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गर्भावस्था में आरामतलबी छीन रही मासूमों की सांसें, जानें PMCH में हुई स्टडी की क्या है खास बातें

तथ्य पीएमसीएच व पटना ऑब्स एवं गायनी सोसाइटी की हाल ही में किये गये स्टडी रिपोर्ट में सामने आएं हैं. विशेषज्ञों ने इसे गंभीर मानते हुए बेहद सतर्कता बरतने की सलाह दी है. यह स्टडी सोसाइटी व विभाग की महिला डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने मिलकर किया है.

पटना. गर्भावस्था के दौरान घंटों मोबाइल पर बिताना, जंक फूड खाना, घर में छोटे मोटे काम व व्यायाम न करना गर्भवती महिलाओं को ब्लड शुगर का शिकार बना रहा है. शुगर का लेवल गर्भ पल रहे शिशुओं की सांसें तक छीन रहा है. साथ ही दिमाग व शरीर का विकास भी रोक रहा है. तथ्य पीएमसीएच व पटना ऑब्स एवं गायनी सोसाइटी की हाल ही में किये गये स्टडी रिपोर्ट में सामने आएं हैं. विशेषज्ञों ने इसे गंभीर मानते हुए बेहद सतर्कता बरतने की सलाह दी है. यह स्टडी सोसाइटी व विभाग की महिला डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने मिलकर किया है.

10 में से चार में हाई शुगर, चार साल पहले 25 से तीन थी

स्टडी में पाया गया कि पीएमसीएच समेत प्रदेश के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना 10 में चार गर्भवती महिलाएं हाई शुगर से पीड़ित मिल रही हैं. डॉक्टरों के अनुसार चार साल पहले यह ग्राफ काऊी कम था. पहले 25 से दो से तीन में हाई शुगर निकलती थी. यह काफी चिंता का कारण बन चुका है. इसको लेकर अलर्ट रहने की बेहद जरूरत है. स्टडी में पाया गया कि हाइ लेवल शुगर का परिणाम यह है कि गर्भ में ही बच्चों की मौत हो रही है. पीएमसीएच में बीते छह माह में 30 से अधिक मामले आ चुके हैं. इसमें से अधिकांश मामले रेफर के हैं.

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नवजात पर दुष्प्रभाव

  • रीढ़ की हड्डी का विकास नहीं

  • दिमाग का समुचित विकास नहीं

  • शिशुओं में किडनी संबंधी जन्मजात दिक्कत

  • मोटापा से पीड़ित, शरीर के विकास में रोधक

इन बातों का रखना होगा ख्याल

  • – मोटा अनाज का सेवन जरूर करें

  • – जंक फूड से पूरी तरह दूरी रखें

  • – मानसिक तनाव बिल्कुल न लें

  • – ज्यादा मोबाइल का भी इस्तेमाल खतरनाक

  • – दिन में कुछ देर हल्का व्यायाम जरूर करें

  • – फल के साथ ही सब्जियों का भी सेवन करें

सातवें महीने में ज्यादा खतरा

पटना ऑब्स एवं गायनी की पूर्व अध्यक्ष डॉ विनिता सिंह ने बताया कि शुगर लेवल के मामले बढ़ रहे हैं, जिसको देखते हुए गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहने को कहा जा रहा है. वहीं हाइ शुगर के कारण गर्भ में होने वाली अधिकांश मौतें सातवें या आठवें महीने में होती है. उन्होंने बताया कि कुछ शुरुआती तो कुछ पांचे महीने में बीमारी की चपेट में आ रही हैं. इससे बचने के लिए गर्भावस्था के दौरान जांच व इलाज कर बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है.

विशेषज्ञ का कहना है

पीएमसीएच स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की असिटेंट प्रो. डॉ अमृता राय का कहना है किमहिलाओं को डायबिटीज तेजी से चपेट में ले रही है. पीएमसीएच की ओपीडी व इमरजेंसी में आयी मरीजों की स्टडी के बाद शुगर संबंधित बीमारी का पता चला है. हाइ शुगर लेवल का परिणाम है कि गर्भ में ही बच्चे की सांसे थम जाती हैं. अधिकांश केसों में महिलाओं को पता ही नहीं रहता है कि वह डाबिटिक हैं.

Prabhat Khabar News Desk
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