मूर्तियों की सुरक्षा में लगे युवकों को विभाग ने नकारा

Published at :26 Jun 2016 4:05 AM (IST)
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मूर्तियों की सुरक्षा में लगे युवकों को विभाग ने नकारा

बक्सर : चौसा युद्ध स्थल पर जो मूर्तियां निकाली गयी हैं, वह काफी असुरक्षित हैं. यहां मूर्तियों को दो छोटा तंबू में रखा गया है. एक तो आंधी-पानी में क्षतिग्रस्त होकर जमीन पर सो गया है, जबकि दूसरा कई जगहों से फटा है. इनकी सुरक्षा में यहां तीन युवक हैं. लेकिन, आश्चर्य तो यह है […]

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बक्सर : चौसा युद्ध स्थल पर जो मूर्तियां निकाली गयी हैं, वह काफी असुरक्षित हैं. यहां मूर्तियों को दो छोटा तंबू में रखा गया है. एक तो आंधी-पानी में क्षतिग्रस्त होकर जमीन पर सो गया है, जबकि दूसरा कई जगहों से फटा है. इनकी सुरक्षा में यहां तीन युवक हैं. लेकिन, आश्चर्य तो यह है कि जो इनकी सुरक्षा में दिन-रात लगे हैं,

उन्हें विभाग अपना कर्मी नहीं मानता. तीनों युवकों के अनुसार, वर्ष 2011 में पहली खुदाई के दौरान पुरातत्व विभाग के किसी पदाधिकारी ने इन्हें निजी तौर पर रखा था. सोनू गोंड, दया सिंह और लव कुमार तब से दिन-रात अपनी ड्यूटी दे रहे हैं. जब कभी कोई अधिकारी चौसा आते हैं, तो वे इनसे ही मिलते हैं. टेंट में रखी मूर्तियों को जब कोई ताक-झांक करता है, तो ये उन्हें डांटते भी हैं, ताकि मूर्तियों को कोई क्षति न पहुंच सके. युवक दया सिंह कहता है

कि इन पांच सालों में केवल दो बार 45-45 सौ रुपये मानदेय के रूप में मिला था, पर अब बंद है. यदि कुछ पैसा मिलता, तो हम अपने पैसे से मूर्तियों की सुरक्षा का कोई उपाय करते. सोनू गोंड कहता है कि गरमी में तो रात में ड्यूटी यहां हम दे देते हैं. परंतु, बरसात और जाड़े में रात्रि में कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी
इन युवकों को कौन रखा है, इसकी जानकारी विभाग को नहीं है. यह जानकारी नहीं है कि ये कब से और किसके कहने पर यहां ड्यूटी दे रहे हैं. शीघ्र ही मूर्तियां बक्सर संग्रहालय में रखी जायेंगी.
डॉ अतुल कुमार वर्मा, निदेशक, पुरातत्व विभाग
चौसा गढ़ से खुदाई के दौरान निकाली गयीं मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए संग्रहालय को सौंपा नहीं गया है. जब इसे संग्रहालय में रखने की अनुमति दी जायेगी, तभी इसे रखा जायेगा. अब तक ऐसा आदेश नहीं आया है.
अरविंद महाजन, क्षेत्रीय उपसचिव, संग्रहालय निदेशालय, पटना
क्या कहते हैं प्रतिनिधि
सरकार अगर उक्त ऐतिहासिक युद्ध स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे, तो यहां सैलानियों के आने से रोजगार का बेहतर अवसर मिलेगा.
आशा देवी, मुखिया, चौसा पंचायत
शेरशाह की विजय स्थली को विकसित करने के लिए पंचायत स्तर एवं जिला स्तर पर खाका तैयार करना चाहिए, ताकि लोग चौसा के इतिहास की जानकारी लेने आयें, तो मायूस न लौटें.
जायसा देवी, मुखिया, बनारपुर पंचायत
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