बक्सर : 5 हजार रुपये का नामी अपराधी राजपुर थाना क्षेत्र के सरेंजा गांव के रहनेवाला पूर्व मुखिया राम सुरेश सिंह उर्फ लंगा यादव को शुक्रवार की रात पटना की एसटीएफ और बक्सर जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने राजपुर के रामपुर से गिरफ्तार कर लिया. रंजीत राय के परिजनों द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार एक नवंबर,2011 को छठ के दिन रंजीत राय और इनके पुत्र पिंटू राय किसी काम से बक्सर गये थे.दोपहर बाद ये दोनों बक्सर से लौटकर सरेंजा स्थित अपने राइस मिल गये़ इसके बाद अपना काम निबटा कर जैसे ही राइस मिल से बाहर निकले,
उसी बीच पहले से घात लगा कर बैठे अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग करके रंजीत राय को मौत की नींद सुला दी, लेकिन संयोग ही कहा जायेगा कि उस वक्त इनका पुत्र पिंटू राय भी साथ था, लेकिन वह बाल-बाल बच गया.इसके बाद से फरार चल रहे लंगा यादव ने अपना वर्चस्व कायम कर लिया़ यहां तक कि यह अपने समर्थकों से मिलने के लिए अक्सर सरेंजा आया करता था, लेकिन पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहता था़ फिलहाल पंचायत चुनाव, 2016 में पुन: अपना वर्चस्व कायम करने के लिए अपनी पत्नी सुखराजो देवी को मैदान में उतारा है,तो दूसरी तरफ रंजीत राय के पुत्र पिंटू राय भी चुनावी मैदान में हैं, जिसको लेकर एक बार फिर यहां की पंचायती राजनीति में गरमाहट शुरू हो गयी है,जिसको लेकर पुलिस को भी भनक लगी और पटना की एसटीएफ टीम ने इस पर सर्च अभियान चला कर इसे गिरफ्तार कर लिया है़
कई मामले हैं दर्ज : लंगा यादव पर कई मामले दर्ज हैं, जिनमें राजपुर थाने में तीन मामलों को लेकर पुलिस काफी बेसब्री से खोज कर रही थी. इन मामलों में राजपुर थाना कांड संख्या 14/11 में गांव के ही ध्रुव यादव की हत्या के आरोप में, 121/11 रंजीत की हत्या के आरोप में, 139/11 के तहत आर्म्स एक्ट और हत्या के मामले में सिकरौल के सुभाष राय द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आरोप में और एक मामला कोचस थाना में हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी है.
छठ की शाम को नहीं भूले हैं सरेंजा के लोग : राजपुर.दिवंगत रंजीत राय का परिवार आज भी उस छठ की शाम को नहीं भूल पाया है़. उसके परिवार के लोगों को आज भी मलाल है कि छठ के दिन घर पर भी व्रत किया गया था, जिसको लेकर सारी तैयारी कर ली गयी थी़ घर के सदस्य रंजीत राय का इंतजार कर रहे थे़ जबकि रंजीत राय अपने बेटे के साथ बक्सर से लौटकर अपने राइस मिल गये. इसके बाद जैसे ही घर के लिए रवाना हुए कि अपराधियों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया था.
इसकी खबर घरवालों को मिलते ही पल भर की खुशी मातम में बदल गयी़ चारों तरफ चीखने-चिल्लाने की आवाज गूंजने लगीं. इसके साथ छठ घाट पर बैठे व्रतियों ने जैसे ही घटना सुनी कि सभी लोग आनन-फानन में अपने घर को लौट गये़ चारों तरफ रोड से लेकर घाट तक टोकरी में भरा हुआ फल बिखरा पड़ा था़. रंजीत की पत्नी चंद्रावती देवी आज भी इस घटना को याद करके सिहर उठती हैं. यह घटना आज भी इनके दिलों को झकझोर कर रख देती है.
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