बिना प्रधानाध्यापक के ही चल रहे हैं 46 हाइस्कूल

बक्सर : शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहा है. इस प्रयास के तहत विद्यालयों के भवनों को अत्याधुनिक व मॉडल बनाया गया है. विद्यार्थियों की सुविधा को देखते हुए विद्यालयों को सरकार ने अपग्रेड कर दिया है, लेकिन शिक्षा में सुधार की बुनियादी सुविधाओं पर […]
बक्सर : शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहा है. इस प्रयास के तहत विद्यालयों के भवनों को अत्याधुनिक व मॉडल बनाया गया है. विद्यार्थियों की सुविधा को देखते हुए विद्यालयों को सरकार ने अपग्रेड कर दिया है, लेकिन शिक्षा में सुधार की बुनियादी सुविधाओं पर विभाग व सरकार ने ध्यान अब तक नहीं दिया है.
जिसके कारण शिक्षा के स्तर में सुधार की बजाय और गिरावट ही आ गयी है. यदि ध्यान जिले के केवल उच्च विद्यालयों पर डालें, तो जिले के 71 उच्च विद्यालयों में महज 25 विद्यालयों में ही प्रधानाध्यापक मौजूद हैं. अन्य 46 विद्यालय प्रभारी प्रधानाध्यापकों के नेतृत्व में चल रहे हैं, जिसके कारण विद्यालयों के हर प्रकार के काम में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
प्रभारी प्रधानाध्यापकों को वैसे वित्तीय अधिकार नहीं हैं जिस बिल को ट्रेजरी से पास कराना पड़ता है. विद्यालय के हर भुगतान के लिए निर्धारित डीडीओ के माध्यम से बिल पास कराना होता है, जिसके कारण प्रभारी प्रधानाध्यापकों को 20 से 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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