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राजगीर में पॉलीथिन प्रतिबंध बेअसर

Updated at : 13 Nov 2025 9:54 PM (IST)
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राजगीर में पॉलीथिन प्रतिबंध बेअसर

सिंगल यूज प्लास्टिक और अमानक पॉलीथिन के उपयोग, बिक्री और भंडारण पर सरकारी प्रतिबंध के बावजूद पर्यटक शहर राजगीर में इनका बेखौफ इस्तेमाल जारी है. कानून के अनुसार इनके उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, फिर भी नगर परिषद क्षेत्र के दुकानदार, सब्जी-फल विक्रेता, मांस-मछली व्यापारी, किराना और मिठाई-दवा दुकानदार खुलेआम इसका प्रयोग कर रहे हैं.

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राजगीर. सिंगल यूज प्लास्टिक और अमानक पॉलीथिन के उपयोग, बिक्री और भंडारण पर सरकारी प्रतिबंध के बावजूद पर्यटक शहर राजगीर में इनका बेखौफ इस्तेमाल जारी है. कानून के अनुसार इनके उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, फिर भी नगर परिषद क्षेत्र के दुकानदार, सब्जी-फल विक्रेता, मांस-मछली व्यापारी, किराना और मिठाई-दवा दुकानदार खुलेआम इसका प्रयोग कर रहे हैं. प्रशासन की ओर से इस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है. न तो भंडारण करने वालों पर छापेमारी हो रही है और न ही बिक्री करने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है. थोक व्यापारी भी निर्भीक होकर प्रतिबंधित पॉलीथिन की आपूर्ति कर रहे हैं. अमानक पॉलीथिन लोगों की दैनिक जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. यह धीरे-धीरे पृथ्वी पर जहर घोल रही है. गर्म खाद्य सामग्री को इन पॉलीथिन में रखकर बेचा जाता है. इससे रासायनिक तत्व खाने में मिलकर स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं. लोग हानिकारक प्रभाव जानते हुए भी इसका उपयोग करने से नहीं चूकते हैं. बाजार में बिना थैला लाने वाले उपभोक्ता अक्सर पॉलीथिन का सहारा लेते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है. उपयोग के बाद इन्हें कूड़े, गलियों, खेतों, पइन, पोखरों, नालों और नदी किनारे फेंक दिया जाता है. इससे भूमि और जल दोनों की प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है. इन पॉलीथिनों को जलाने से वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है. राजगीर जैसे पर्यटन स्थल पर यह स्थिति और चिंताजनक है, क्योंकि प्रदूषण पर्यावरण के साथ-साथ शहर की वैश्विक छवि को भी प्रभावित करता है. इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता साफ झलकती है. न तो कोई जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और न ही सड़कों पर जांच अभियान. लोगों की लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता ने इस समस्या को भयावह रूप दे दिया है. यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो पॉलीथिन का यह जहर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों को गहराई से प्रभावित करेगा.

— धरती से आकाश तक जहर फैला रही अमानक पॉलीथिन

अमानक पॉलीथिन आज मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है. यह धीरे-धीरे पृथ्वी और स्वास्थ्य दोनों के लिए जहर साबित हो रही है. लोग इसकी हानियों को जानते हुए भी बेपरवाह हैं. दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर गर्म खाद्य सामग्री तक इसमें रखी जाती है. इससे रासायनिक तत्व भोजन में मिलकर नुकसान बढ़ाते हैं. उपयोग के बाद पॉलीथिन सड़कों, गलियों, खेतों, नालों और पोखरों में फेंकी जाती है. उससे भूमि और जल प्रदूषण बढ़ रहा है. कचरे के ढेर से लेकर नहरों और नालों तक इसका साम्राज्य फैल गया है. इसे जलाने से जहरीला धुआं निकलता है, जो वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहा है. इसके बावजूद लोग इसका प्रयोग जारी रखे हुए हैं. प्रशासन भी कानून को लागू करने में गंभीर नहीं दिख रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण की सारी पहलें निष्फल साबित हो रही हैं.

–थोक बिक्री बंद होने पर खुद व खुद खत्म होगा पॉलीथिन का चलन

दुकानदारों का कहना है कि अमानक पॉलीथिन का उपयोग तभी बंद होगा, जब उसका निर्माण, भंडारण और बिक्री पूरी तरह रोकी जाएगी. उनका तर्क है कि जबतक थोक कारोबारियों पर नकेल नहीं कसा जायेगा, तबतक बाजार में इसकी उपलब्धता बनी रहेगी. छोटे दुकानदार इसे ग्राहकों को देने के लिए मजबूर रहेंगे. वे बताते हैं कि पॉलीथिन सस्ती और सुविधाजनक होने के कारण इसका विकल्प अपनाना आसान नहीं है. प्रशासन इसके निर्माण और थोक बिक्री पर सख्ती से रोक लगाये, तभी इस पर नियंत्रण संभव है. वरना प्रतिबंध केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा.

— अधिकारी बोलीं

सिंगल यूज प्लास्टिक और अमानक पॉलीथिन के उपयोग, बिक्री, भंडारण और उत्पादन पर रोक लगाने के लिए शीघ्र विशेष अभियान चलाया जायेगा. इसके लिए शहर को विभिन्न जोनों में बांटकर टीमों का गठन किया जाएगा. प्रत्येक टीम प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग और भंडारण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करेगी. कानून का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा.

सुश्री कृष्णा जोशी, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, राजगीर

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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