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विम्स पावापुरी में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी

Updated at : 18 May 2024 9:24 PM (IST)
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विम्स पावापुरी में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी

जिले की चिकित्सा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार की ओर से मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल संचालित किये जा रहे हैं. पावापुरी मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में अब तक न्यूरोलिस्ट,कार्डियोलॉजिस्ट समेत कई रोगों के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर तक पदस्थापित नहीं हैं.

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बिहारशरीफ/गिरियक . जिले की चिकित्सा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार की ओर से मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल संचालित किये जा रहे हैं. पावापुरी मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में अब तक न्यूरोलिस्ट,कार्डियोलॉजिस्ट समेत कई रोगों के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर तक पदस्थापित नहीं हैं. लिहाजा इन रोगों के मरीजों को इलाज के लिए पटना रेफर करना पड़ता है. जिससे मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी फजीहत उठानी पड़ती है. कभी कभार स्थिति यह हो जाती की गंभीर रूप से बीमार रोगियों को समय पर इलाज नहीं होने से पटना जाने के दौरान रास्ते में ही जान भी गंवानी पड़ती है. यह अस्पताल पिछले आठ वर्षों से संचालित हो रहा है.

प्रतिदिन दर्जनों मरीजों को हायर सेंटर करना पड़ता रेफर

विम्स पावापुरी अस्पताल पिछले आठ वर्षों से संचालित किया जा रहा है. ओपीडी से लेकर आकस्मिक चिकित्सा की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं. परंतु अब तक यहां पर न्यूरोलिस्ट,कार्डियोलॉजिस्ट ,नेफ्ररोलॉजिस्ट जैसे सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती अब तक नहीं हो पायी है. न्यूरोलिस्ट के पदस्थापित नहीं रहने से हेड इंज्यूरी वाले रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद पीएमसीएच आदि हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है. अस्पताल में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर की कमी के कारण प्रतिदिन दर्जनों मरीज हायर सेंटर रेफर हो रहे हैं. सबसे बुरा हाल सड़क दुर्घटना या मारपीट में घायल लोगों का हो रहा. न्यूरोलॉजी के डॉक्टर नहीं रहने से सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को पावापुरी मेडिकल कॉलेज से प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया जा रहा हैं. करोड़ों की लागत से बना पावापुरी अस्पताल के उद्घाटन के आठ साल बीत गये. पिछले वर्ष सूबे की सरकार ने वर्धमान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान पावापुरी का नाम बदलकर भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान पावापुरी कर दिया , अस्पताल का नाम बदल गया. रंगाई पुताई और बैनर पोस्टर भी लग गए. लेकिन स्थानीय सहित दूर दराज से आने वाले मरीजों को मूलभूत सुविधाओं में वृद्धि नहीं हो पायी है.

नालंदा के अलावा कई जिलों से पहुंचते हैं रोगी

इस अस्पताल में नालंदा नवादा शेखपुरा जमुई जैसे जिलों के हजारों मरीजों को न्यूरोलॉजी डॉक्टर के सुविधा नहीं मिल पा रहीं हैं। नतीजतन न्यूरो (मस्तिष्क, नस, मांसपेशियों और रीढ़ आदि से संबंधित) के गंभीर मरीजों के इलाज में पावापुरी मेडिकल कॉलेज हाथ खड़े कर दे रहा है. इमरजेंसी ही नहीं ओपीडी के भी गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है. ऐसे मरीजों की संख्या प्रतिदिन तीन से चार है . पावापुरी मेडिकल कॉलेज सटे रांची पटना फोरलेन है. जहां प्रतिदिन दर्जनों एक्सीडेंटल केस पावापुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं लेकिन इन प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है . सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को समय से उपचार न मिलने की वजह से उनकी सांसे वहीं दम तोड़ देती हैं. सुविधा मिलने की आस में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. दरअसल मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट ही नहीं है. ऐसे में हेड इंज्युरी के मरीजों को सीधे 90 किलोमीटर दूर पटना स्थित आईजीएमएस या पीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है ऐसे में गंभीर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. बिहार सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किया जा रहा है .

ओपीडी में हर दिन इलाज को आते दो से ढाई हजार रोगी

प्रतिदिन अस्पताल के ओपीडी में विभिन्न विभागों में चिकित्सा परामर्श लेने के लिए दो से ढाई हजार लोग रजिस्ट्रेशन कराते हैं. मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की काफी कमी है. यहां पर न्यूरोलॉजिस्ट के अलावा कार्डियोलॉजिस्ट और नेफ्ररोलॉजिस्ट भी नहीं हैं.ऐसे में हदय रोग और किडनी रोग से संबंधित मरीजों को भी इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है. हालांकि सीटी स्कैन और सोनोग्राफी की सुविधा मिल पा रही है . डाक्टर बताते हैं कि ऐसे केस में न्यूरो डाक्टर भी इलाज करते हैं या उनका ओपिनियन जरूरी होता है. लेकिन अस्पताल में आज तक न्यूरो डाक्टर पदस्थापित नहीं हुए हैं. इसके कारण सिर पर चोट के जो भी केस आते हैं . विशेषज्ञ चिकित्सकों व एमआरआई जैसे आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण रेफर करना पड़ता हैं. जिसमें सेहर रोज करीब दर्जनों मरीजों को न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर नहीं होने की वजह से उनको रेफर कर दिया जाता है. सबसे ज्यादा ट्रॉमा के मरीजों को परेशानी होती है.

अधिकारी बोले

अस्पताल में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर की कमी है . न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टर पदस्थापित नहीं हैं.इसके लिए विभाग को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है.

डॉ अरुण कुमार सिन्हा, अस्पताल अधीक्षक, विम्स पावापुरी

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