राजगीर में अखिल भारतीय विचार मंथन शिविर संपन्न, छह सूत्री राष्ट्रीय प्रस्ताव पारित
Published by : Vivek Pandey Updated At : 01 Jun 2026 1:45 PM
Rajgir News: आर्थिक आधार पर आरक्षण, ईडब्ल्यूएस को सुविधाएं और धार्मिक न्यास बोर्ड में सुधार की उठी मांग, अखिल भारतीय विचार मंथन शिविर में पढिए पूरी खबर नीचे
Rajgir News: अखिल भारतीय चाणक्य परिषद, सामाजिक चेतना मंच एवं संयुक्त ब्राह्मण संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में एकदिवसीय अखिल भारतीय विचार मंथन शिविर का आयोजन नालंदा जिले के राजगीर स्थित झुनकिया बाबा धर्मशाला में किया गया. शिविर की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक कृपा निधान तिवारी ने की, जबकि संचालन राष्ट्रीय महासचिव राजकुमार दुबे (मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश) एवं बिहार प्रांत संयोजक मृत्युंजय गोपाल ने संयुक्त रूप से किया.
शिविर में देश और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से छह सूत्री राष्ट्रीय प्रस्ताव पारित किए गए. प्रमुख प्रस्तावों में आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू करने तथा भगवान परशुराम की प्रतिमा अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में स्थापित करने की मांग शामिल रही.
धार्मिक न्यास बोर्ड में सुधार की मांग
शिविर में बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की गई. वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं की रक्षा के लिए धार्मिक न्यास बोर्ड का संचालन योग्य साधु-संतों एवं ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों के हाथों में होना चाहिए. साथ ही बोर्ड में राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त करने की मांग भी की गई.
ईडब्ल्यूएस वर्ग को सुविधाएं देने की मांग
बैठक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों को अन्य आरक्षित वर्गों की तरह प्रतियोगी परीक्षाओं में शुल्क छूट और आयु सीमा में रियायत देने की मांग की गई। इसके अलावा सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए सभी जिला एवं प्रदेश मुख्यालयों में छात्रावास की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया.
मांगें नहीं मानी गईं तो संसद तक निकलेगी रथयात्रा
शिविर में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि बिहार सरकार और केंद्र सरकार संगठन की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करती हैं, तो चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। इसके तहत 24 अक्टूबर 2026 को चाणक्य की धरती पाटलिपुत्र से दिल्ली स्थित संसद भवन तक विशाल रथयात्रा निकाली जाएगी.
कई राज्यों से पहुंचे प्रतिनिधि
शिविर में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडेय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भृगुनंदन पांडेय, राष्ट्रीय महामंत्री राजकुमार दुबे, राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री ददन मिश्र, बिहार प्रदेश महिला प्रकोष्ठ संयोजिका शीलम झा, पं. राजकुमार भारत, बिहार प्रदेश संरक्षक पं. दयाशंकर मिश्र सनातनी, श्रीकांत शर्मा, अरुण पांडेय, मिथिलेश पांडेय, प्रदेश संगठन मंत्री आशुतोष कुमार पांडेय, बिहार संरक्षक सुधीर उपाध्याय, जयराम पांडेय, चंद्रभूषण पांडेय, रामप्रीत पांडेय, विवेक रंजन पांडेय, लवकुश पांडेय, मीडिया प्रभारी शशिकांत पाठक, राजेंद्र मिश्र (लखनऊ), केवल कुमार अवस्थी, रामलक्षण पांडेय, श्रीधर पांडेय, अनिल कुमार पांडेय तथा क्रौंचद्वीपीय ब्राह्मण सेवा समिति के केंद्रीय अध्यक्ष शांति सेन पांडेय सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
समाज और अधिकारों के लिए संघर्ष का लिया संकल्प
शिविर के अंत में उपस्थित प्रतिनिधियों ने सामाजिक, शैक्षणिक एवं धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया. वक्ताओं ने कहा कि समाज के हितों की रक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करना समय की आवश्यकता है.
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विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.
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