कहीं इतिहास के पन्नों तक न सिमट जाये नवरत्नगढ़ किला
Updated at : 08 May 2019 12:59 AM (IST)
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डुमरांव : बक्सर जिले के नया भोजपुर स्थित राजभोज का नवरत्नगढ़ किले को पर्यटन स्थल तो नहीं, इसे संरक्षित करने में अधिकारी व पदाधिकारी भी उदासीन बने हुए हैं. तभी तो अब तक यह नवरत्नगढ़ किला लगातार खंडहर था और भी खंडहर बनता जा रहा है. जिला प्रशासन भले लगातार किले का जायजा लेकर जाते […]
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डुमरांव : बक्सर जिले के नया भोजपुर स्थित राजभोज का नवरत्नगढ़ किले को पर्यटन स्थल तो नहीं, इसे संरक्षित करने में अधिकारी व पदाधिकारी भी उदासीन बने हुए हैं. तभी तो अब तक यह नवरत्नगढ़ किला लगातार खंडहर था और भी खंडहर बनता जा रहा है. जिला प्रशासन भले लगातार किले का जायजा लेकर जाते हैं लेकिन पहल करना मुनासिब नहीं समझते.
किले के समीप एक स्कूल में गुफा मिला तो, यह जगह चर्चा में आया. इसको देखने के लिए जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी व पदाधिकारी तक पहुंचे, लेकिन आज फिर हालात ज्यों- का- त्यों बना हुआ है. एक लोकोक्ति ‘बावन गली 53 बाजार, दीया जले 56 हजार’ आज भी इतिहास के पन्नों से लेकर जुबान पर हमेशा दुहराई जाती है.
डुमरांव स्टेशन से लगभग दो किलोमीटर उत्तर दिशा में ‘भोजपुर’ के नाम से विख्यात राजा भोजदेव की राजधानी भोजपुर है. आज उनके द्वारा निर्मित नवरत्नगढ़ किला ध्वस्तता की ओट से अपनी बदहाली पर आंसू बहाता मलबे में तब्दील नजर आता है. किंवदंती की मानें तो इसकी आबादी 56 हजार परिवारों की थी.
प्राचीन भवन, नदी, तालाब, मंदिर, मस्जिद तथा अनेक अवशेष इस नगर के पौराणिकता के दस्तावेज है. सन् 1685 में निर्मित शाहाबाद जिला, जो 1972 में रोहित के प्रसिद्ध रोहतासगढ़ के नाम पर ‘रोहतास’ एवं राजा भोजदेव के नाम पर ‘भोजपुर’ जिले को अलग किया गया तथा 17 मार्च 1991 को बक्सर जिले का सृजन किया गया.
नया भोजपुर के संतोष मिश्र, आशुतोष पांडेय, धीरज कुमार, मो फरीद, मो कमरान अहमद कहते हैं कि राजभोज का नवरत्नगढ़ किला को जिला प्रशासन पर्यटनस्थल बना देना चाहिए ताकि देश-विदेशों से लोगों का आवागमन होता.
क्योंकि नवरत्नगढ़ किले की चर्चा किताबों में पढ़ने व देखने को मिलती है. मुखिया प्रतिनिधि वचन सिंह यादव, संतोष मिश्र, कमरान अहमद, प्रियंका पांडेय, आशुतोष पांडेय, जूही पांडेय ने कहा कि नवरत्नगढ़ किला जिले की ऐतिहासिक धरोहर है.
बिहार सरकार व जिला प्रशासन इसको संरक्षित करना चाहिए, ताकि युवा इससे रूबरू हो सके. किले के समीप एक स्कूल की निर्माण के दौरान नींव खुदाई में किले का अवशेष देखने को मिल चुकी है. इ
सको देखने के लिए महाराजा बहादुर कमल सिंह, युवराज चंद्रविजय सिंह, स्थानीय सांसद व विधायक सहित हजारों लोग देखने के लिए पहुंच रहे थे. कुछ दिनों तक यह मेला जैसा नजारा देखने को मिला. सुरक्षा को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती भी की गयी थी, लेकिन दिन गुजरते गये, लेकिन इसके संरक्षित पर अब तक पहल नहीं हुई.
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