बेमौसम बारिश से किसानों राहत नहीं

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बेमौसम बारिश से किसानों राहत नहीं

मौसम के उतार-चढ़ाव ने जिले का जनजीवन अस्त व्यस्त कर रखा है. आधी रात में चमक गरज के साथ बारिश ने जिले में सो रहे लोगों को दहला दिया. लेकिन थोड़े अंतराल के बाद ही बारिश समाप्त होने पर लोगों ने राहत की सांस ली.

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शेखपुरा. मौसम के उतार-चढ़ाव ने जिले का जनजीवन अस्त व्यस्त कर रखा है. आधी रात में चमक गरज के साथ बारिश ने जिले में सो रहे लोगों को दहला दिया. लेकिन थोड़े अंतराल के बाद ही बारिश समाप्त होने पर लोगों ने राहत की सांस ली. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार की आधी रात के समय तेज हवा के साथ बादलों का गरजना और चमकना शुरू हुआ. उसके बाद तेज गति से कुछ देर के लिए बारिश भी देखी गई. हालांकि इस दौरान बारिश के कारण तापमान में कुछ गिरावट देखी गई. जिले का न्यूनतम तापमान सवेरे में 22.6 डिग्री सेंटीग्रेड दर्ज किया गया. लेकिन, दिन निकलने के साथ अधिकतम तापमान में वृद्धि देखी गई. जिले का अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेंटीग्रेड दर्ज किया गया. जो कि पिछले दिन के तापमान के ही लगभग रहा. इस बीच मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और मौसम के बदले मिजाज का असर जिले में अभी आने वाले दिनों में जारी रहेगी. 48 घंटे के बाद मौसम के साफ होने और तापमान में वृद्धि दर करने की संभावना है. जिससे जिले में फिर से उष्ण लहर का कहर लोगों को देखना पड़ेगा. पिछले महीने रुक रुक कर लगातार हुई बारिश में जिले के खेती किसानी की पूरी तरह कमर ही तोड़ दी. खेतों में खड़े गेहूं के फसल और प्याज गर्मा सब्जी आदि को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. प्याज उत्पादक किसानों को भारी नुकसान

जिले में प्याज का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है. प्याज की खेती में बारिश का पानी जहर के समान माना जाता है.लेकिन इस बार के बेमौसम बारिश में प्याज उत्पादक किसानों को बारिश कुछ –कुछ दिनों के अंतराल में लगातार परेशान कर रखा है. इन दिनों किसान खेतों से प्याज की तैयार फसल को निकालने में जुटे हैं. इसके कारण बड़े पैमाने पर किसानों के खेतों में प्याज की तैयार फसल उखाड़ी जा रही है. इस समय की बारिश में तैयार फसल में बारिश के पानी लगने से उसे गलकर तैयार होने का खतरा ज्यादा होता है. बारिश होने पर प्याज के थोक विक्रेता भी किसानों से प्याज को फसलों को खरीदने से बचते हैं.जिसका खामियाजा किसानों को झेलना पड़ता है. भण्डारण की क्षमता नहीं होने से किसान औने पौने दाम पर प्याज को बेचने को मजबूर होते हैं.

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Santosh Kumar Singh

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