जहां देखी खाली जगह, वहीं गिरा दिया कचरा

कुव्यवस्था. कचरा प्रबंधन के लिए बक्सर नगर पर्षद के पास नहीं है कोई कार्य योजना बक्सर में कचरा प्रबंधन के लिए नगर पर्षद के पास कोई कार्य योजना नहीं है. खाली जगह देख कर नगर पर्षद उठाये गये कचरे का निस्तारण कर अपना इतिश्री कर लेता है. कार्य योजना नहीं होने से बक्सर कैसे स्वच्छ […]
कुव्यवस्था. कचरा प्रबंधन के लिए बक्सर नगर पर्षद के पास नहीं है कोई कार्य योजना
बक्सर में कचरा प्रबंधन के लिए नगर पर्षद के पास कोई कार्य योजना नहीं है. खाली जगह देख कर नगर पर्षद उठाये गये कचरे का निस्तारण कर अपना इतिश्री कर लेता है. कार्य योजना नहीं होने से बक्सर कैसे स्वच्छ और सुंदर दिखेगा. कचरा का निस्तारण घनी आबादी के बीच ही कर दी जाती है, जिससे संक्रमण की बीमारी फैलने की संभावना है.
बक्सर : बक्सर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के सपनों पर ग्रहण लग गया है. क्योंकि जिसके पास इसकी जिम्मेदारी है, उसने कोई कचरा प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार नहीं किया है. कचरा प्रबंधन के लिए योजना तैयार नहीं होने के कारण किसी तरह कचरा का निबटारा कर दिया जाता है.
चाहे उससे बहुत बड़ी आबादी परेशान ही क्यों न हो. कचरा प्रबंधन के लिए नगर पर्षद जिम्मेवार है, जो अपनी जिम्मेवारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ ले रहा है. उसका कहना है कि किसी तरह हम लोग कचरा का उठाव करवा दे रहे हैं. सफाई कर्मियों की भी भारी कमी है.
कचरा प्रबंधन के लिए कोई कार्य योजना अब तक नहीं हुई तैयार
बक्सर नगर पर्षद के पास कचरा प्रबंधन के लिए कोई कार्य योजना नहीं है. पहले कचरा उठाने का जिम्मा एक एनजीओ को दिया गया था, जो डोर-टू-डोर जाकर कचरा का उठाव करता था. शर्त खत्म होने के बाद से महज 40 सफाई कर्मी ही नगर पर्षद के पास बच गये हैं, जो जैसे-तैसे काम कर रहे हैं.
शहर की आबादी तीन लाख, सफाई कर्मी महज 40 : बक्सर शहर की कुल आबादी लगभग तीन लाख के आसपास हो गयी है. लेकिन, सफाई कर्मी प्रतिदिन घटते ही जा रहे हैं. शहर में जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है. कभी-कभी तो स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि कचरा सड़कों पर भी बिखर जाता है, जिससे आने-जानेवाले राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लोग नाकों पर रूमाल रख कर किसी तरह आते-जाते हैं. साढ़े सात हजार की आबादी पर एक सफाई कर्मी है.
आइए मिल कर बक्सर को बनाएं स्वच्छ और सुंदर : बक्सर को सुंदर बनाने की जिम्मेवारी नगर पर्षद के साथ-साथ यहां के लोगों की भी है
क्या कहते हैं बुद्धिजीवी : इस संबंध में डॉ अनिल सिंह ने कहा कि जब तक जन चेतना जागृत नहीं होगी, तब तक नगर को स्वच्छ और सुंदर नहीं बनाया जा सकता. आबादी काफी बढ़ गयी है. सरकारी संस्थानों के भरोसे ही सफाई व्यवस्था नहीं छोड़ी जा सकती है.
वहीं, समाजसेवी टीएन चौबे ने कहा कि पर्षद अपना काम बेहतर ढंग से नहीं कर रहा है. हमलोगों को भी आगे बढ़ कर शहर की साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए हाथ बटाना चाहिए, ताकि बक्सर शहर को साफ और सुंदर किया जा सके.
अधिवक्ता विनय कुमार सिन्हा ने बताया कि इसके लिए नगर पर्षद और जिला प्रशासन द्वारा शहरवासियों के साथ एक बैठक करनी चाहिए, ताकि शहर को साफ और सुंदर बनाने के लिए सभी लोग अपना विचार रखें और बाद में उस पर विचार कर उसे अमलीजामा पहनाया जा सके. प्रोफेसर सच्चिदानंद सिन्हा ने कहा कि बक्सर में नगर पर्षद की सफाई की कोई कार्य योजना नहीं है.जब तक कोई ठोस कार्य योजना बना कर अभियान कों गति नहीं देगा, तब तक स्वच्छ व सुंदर बक्सर की कल्पना नहीं की जा सकती.
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