आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया डेढ़ साल से नहीं मिला, सेविका परेशान
Author Prabhat khabar digital desk
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डुमरांव : प्रखंड में अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र किराये के मकान में ही चलता है. प्रखंड में कुल केंद्रों की संख्या 217 है. इसमें अब भी 173 केंद्र किराये के मकान में चलता है. मात्र 44 आंगनबाड़ी केंद्रों काे ही अपना भवन नसीब है. आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण हो या शहरी किराया मात्र 750 रुपये प्रतिमाह विभाग […]
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डुमरांव : प्रखंड में अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र किराये के मकान में ही चलता है. प्रखंड में कुल केंद्रों की संख्या 217 है. इसमें अब भी 173 केंद्र किराये के मकान में चलता है. मात्र 44 आंगनबाड़ी केंद्रों काे ही अपना भवन नसीब है.
आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण हो या शहरी किराया मात्र 750 रुपये प्रतिमाह विभाग द्वारा मिलता है लेकिन यह भी राशि समय पर नहीं मिलती. इसके लिए सेविकाओं को एक-दो साल इंतजार करना पड़ता है. लेकिन जिस मकान में केंद्र चलता है, उसका मालिक प्रतिमाह सेविकाओं से किराया का डिमांड करता है.
किराया मकान मालिक के खाते में भेजा जा सके, इसके लिए बाल विकास परियोजना ने सभी सेविकाओं से मकान मालिक के द्वारा एक किरायानामा लिया गया है. डेढ़ वर्ष गुजरने को है मगर अब तक किराये की राशि नहीं मिली है, जिस कारण सेविकाओं की चिंता बढ़ गयी है. कारण मकान मालिक लगातार किराये की राशि का डिमांड कर रहे हैं.
संघ की जिला महासचिव लीलावती देवी, मंजू कुमारी, किरण देवी, ललिता देवी, अर्चना जायसवाल कहती हैं कि न समय से वेतन मिल पाता है न आंगनबाड़ी केंद्र किराया की राशि. लिहाजा सेविकाओं को आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है.
सेविकाओं की मानें तो विभागीय उदासीनता के चलते मार्च माह में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आवंटित राशि विभागीय लापरवाही के कारण वापस लौट गयी.
इधर बाल विकास परियोजना विभाग की ओर से कई बार सेविकाओं से अपने-अपने क्षेत्र में सरकारी भूमि की खोज कर विभाग को बताने को कहा गया. लेकिन सेविकाओं की उदासीनता से आज भी अधिकतर केंद्र किराये के मकान में चल रहा है. प्रभारी सीडीपीओ मीना कुमारी कहती है कि विभाग के द्वारा राशि आवंटित होते ही सेविकाओं के खाते में आवंटित कर दिया जायेगा.
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