बिहार: बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद भी 1500 क्विंटल मुर्गे खा गए भागलपुर के लोग, अब जांच रिपोर्ट का सबको इंतजार

Bird Flu Bihar: भागलपुर में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद भी मुर्गे-मुर्गियों की बिक्री धड़ल्ले से होती रही. संक्रमण फैले 18 दिन गुजर गये और इस दौरान संक्रमण के बाद भी 1500 क्विंटल मुर्गे बिके, पाबंदी के बावजूद बिक्री जारी है.
Bird Flu Bihar: भागलपुर जिला पशुपालन कार्यालय ने बरारी स्थित क्षेत्रीय कुक्कुट प्रक्षेत्र के मुर्गे-मुर्गियों का जो सैंपल गत 29 मार्च को पटना भेजा था, उसी की जांच के बाद राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल ने एवियन इंफ्लूएंजा (H5N1 bird flu) की पुष्टि की है. जाहिर है कि मुर्गे-मुर्गियों में संक्रमण फैले 18 दिन गुजर गये और इस दौरान मुर्गे-मुर्गियों का परिवहन, बिक्री, उपयोग आदि होते रहा. थोक विक्रेताओं से बातचीत में यह पता चला कि प्रतिदिन भागलपुर शहर में 85 से 90 क्विंटल मुर्गे की बिक्री होती है. ऐसे में इन 18 दिनों में 1500 क्विंटल से भी अधिक मुर्गे लोग खा चुके हैं.
जांच रिपोर्ट आने में लंबे वक्त के कारण नुकसान की क्या आशंका है, यह तो पशुपालन विभाग ही बता सकता है. दूसरी तरफ भागलपुर शहर में कुक्कुट प्रक्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में मुर्गे व अन्य पक्षियों की बिक्री पर जिला प्रशासन द्वारा रोक लगाये जाने के बाद भी शहर में धड़ल्ले से मुर्गे की बिक्री होती रही.
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डीएम व वरीय पुलिस अधीक्षक का संयुक्त आदेश शुक्रवार (14 अप्रैल) को ही जारी हुआ है और शहर में शनिवार (15 अप्रैल) को भी मुर्गे की बिक्री प्राय: सभी इलाकों में होती रही. शनिवार की देर शाम तक मुर्गे की ढुलाई, बिक्री आदि होती रही. मुर्गे की बड़ी खरीदारी होटलों, पार्टियों के लिए होती है.
सामान्य जानकारी :
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बर्ड फ्लू मुख्यतः मुर्गियों का संक्रामक रोग है. संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने से यह संक्रमण मनुष्यों में फैल सकता है.
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खासकर बच्चे अगर बीमार पक्षी की बीट और पंखों के संपर्क में आ जायें, तो उनमें संक्रमण फैल सकता है.
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भारत में मनुष्यों में बर्ड फ्लू संक्रमण का कोई भी मामला प्रकाश में नहीं आया है.
सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जुकाम और नाक बहना. ऐसी शिकायत होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को तुरंत सूचना दें. सामान्यतः बर्ड फ्लू का वायरस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर नष्ट हो जाता है. अंडे व चिकन इतने तापमान पर पका कर खाने में कोई नुकसान नहीं है. इससे डरें नहीं, सावधानियां बरतें.
गत 29 मार्च को क्षेत्रीय कुक्कुट प्रक्षेत्र के मुर्गे-मुर्गियों का सैंपल पटना भेजा गया था. यहां से कोलकाता भेजा गया और फिर भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान को जांच के लिए भेजा गया. भोपाल की संस्था ने बर्ड फ्लू की पुष्टि की है. संक्रमित मुर्गे या चूजे को छूने से दिक्कत हो सकती है. लेकिन साबुन से अच्छी तरह हाथ धो लेने के बाद संक्रमण दूर हो जाता है.
– डॉ रणधीर कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी, भागलपुर
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