्यवसाय काफी प्रभावित हो रहा है. बिजली नहीं रहने के कारण जेनरेटर चलना पड़ता है.
मो कैप्टन
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