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सीता नवमी आज, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

Updated at : 05 May 2025 9:39 PM (IST)
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सीता नवमी आज, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

सीता नवमी का पर्व हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है. इस वर्ष शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि मंगलवार को पड़ रहा है.

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बिहारशरीफ. सीता नवमी का पर्व हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है. इस वर्ष शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि मंगलवार को पड़ रहा है. धार्मिक तथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भूमि से माता सीता का जन्म हुआ था .इस दिन को सीता नवमी तथा जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है. इस विशेष दिन को लेकर जिले के भक्तों तथा श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है. ऐसी मान्यता है कि इस शुभ दिन पर माता सीता की विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. श्रद्धालुओं को सीता नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता सीता की पूजा अर्चना करनी चाहिए . इस संबंध में पंडित श्रीकांत शर्मा आचार्य ने बताया कि इसके लिए सर्व प्रथम पूजा स्थान को साफ कर गंगाजल आदि का छिड़काव कर पूजा स्थल को शुद्ध कर लेना चाहिए . इसके बाद भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करनी चाहिए. पूरी आस्था के साथ रोली, चंदन, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप आदि से माता सीता तथा प्रभु श्री राम की पूजा अर्चना करनी चाहिए. पूजा के अंत में माता सीता और भगवान राम की आरती गाने के बाद सीता नवमी व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण करना चाहिए . इस दिन भक्तों तथा श्रद्धालुओं को व्रत रखकर पूरे दिन भगवान का ध्यान करना चाहिए .शाम में फिर से पूजा कर लोगों के बीच प्रसाद वितरण करना चाहिए . इससे व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं माता सीता की जन्म की कथा :-

पंडित श्रीकांत शर्मा आचार्य ने बताया कि बाल्मिकी रामायण के अनुसार एक बार मिथिला में भयंकर सूखा पड़ा था. इससे राजा जनक बेहद परेशान थे. राज्य की प्रजा काफी परेशान हो रही थी .इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और खुद धरती पर हल चलाने का मंत्र दिया था. राजा जनक ने अपनी प्रजा के लिए यज्ञ करवाया और फिर धरती पर हल चलाने लगे. तभी उनका हल धरती के अंदर किसी वस्तु से टकराया. मिट्टी हटाने पर उन्हें वहां सोने की डलिया में मिट्टी में लिपटी एक सुंदर कन्या मिली थी. जैसे ही राजा जनक सीता जी को अपने हाथ से उठाया, वैसे ही तेज बारिश शुरू हो गई. राजा जनक ने इस कन्या का नाम सीता रखा और उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया था. भक्ति व श्रद्धालु इस दिन माता-सीता तथा प्रभु श्री राम की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

मंदिरों में जुटेंगे श्रद्धालु:-

जानकी नवमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शहर के विभिन्न मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए पहुंचने की उम्मीद है. इसलिए शहर के सभी प्रमुख मंदिरों को साफ सुथरा कर सजाया गया है. विशेष रूप से जानकी नवमी का पर्व मंगलवार के दिन पड़ने के कारण श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है. मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की पूजा अर्चना करने के लिए विशेष दिन माना जाता है. इसलिए इस दिन धनेश्वर घाट सहित शहर के विभिन्न हनुमान मंदिरों तथा शिव मंदिरों में श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए पहुंचेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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