एक जुलाई से अब कफन और बांस पर भी टैक्स लगाने की तैयारी
Updated at : 29 Jun 2017 4:29 AM (IST)
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जीएसटी को लेकर माथापच्ची शुरू, कैसे बने स्टॉक रजिस्टर 50 फीसद व्यवसायियों को समझ नहीं आ रहा जीएसटी बक्सर : रोटी-कपड़ा और मकान यह मूलभूत आवश्यकताओं में आता है. इनसान जन्म से लेकर मृत्यु तक कपड़े में लिपटा रहता है, अभी तक रेडीमेड कपड़ों पर वैट लगता था. बिना सिले कपड़े अब तक टैक्स के […]
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जीएसटी को लेकर माथापच्ची शुरू, कैसे बने स्टॉक रजिस्टर
50 फीसद व्यवसायियों को समझ नहीं आ रहा जीएसटी
बक्सर : रोटी-कपड़ा और मकान यह मूलभूत आवश्यकताओं में आता है. इनसान जन्म से लेकर मृत्यु तक कपड़े में लिपटा रहता है, अभी तक रेडीमेड कपड़ों पर वैट लगता था. बिना सिले कपड़े अब तक टैक्स के दायरे में नहीं थे. लेकिन देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) प्रभावी होने के बाद अंतिम यात्रा में श्मशान पहुंचाने वाली अरथी पर भी टैक्स देना होगा. एक जुलाई के बाद कफन और बांस पर भी पांच फीसदी के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा. अभी तक ये कर मुक्त थे.
टैक्स देने के बाद ही बैकुंठ की यात्रा पर जाने वालों को कंधा नसीब होगा. जीएसटी लागू होने के बाद यह बात साफ हुई कि अब कपड़े को भी पांच फीसदी टैक्स के दायरे में लाया गया है. शहर के व्यापारियों का कहना है कि कपड़ा मूलभूत आवश्यकताओं में आता है. इस पर आज तक कोई टैक्स नहीं लगा. कफन में भी कपड़ा काम आता है. सरकार अब कफन पर भी जीएसटी लगाना चाहती है. कफन पर टैक्स लगने के बाद अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि यह कैसा राम राज्य जहां अब कफन खरीदने के लिए भी टैक्स देना होगा.
छोटे व्यापारियों के लिए ज्यादा परेशानी का सबब: व्यापारियों का कहना है कि उन्हें जीएसटी से कोई आपत्ति नहीं है. यदि सरकार को जीएसटी लगानी है तो छोटे व्यापारियों की जगह उद्योगों पर लगाये. कपड़े का व्यापार फेरी वाले, गरीब व अनपढ़ व्यापारी भी करते हैं. इन्हें कंप्यूटर चलाना नहीं आता. जीएसटी लागू होने से यह सभी बेरोजगार हो जायेंगे. इस पर जीएसटी नहीं होनी चाहिए. जिले के कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि आजादी के बाद से ही कपड़ा कर मुक्त था.
60 वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने उत्पादन केंद्र से कपड़े पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाया. जिसे सभी ने मंजूर किया लेकिन बीच-बीच में सरकार कपड़े पर वैट लगाने की कोशिश की. विरोध हुआ तो इसे वापस लिया. लेकिन सरकार एक बार फिर कपड़ा व्यवसायियों पर जीएसटी लगा रही है. कपड़ा व्यापार उधार पर चलता है लेकिन जीएसटी आने के बाद हमें उसका भी टैक्स देना पड़ेगा.
देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग बॉर्डर पर अब अलग-अलग टैक्स नहीं लगेगा. टैक्स के चक्कर में महीने दिन तक गाड़ियां फंस जाती थीं. जिससे व्यापारियों को नुकसान
उठाना पड़ता था. जीएसटी लागू हो जाने से इस समस्या से निदान मिल जायेगा. महंगाई दर भी कम होने के आसार हैं.
दीपक पांडेय, हार्डवेयर व्यवसायी
क्या कहते हैं शहर के व्यवसायी
ताज्जुब है कि सरकार कफन पर भी जीएसटी लगा रही है, जबकि आजादी के बाद से ही कपड़ा कर मुक्त था. हमारी मांग है कि सरकार उत्पादन केंद्र वाले स्थान पर एकमुश्त जीएसटी लगाकर टैक्स लें. कपड़ा व्यापार उधार पर चलता है लेकिन जीएसटी आने के बाद हमें उसका भी टैक्स देना पड़ेगा.
शिवजी खेमका, कपड़ा व्यवसायी, बक्सर
अधिकतर व्यापारी कम पढ़े-लिखे नहीं हैं, जिन्हें जीएसटी की समझ नहीं है. जीएसटी लगाकर सरकार छोटे व्यापारियों को मारकर अमेजॉन, वॉलमाट जैसी ऑनलाइन माल बेचने वाली कंपनियों को फायदा पहुंचाने की तैयारी कर रही है.
श्री नारायण लोहिया, अधिवक्ता, टैक्स
जीएसटी आने के बाद कपड़ा 20 प्रतिशत तक महंगा हो जायेगा. यह सिंगलमैन व्यापार होता है. इसमें व्यापारी माल की कब खरीद-बिक्री करेगा और कब टैक्स देगा. एक ओर सरकार किसानों का कर्ज माफ कर रही है तो दूसरी ओर टैक्स देने वालों को और परेशान करने में जुटी हुई है. इससे हम सभी हताश और निराश हैं.
मो अखलाख अंसारी, कपड़ा व्यवसायी
पहले अलग-अलग वस्तुओं का टैक्स अलग था. जीएसटी का मतलब एक देश एक टैक्स है. अब पूरे देश में एक ही टैक्स लगेगा. यह केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से लिए जा रहे 20 से अधिक अप्रत्यक्ष कर के एवज में लगाया जा रहा है. देश के लिए यह टैक्स फायदेमंद साबित होगा.
विनायक कुमार, सीमेंट, व्यवसायी.
5. जीएसटी क्या है. इसके क्या फायदे हैं. इसकी जानकारी ज्यादातर व्यापारियों को नहीं है. किस वस्तु पर क्या टैक्स लगेगा इसके लिए कोई विस्तृत जानकारी नहीं मिल रही है. अखबार व टेलीविजन के माध्यम से जो कुछ जानकारी मिल रही है उसके अनुरूप तैयारी की जा रही है. -फोटो-17-सुमित पाहवा, व्यवसायी.
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