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buxar news : जिले की ग्राम कचहरियों में एक साल में 485 मामले दर्ज, निबटाये गये महज 176

Updated at : 27 Nov 2025 10:00 PM (IST)
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buxar news : जिले की ग्राम कचहरियों में एक साल में 485 मामले दर्ज, निबटाये गये महज 176

buxar news : मामलों के निबटारे में जिले की ग्राम कचहरियों का बुरा हालअधिकतर झगड़े बिना रिकॉर्ड रखे कर दिये जा रहे सेटलब्रह्मपुर प्रखंड के तीन ग्राम कचहरियों में एक साल में दर्ज किये गये शून्य केस

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buxar news : ब्रह्मपुर. ग्रामीण इलाकों में छोटी-छोटी बातों पर उत्पन्न होनेवाले विवादों को रोकने के लिए सरकार ने बड़ी उम्मीदों के साथ ग्राम कचहरियों की व्यवस्था की थी.

सरपंच से लेकर वकील और सरकारी कर्मचारियों तक की दक्षता युक्त टीम तैनात की गयी, ताकि गांव के झगड़े थाने की दहलीज तक न पहुंचे, पर हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. जिम्मेदारों की लापरवाही ने सरकार के सपने पर पानी फेर दिया है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जिन मामूली विवादों को गांव में निबटना था, वह सीधे थानों में मुकदमे के रूप में दर्ज हो रहे हैं. पंचायती राज विभाग के इ-कोर्ट पोर्टल पर दर्ज आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं. बीते एक साल में जिले के 11 प्रखंड की कुल पंचायतों में मिलाकर दीवानी के 309 और फौजदारी के 176 मामले दर्ज किये गये. इसमें केवल 108 दिवानी और 65 फौजदारी के मामले सुलझाये गये हैं, जो किसी भी नजरिये से बेहद चौंकाने वाला और चिंता बढ़ाने वाला आंकड़ा है. ब्रह्मपुर प्रखंड के बराढ़ी, गहौना व उतरी नैनीजोर पंचायतों की स्थिति काफी चिंताजनक है. इन पंचायतों में एक साल में एक भी केस ग्राम कचहरी में दर्ज नहीं किये गये हैं.

ग्राम कचहरी में तुरंत निबटारे के नाम पर हो रही लीपापोती

कर्मियों के अनुसार गांव में जब कोई छोटा विवाद होता है, तो पीड़ित तुरंत सरपंच के पास पहुंचते हैं. नियमों के मुताबिक कार्रवाई में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है, लेकिन गांव के सामाजिक दबाव और तुरंत निबटारे के दबाव में सरपंच अक्सर कानूनी प्रक्रिया को किनारे रखकर सामाजिक समझौता करा देते हैं, जिसका नतीजा है कि मामला ग्राम कचहरी की किताबों में दर्ज ही नहीं होता और इस तरह अधिकतर झगड़े बिना रिकॉर्ड रखे सेटल कर दिये जाते हैं, जो असल में लीपापोती का ही रूप है.

थानों में दर्ज हो रहा है धारा 107 के तहत केस

शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो, जब थाने में 10-15 छोटे-मोटे विवाद दर्ज न हों. पदाधिकारियों के अनुसार भाई-भाई का झगड़ा, गोतिया विवाद, गाली-गलौज, जमीन की खटपट और जलनिकासी जैसे मामले अगर ग्राम कचहरी में ही सुलझ जाये तो थाने में अनावश्यक भीड़ नहीं बढ़ेगी. बताया जाता है कि जब ग्राम कचहरी स्तर पर समाधान नहीं होता, तब मजबूरन लोग थाने का रुख करते हैं. कई मामलों में शांति भंग की आशंका को देखते हुए पुलिस को धारा 107 के तहत कार्रवाई तक करनी पड़ती है. इससे पुलिस का नियमित और जन-संबंधी कार्य प्रभावित होता है, क्योंकि पूरा समय छोटे-छोटे विवादों को सुलझाने में ही लग जाता है. ग्राम कचहरी का मूल उद्देश्य गांवों में त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है. पंचायत स्तर पर स्थापित यह व्यवस्था दीवानी और आपराधिक मामलों का निबटारा कर लोगों और लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत देती है. ग्राम कचहरी की भूमिका सिर्फ विवाद सुलझाने तक सीमित नहीं है. इसके अलावा गांव में शांति, सौहार्द और सामाजिक संतुलन बनाये रखने में भी इसकी महत्वपूर्ण भागीदारी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH KUMAR

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By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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